लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था. वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद लोकसभा में पार्टी 29 में से सिर्फ 1 सीट पर जीत हासिल कर पाई. इसके साथ ही कांग्रेस में आंतरिक घमासान देखने को मिल रहा है. देवास लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार रहे प्रहलाद टिपानिया ने हार के बाद कांग्रेस के ही बड़े पदों पर बैठे नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं. टिपानिया ने कहा कि उनकी सीट पर उच्च जाति वाले नेताओं ने मन से काम नहीं किया. टिपानिया की टिप्पणी के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है.
टिपानिया कबीर के दोहों को मालवी भाषा मे गाने के लिए मशहूर गायक हैं. इसके लिए इन्हें साल 2011 में पद्मश्री अवॉर्ड भी मिला. वहीं हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इन्हें देवास लोकसभा सीट से टिकट देकर सबको चौंका दिया. हालांकि मंच से अपनी पेशकश से लोगों का मन मोहने वाले टिपानिया वोटरों का मन नहीं मोह पाए. हार पर मंथन की बारी आई तो टिपानिया ने अपनी ही पार्टी पर सवाल खड़े करते हुए कहा, 'उच्च वर्ग के लोगों ने रिजर्व सीट पर मन से काम नहीं किया'.
टिपानिया ने कहा 'मुझे ऐसा लगता है कि जब प्रत्याशी खड़ा होता है तो वह पार्टी का व्यक्ति होता है. मगर ऐसा जाल बिछा हुआ है कि आपका आदमी है तो ही पार्टी के लोग काम करेंगे. मुझे यह भी लगा कि मैं रिजर्व सीट से था तो वहां पर जो लोग पदाधिकारी बन कर बैठे हैं, वे अगर उच्च वर्ग के हैं तो इतनी सक्रियता से काम नहीं करेंगे. बहुत कम ऐसे लोग होंगे जो पार्टी के लिए समर्पित हैं. लेकिन ज्यादातर ऐसा नहीं है. लोग अपने पद और प्रतिष्ठा को लेकर बैठे हैं.'
दरअसल, लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में बीजेपी ने 2014 से ज्यादा बेहतर प्रर्दशन करते हुए 29 में से 28 सीटें जीत ली. बीजेपी की इस आंधी में कई दिग्गज जैसे ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह, अजय सिंह और अरुण यादव सरीखे कद्दावर चेहरे भी हार गए. टिपानिया भी बीजेपी के महेंद्र सिंह सोलंकी से करीब 3 लाख 72 हजार वोटों से हार गए. अब हार के बाद अपनी ही पार्टी पर सवाल खड़े किए तो कांग्रेस को सामने आना पड़ा. कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा 'पार्टी में हार की समीक्षा होती है. जिसमें हर कोई अपनी बात आजादी से कह सकता है और टिपानिया जी ने अगर कुछ धरातल पर महसूस किया है तो जाहिर है उसे ही सामने रखा है.'