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तीनों सेना के पूर्व प्रमुखों की हुंकार- ‘बॉर्डर का हल निकलना जरूरी, हम पूरी तरह से तैयार’

लद्दाख बॉर्डर पर चीन के साथ जारी तनाव पर शनिवार को दिग्गजों ने मंथन किया. सुरक्षा सभा के मंच पर तीनों सेनाओं के पूर्व प्रमुखों ने मौजूदा हालात के बारे में बात की.

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पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक
पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक

  • भारत-चीन के बीच जारी है तनाव
  • सेना के दिग्गजों ने रखी अपनी राय

भारत और चीन के बीच करीब एक महीने से लद्दाख बॉर्डर पर तनाव की स्थिति है. तनाव के बीच मामले को सुलझाने की कोशिश जारी है. इस बीच आजतक के खास कार्यक्रम ‘सुरक्षा सभा’ में रक्षा विशेषज्ञों ने मौजूदा हालात पर अपनी राय रखी. शनिवार सुबह ‘अबकी बार, चीन से आर-पार’ सेशन में पूर्व सेना अध्यक्ष वीपी मलिक, पूर्व नौसेना प्रमुख सुनील लांबा और पूर्व एयरचीफ एस. कृष्णा स्वामी ने हिस्सा लिया.

इस दौरान सभी ने इस बात पर जोर दिया कि चीन से बॉर्डर विवाद हल करना जरूरी है, लेकिन भारत आज की स्थिति में मजबूत है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार भी है.

कितनी तैयार है थल सेना?

बातचीत के दौरान पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने कहा कि जबतक चीन के साथ बॉर्डर विवाद हल नहीं होता है, तबतक इस तरह के हालात बनते रहेंगे. उन्होंने कहा कि LAC पर दोनों देशों ने 1990 के आसपास माना था कि ये विवादित क्षेत्र है, तब से अबतक कुछ बदलाव और भी हुआ है. अभी भी 12-13 प्वाइंट हैं, जहां पर विवाद होता आया है.

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उन्होंने बताया कि हम फिंगर 8 तक जाते हैं और वो फिंगर 4 तक आते हैं, ऐसे में दोनों देशों को आपस में बातचीत करनी होगी तब मसले का हल निकलेगा. गलवान नदी में इस बार चीन ने LAC को पार किया है, यहां से चीन को हटना ही होगा. पेंगोंग के इलाके में दोनों देशों को साथ में हल निकालना होगा.

मौजूदा विवाद पर वीपी मलिक बोले कि अभी जहां भारत और चीन के बीच विवाद है, ये बड़ा एरिया है. यहां आप कितने भी लोग तैनात कर लें, लेकिन वहां पर बड़े-बड़े गैप होंगे. लद्दाख के पास का हिस्सा काफी मुश्किल है, किसी भी तरह की स्थिति के लिए. अगर चीन ने उस जगह ज्यादा तैनाती की है, तो हमारे में भी उतनी ही क्षमता है. हमारी फौज को हुक्म दें, तो यही कर सकते हैं.

पूर्व सेनाध्यक्ष बोले कि हमारी सेनाएं पूरी तरह सक्षम हैं, 1967 से लेकर अबतक जितनी भी दिक्कतें आई हैं भारतीय सेना ने पूरी तरह से लड़ाई को लड़ा है. 1986 में भी ऐसी ही स्थिति थी, तो हमलोगों ने उन्हें पछाड़ दिया था. कोई भी देश लड़ाई नहीं चाहता है, हर कोई मामले को बातचीत से सुलझाना चाहता है.

sabha_060620113243.jpgसुरक्षा सभा के दौरान एक्सपर्ट्स

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‘कमजोर ना समझे चीन’

पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने कहा कि अंतत: ये मसला डिप्लोमेटिक तरह से हल होगा, बॉर्डर पर भी राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है. लेकिन इस वक्त यही जरूरी है कि LAC पर किसी तरह का झगड़ा नहीं होना चाहिए. 1993 से अबतक पांच एग्रीमेंट साइन हुए हैं, लेकिन चीन ने LAC को नक्शे पर मार्क नहीं किया है. ये झगड़े खत्म होने के बाद ही बॉर्डर पर अलग बात हो सकेगी.

चीन हमेशा से ही आक्रामक रहा है, वो सोचता है कि हम कमजोर देश है. सेना और राजनीतिक मामलों में, इसलिए ऐसा वो लगातार करता आ रहा है. जबतक बॉर्डर का मसला हल नहीं होता.. तबतक कुछ नहीं हो सकता. जब देश आर्थिक-सैन्य मामले में मजबूत होगा, तो और अधिक मुकाबला कर सकते हैं.

सुरक्षा सभा की पूरी कवरेज पढ़ें..

समुद्री मोर्चे पर भी मात खाएगा चीन

चीन के साथ जारी विवाद पर पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने कहा कि आज का भारत पूरी तरह से सुरक्षित है, हमारी सेनाएं पूरी तरह से तैयार हैं. उन्होंने कहा कि दक्षिण सागर चीन पर भारत हमेशा से ही कहता आया है कि इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों से सुलझाना चाहिए. इसके अलावा हर तरफ से बातचीत होनी चाहिए, लेकिन दक्षिण चीन सागर के मुद्दे को लद्दाख के मुद्दे से जोड़ना गलत होगा.

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उन्होंने कहा कि LAC का मुद्दा जमीन और बॉर्डर को लेकर है, जबतक बॉर्डर का पता नहीं लगेगा तबतक ऐसा होता ही रहेगा. उम्मीद है कि आज की बातचीत से इस मसले का हल निकलेगा. भारत की बढ़ती शक्ति को लेकर पूर्व नौसेना प्रमुख ने कहा कि मेक इन इंडिया जैसा अभियान नेवी में 1960 में शुरू हो गया था, देश में अब अधिकतर शिप बन रही हैं. मेक इन इंडिया जैसे मिशन से इन कामों में तेजी ही आएगी.

‘वायुसेना के मामले में हमारा अनुभव बेहतर’

पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एस कृष्णा स्वामी ने इस चर्चा में कहा कि अबतक चीन के साथ हमारी एयरफोर्स एंगेज नहीं हुई है, 1962 में हम कमजोर थे लेकिन तब से अबतक हम दस गुना मजबूत हुए हैं. आज के वक्त में हमारे देश की तैयारी मजबूत है, साथ ही तीनों सेनाओं के बीच तालमेल भी शानदार है. अगर कुछ होता है, तो वायुसेना जवाब देने के लिए तैयार है.

उन्होंने कहा कि वायुसेना मजबूत है, चीन खुद यहां आ गया. हमेशा ऐसा होता है कि पहले दुश्मन आ जाते हैं, फिर हम उनका हल ढूंढ रहे होते हैं. अभी राजनीतिक हल निकालना जरूरी है, सेना को अगर टास्क मिलेगा तो वह अपना काम जरूर करेगी. वायुसेना के मामले में आज हम चीन से काफी आगे हैं, अब वायुसेना में तजुर्बा भी अधिक है.

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