उसकी आशंका निराधार नहीं है. अप्रैल 15 की दोपहर तक दुनिया भर में 20 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और 1.28 लाख लोगों की मौत हो चुके हैं. लेकिन अब तक इस महामारी के अंत का कोई संकेत नहीं दिख रहा है. दुनिया भर के वैज्ञानिक इस वायरस को कंट्रोल करने के लिए एक वैक्सीन खोजने में लगे हुए हैं.
मौतों की संख्या
मेडिकल जर्नल “The Lancet ” के मुताबिक, 2009 में फैले स्वाइन फ्लू (H1N1 इन्फ्लूएंजा) महामारी के कारण पहले वर्ष में मरने वालों की संख्या 1,51,700 से लेकर 5,75,400 के बीच रही. हालांकि, अधिकांश अध्ययनों में मरने वालों की संख्या लगभग 2 लाख बताई जा रही है.
Covid-19 ने दुनिया के लगभग सभी देशों को अलग-अलग स्तर पर प्रभावित किया है. “worldometer” के मुताबिक, इस महामारी ने दुनिया भर के 210 देशों को प्रभावित किया है. स्वाइन फ्लू महामारी ने 179 देशों को प्रभावित किया था.
हालांकि, H1N1 संक्रमण ने दुनिया में बहुत बड़ी आबादी को प्रभावित किया था. 19 देशों में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने अनुमान लगाया कि महामारी के पहले साल के दौरान दुनिया की लगभग 24 प्रतिशत आबादी स्वाइन फ्लू के वायरस से संक्रमित हुई थी.
यूनाइटेड स्टेट्स के सेंटर्स फॉर डिसीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, इस महामारी से संक्रमित हुए लोगों की संख्या 43 मिलियन से 89 मिलियन के बीच हो सकती है, औसत अनुमान 61 मिलियन (6.1 करोड़) का था. Covid-19 से अप्रैल 15 की दोपहर तक 2 मिलियन (20 लाख) से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं.
आयुवर्ग और लैंगिक अनुपात
दोनों बीमारियों में एक अन्य विरोधाभास रहा है वह है प्रभावित लोगों के आयुवर्ग में. स्वाइन फ्लू ने ज्यादातर 26-50 आयुवर्ग को मारा था, जबकि Covid-19 के चलते सबसे ज्यादा मरने वालों की संख्या 60 साल से ऊपर के लोगों की है.
सीडीसी ने कहा है, “वैश्विक स्तर पर H1N1 वायरस से संबंधित 80 प्रतिशत मौतें 65 वर्ष से कम उम्र के लोगों की हुई थीं. यह बीमारी सामान्य मौसमी इन्फ्लूएंजा से बहुत भिन्न होती है. सामान्य इन्फ्लूएंजा में लगभग 70 प्रतिशत से 90 प्रतिशत लोगों की मृत्यु 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में होती है.
इसके उलट, COVID-19 के मामले में WHO ने बयान दिया है कि “COVID-19 से सबसे ज्यादा खतरा बूढ़े लोगों को है”.
इन दोनों महामारियों से प्रभावित होने वालों का लैंगिक अनुपात देखें तो उसमें भी भिन्नता है. स्वाइन फ्लू से संक्रमित लोगों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों का प्रतिशत थोड़ा ही ज्यादा था यानी 50.6 प्रतिशत, जबकि Covid-19 के मामले पुरुषों का प्रतिशत 65 है.

हालांकि, इन दोनों महामारियों में केस फैटलिटी रेट (CFR) यानी केस मृत्यदर काफी मिलती जुलती है. कोरोना वायरस में मृत्युदर 6.2 है, जबकि स्वाइन फ्लू में मृत्युदर 6 प्रतिशत थी.
H1N1 इन्फ्लूएंजा और कोरोना वायरस के लक्षण समान हैं- नाक बहना, बुखार और खांसी. कोरोना वायरस की तरह, H1N1 भी खांसी या छींकने के दौरान हवा में आई ड्रॉपलेट के जरिये फैलता है. हालांकि, कोरोना वायरस की वैक्सीन अभी खोजी जा रही है, जबकि H1N1 की वैक्सीन खोज ली गई है.
भारत में करीब 400 मौतें
15 अप्रैल की दोपहर तक, भारत में लगभग 12,000 मामले सामने आ चुके हैं और 400 मौतें हुईं हैं. इसकी तुलना 2015 के स्वाइन फ्लू के प्रकोप से करें, तो उसमें 42,592 मामले दर्ज हुए थे और 2,990 लोगों की मौत हुई थी.
लोकसभा में 13 मार्च को एक सवाल के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि 1 जनवरी, 2020 से लेकर 1 मार्च तक देश में मौसमी H1N1 के कुल 1,469 केस दर्ज हुए हैं और 30 लोगों की मौत हुई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा लोकसभा में दिए गए जवाब और नेशनल हेल्थ प्रोफाइल के आंकड़ों को एकत्र करके उनका विश्लेषण करने पर इंडिया टुडे की डाटा इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) ने पाया कि 2012 से 1 मार्च, 2020 तक भारत में H1N1 इन्फ्लूएंजा के 1,39,956 मामले दर्ज हुए और इसके चलते 9,221 मौतें हुईं.