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तभी तो दिल्‍ली में सबको डर लगता है...

ऐसा लगता है कि देश की राजधानी दिल्ली पर गुनाह का कब्जा हो गया है. ऐसा खुद दिल्ली पुलिस के आंकड़े ही कह रहे हैं.

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ऐसा लगता है कि देश की राजधानी दिल्ली पर गुनाह का कब्जा हो गया है. ऐसा खुद दिल्ली पुलिस के आंकड़े ही कह रहे हैं.

इस साल के शुरू के 3 महीने में यहां इतने गुनाह हो गए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले कई सौ फीसदी तक ज्यादा हैं. 16 दिसंबर की वारदात और उसके बाद देशभर में महिला सुरक्षा को लेकर उठी आवाज के बावजूद पिछले तीन महीने में यौन उत्पीड़न और रेप की इतनी वारदात हुई है, जो पिछले साल से 590 फीसदी तक ज्यादा है.

सामाजिक चेतना का भी असर नहीं
दिल्ली में जुर्म के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं. पिछले साल 16 दिसंबर की घटना के बाद गली-गली में जुलूस निकाले गए, महिलाओं की सुरक्षा के नाम पर कस्मे खाई गईं, असामाजिक तत्वों का डटकर मुकाबला करने के वादे किए गए. इसमें पुलिस, पब्लिक, सरकार कोई पीछे नहीं रहा, लेकिन नतीजा शून्य दिख रहा है.

दिल्‍ली हुई और ज्‍यादा असुरक्षित
क्राइम के आंकड़ों पर नजर डालें, तो साल के पहले तीन महीनों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. इनमें रेप में डेढ़ सौ फीसदी और छेड़छाड़ में 600 फीसदी बढ़ोतरी हुई है. आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा असुरक्षित जगह दिख रही है.

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हर तरह के अपराध में इजाफा
एक जनवरी से 24 मार्च के दौरान हुए बाकी अपराध पर नजर डालें, तो अपहरण के मामलों में 53 फीसदी, डकैती के मामलों में 65 फीसदी और झपटमारी के मामलों में 73 फीसदी का इज़ाफा हुआ है.

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