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चीनी जनता को खूब भा रहा है भारतीय समोसा

देश के लगभग हर हिस्से में लोकप्रिय समोसा अब विदेशों में भी अपने स्वाद से लोगों को लुभाने लगा है. सस्ती लागत और सस्ते श्रम के चलते बेशक चीनी उत्पाद पूरी दुनिया में आगे बढ रहे हों लेकिन जब बात भारतीय समोसों, दाल और कड़ी के स्वाद की आती है तो चीन के लोग भी अपने को रोक नहीं पातें.

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देश के लगभग हर हिस्से में लोकप्रिय समोसा अब विदेशों में भी अपने स्वाद से लोगों को लुभाने लगा है. सस्ती लागत और सस्ते श्रम के चलते बेशक चीनी उत्पाद पूरी दुनिया में आगे बढ रहे हों लेकिन जब बात भारतीय समोसों, दाल और कड़ी के स्वाद की आती है तो चीन के लोग भी अपने को रोक नहीं पातें.

चीन के शांगहाए शहर में चल रहे मेले ‘वर्ल्ड एक्सपो’ में भारतीय मंडप में दो रेस्त्रां खुले हैं जिनमें कई तरह का भारतीय खाना और जलपान की व्यवस्था है. लेकिन समोसा, दाल और कड़ी की बात ही कुछ और है, चीनी जनता को यह खूब भा रहे हैं. अब तक करीब 10 लाख लोग भारतीय मंडप को देखने आ चुके हैं, इनमें से ज्यादातर ने दाल, कडी और समोसा पसंद किया है.

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‘वर्ल्ड एक्सपो’ को मेलों और प्रदर्शनियों का ओलंपिक माना जाता है. इसका आयोजन हर पांच साल में अलग अलग शहरों में किया जाता है. इस बार यह मेला शांगहाए में हो रहा है. इसका आयोजन छह महीने के लिये होता है. मेला अक्तूबर तक चलेगा.

मेले में भारत की भागीदारी की पूरी व्यवस्था भारत व्यापार संवर्धन संगठन :इटपो: ने की है. दुनियाभर के 194 देश मेले में भाग ले रहे हैं, इनमें शीर्ष दस देशों में भारत का स्थान है. इस तरह का अगला मेला इटली के शहर मिलान में होगा.

इटपो के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सुभाष पाणी ने यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि समोसा और दाल चीनियों को खूब भा रहे हैं. शंघाई की होंगपू नदी के किनारे करीब 5.28 वर्ग किलोमीटर में फैले मेला क्षेत्र का मुख्य विषय ‘अच्छा शहर बेहतर जीवन’ रखा गया है. एक मई को मेला शुरु होने के बाद से ही इसे देखने चीन के विभिन्न हिस्सों से लाखों लोग पहुंच चुके हैं. भारतीय मंडप में भारतीय व्यंजनों के अलावा रोजाना सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है. पाणी ने बताया कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा अगस्त में भारतीय स्वतंत्रता दिवस के दिन मेला देखने आयेंगे.

उन्होंने कहा कि वर्ल्ड एक्सपो दूसरे मेलों की तुलना में अलग तरह का है, यह न केवल व्यापार एवं व्यावसाय के लिये होता है बल्कि इसमें विभिन्न देश तकनीकी आर्थिक विकास के साथ साथ अपनी कला एवं संस्कृति का भी प्रदर्शन करते हैं. चीन पिछले आठ साल से इस मेले के आयोजन की तैयारी कर रहा था और उसने प्रदर्शनी तक पहुंचने के लिये 500 किलोमीटर का मेट्रो नेटवर्क बिछाया है.

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