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घर लौटने वाले हजारों मजदूरों को कैसे रोका जाए, तेलंगाना की मंत्री ने दिखाया रास्ता

तेलंगाना की मंत्री सत्यवती राठौर मजदूरों के बीच जाकर सड़क पर बैठ गईं. ये मजदूर अपने परिवार के साथ घर को जा रहे थे. मंत्री ने न सिर्फ इनको कोरोना वायरस के खतरे को लेकर समझाया, बल्कि उन्हें खाना खिलाया और हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया.

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तेलंगाना की आदिवासी, महिला और बाल कल्याण मंत्री सत्यवती राठौर
तेलंगाना की आदिवासी, महिला और बाल कल्याण मंत्री सत्यवती राठौर

  • तेलंगाना की मंत्री ने घरों को लौटने वाले मजदूरों को रोकने के लिए उठाया कदम
  • लॉकडाउन के बाद से भारत के कई हिस्सों से मजदूर कर रहे लगातार पलायन
दिल्ली से मजदूरों के बड़ी संख्या में घरों को पलायन को लेकर प्रशासन और संबंधित राज्य सरकारों को सूझ नहीं रहा कि उन्हें कैसे रोका जाए. ऐसे में तेलंगाना की एक मंत्री ने जो किया वो अपने आप में मिसाल है.

तेलंगाना की आदिवासी, महिला और बाल कल्याण मंत्री सत्यवती राठौर उन मजदूरों के बीच जाकर सड़क पर बैठ गईं, जो लॉकडाउन के बावजूद तेलंगाना से महाराष्ट्र अपने घरों की ओर जाना चाहते थे. इन मजदूरों के परिवार भी उनके साथ थे. मंत्री ने न सिर्फ उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को लेकर समझाया, बल्कि उन्हें खाना खिलाया और हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया.

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दरअसल, मंत्री राठौर ने मजदूरों को महिलाओं और बच्चों के साथ तेलंगाना-महाराष्ट्र बार्डर के पास पैदल चलते देखा. मंत्री उन्हें देखकर कार से उतरीं और उनसे बात करने के लिए सड़क पर ही बैठ गईं.

मंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को बुलाया और सभी प्रवासी लोगों का मेडिकल चेकअप कराया. साथ ही प्रशासन को उन्हें दो क्विंटल चावल और हर एक को 10 हजार रुपये देने के लिए कहा.

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राठौर ने अधिकारियों को इन लोगों को स्कूल इमारतों में ठहराने और कृषि गतिविधियों में रोजगार दिलाने के लिए कहा. महबूबाबाद जिले के रहने वाले पांच हजार से ज्यादा प्रवासी मजदूर महाराष्ट्र अपने घरों को लौटना चाह रहे थे. मंत्री राठौर ने बताया कि महबूबनगर जिले में ऐसे 105 लोग हैं, जो विदेश से आए हैं और इस वक्त सख्त क्वारंटीन में हैं.

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