लॉकडाउन की वजह से देश के उद्योग-धंधे बंद हैं और बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर बिना काम के ही दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं. प्रवासी मजदूरों के पास न कमाई का साधन बचा है और न ही खाने-पीने का कोई इंतजाम है, ऐसे में वो सभी अपने-अपने घर जाने के लिए परेशान हैं.
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उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने का काम भी कर रही है, लेकिन अब भी दिल्ली से लेकर मुंबई तक हजारों की तादाद में मजदूर फंसे हुए हैं. इस बीच काम बंद होने की वजह से कई पावरलूम श्रमिकों ने महाराष्ट्र के भिवंडी से प्रयागराज तक के सफर के लिए पैदल ही चलना शुरू कर दिया है जो भिवंडी से करीब 1400 किलोमीटर दूर है.
पैदल ही अपने शहरों की ओर लौटने को मजबूर पावरलूम श्रमिक अभी वर्तमान में मुंबई आगरा राजमार्ग पर हैं और प्रयागराज में अपने-अपने मूल स्थानों तक पहुंचने के लिए पैदल ही निकल पड़े हैं.
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दशरथलाल बिंद और रामराज्य बिंद कुछ ऐसे मजदूर हैं, जिन्होंने अपनी इस दुखद यात्रा के दौरान आजतक से बात की और बताया कि उन्हें दो से तीन दिनों में एक बार खाने को कुछ मिल जाता है, लेकिन हम यहां भूख से नहीं मरना चाहते हैं.
उन्होंने बताया कि भूख से मरने की जगह हमने पैदल ही घर के लिए निकलने का फैसला लिया और बैग पैक कर प्रयागराज की ओर निकल पड़े.
देश में 40 दिनों का लॉकडाउन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से 3 हफ्ते के लॉकडाउन का ऐलान किया था तब भी बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर और अन्य लोग अपने घर जाने के लिए पैदल ही सड़क पर उतर आए थे.
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देश में 3 हफ्ते का लॉकडाउन खत्म होने के बाद इसे फिर 19 दिन के लिए बढ़ा दिया गया था. माना जा रहा है कि 3 मई को जब देश में कुल 40 दिनों का लॉकडाउन खत्म होगा तो इसे फिर से बढ़ाया जा सकता है.
बांद्रा में 14 अप्रैल को मजदूरों की उमड़ी भीड़
कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए 25 मार्च से देश में लॉकडाउन है. लॉकडाउन का पहला फेज यानी 21 दिनों की मियाद 14 अप्रैल को पूरी हो रही थी. इसी वजह से मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर अचानक बड़ी संख्या में मजदूर पहुंचने लगे थे. देखते-देखते सैकड़ों मजूदर स्टेशन पहुंच गए. इससे हालात बेकाबू हो गए. ये सभी प्रवासी लोग अपने गृहराज्य जाने के लिए यहां पहुंचे थे. हालांकि, पुलिस ने किसी तरह हालात पर काबू पाया.
बाद में जांच के दौरान यह बात सामने आई कि प्रवासी मजदूरों को गुमराह किया गया था. मजदूरों को बताया गया कि स्टेशन पर ट्रेन की व्यवस्था है जिससे वो घर जा सकेंगे. इस तरह की अफवाह फैलाने का आरोप विनय दुबे नाम के शख्स पर लगा.
आरोपी विनय दुबे खुद को मजदूरों का नेता बताता है. जांच आगे बढ़ी तो विनय दुबे को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. लेकिन आज मंगलवार को बांद्रा की एक अदालत ने विनय को जमानत दे दी.