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'1962 से भी कम रक्षा बजट, सिर्फ बड़ी बातें', विशेषज्ञ ने उठाए मोदी सरकार पर सवाल

सीमा पर जवानों की मौत से दुखी रक्षा विशेषज्ञ सुशांत सरीन ने कड़े लफ्जों में सरकार की आलोचना की. सिर्फ मौजूदा सरकार ही नहीं बल्कि पुरानी सरकारों को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया. सुशांत सरीन ने केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार की कथनी और करनी में भी अंतर बताया.

पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो-PTI) पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो-PTI)

  • भारत-चीन विवाद पर रक्षा विशेषज्ञ की टिप्पणी
  • केंद्र सरकार की तैयारियों की आलोचना की
  • कहा- सरकार का रक्षा पर फोकस ही नहीं है

भारत-चीन सीमा विवाद हद से ज्यादा बढ़ गया है. बातचीत फेल हो गई है. लद्दाख की गलवान घाटी में सेना के जवान आमने-सामने से भिड़ गए हैं. भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए हैं. चीन के भी 40 जवानों के हताहत होने की खबर है. इन तमाम घटनाक्रमों के बीच सरकार मंथन कर रही है. मैराथन बैठकें चल रही हैं. लेकिन ये हालात कैसे हो गए, क्या हालात सुधर पाएंगे और अगर हां तो कैसे या कब तक, इन तमाम सवालों पर आजतक के खास कार्यक्रम में रक्षा विशेषज्ञ सुशांत सरीन ने अपनी राय रखी.

सीमा पर जवानों की मौत से दुखी सुशांत सरीन ने कड़े लफ्जों में सरकार की आलोचना की. सिर्फ मौजूदा सरकार ही नहीं बल्कि पुरानी सरकारों को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया. सुशांत सरीन ने केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार की कथनी और करनी में भी अंतर बताया.

रक्षा विशेषज्ञ सुशांत सरीन ने कहा, 'चीन की हरकतें पिछले चंद हफ्तों या महीनों की नहीं है, ये हम चंद सालों से देख हैं. मुझे तो अचंभा ये है कि इस तरह का हादसा होने में इतना समय लग गया, क्योंकि पिछले 5-7-10 साल में ये कभी भी हो सकता था. झड़पें तो होती ही आई हैं.'

'कौन सी दुनिया में है सरकार'

सुशांत सरीन ने मौजूद सरकार की आलोचना करते हुए कहा, 'जब से मोदी सरकार आई है, तब से चीन से बात करके एलएसी कहां से जाती है, इस पर समझौता होने की कोशिश की जा रही है. चीन ने उससे भी नजर हटा ली है. ये हादसा तो होने वाला था. मेरी बला से चीनी सैनिक 10 हजार भी मर जाएं. मेरी चिंता ये है कि हमारे सैनिक मरे हैं. भारत सारकार पता नहीं कौन सी सोच में बैठी हुई थी, मुंगेरी लाल के सपने लेकर चल रही थी कि चीन के साथ हम दोस्ती कर सकते हैं.'

'चीनी कंपनियों को दिए जा रहे ठेके'

इतना ही नहीं सुशांत सरीन ने चीनी कंपनियों को भारत में काम देने पर भी सवाल उठाए. सुशांत सरीन ने कहा, 'एक ऐसे समय में जब चीन आपको चुनौती दे रहा है, हम धड़ल्ले से हजारों करोड़ के ठेके चीनी कंपनियों को दे रहे हैं. चीनी कंपनियों को यहां बुला रहे हैं. उनके साथ जो ट्रेड का मामला है, जिसमें चीन हमारे पदार्थों को रोकता है और अपने पदार्थों को यहां फ्लड करता है, उस पर हम बातचीत ही करते जा रहे है सालों से. हमने उसमें आज तक कुछ अचीव ही नहीं किया है. हम लोग पता नहीं कौन सी दुनिया में हैं.'

'1962 से भी कम रक्षा बजट'

सुशांत सरीने भारत के रक्षा बजट पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'पिछले तीन साल से मैं बोलता आ रहा हूं और भी बहुत लोग बोल रहे हैं कि हमारा रक्षा बजट कम है. खासकर, इस साल तो 1962 के रक्षा बजट से भी कम है. उसके बावजूद हम लोग बातें इतनी बड़ी-बड़ी करते हैं. जनरल शंकर रॉय चौधरी ने एक बार कहा था कि देखिए अगर आप फौज को बनाकर रखेंगे, तगड़ा रखगें, उसको साजो-सामान से लैस रखेंगे, अच्छी ट्रेनिंग रखेंगे तो ये आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी है. आज हमें इस इंश्योरेंस पॉलिसी की जरूरत है.'

'सिर्फ छाती फूंकते हैं, रक्षा पर सरकार का फोकस नहीं'

सुशांत सरीन ने मोदी कैबिनेट में रक्षा मंत्री की कुर्सी को लेकर भी सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा, 'पहले पांच साल में आपके पास कोई रक्षा मंत्री ही नहीं था. पहले अरुण जेटली रक्षा मंत्रालय भी संभाल रहे थे और वित्त भी संभाल रहे थे. फिर वो कभी रक्षा छोड़ देते थे, कभी रक्षा ले लेते थे, फिर पर्रिकर साहब आए. फिर आपको लगा कि गोवा का मुख्यमंत्री बनना ज्यादा जरूरी है, बनिस्बत देश की रक्षा को संभालना तो आपने उनको गोवा भेज दिया. जैसे ही उन्होंने कुछ काम करना शुरू किया था, उन्हें गोवा भेज दिया. अब आप देखिए आपके क्या हालात हैं. आपने जितना रक्षा को इग्नोर किया, इसके बावजूद आप इतनी छाती फूंकते हैं कि हम रक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेंगे. लेकिन आपका फोकस ही नहीं है इस चीज पर है.'

'पिछली सरकार ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी'

केंद्र की मौजूदा मोदी सरकार पर रक्षा के नाम पर सिर्फ बातें करने का आरोप लगाते हुए सुशांत सरीन ने पिछली कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को भी निशाने पर लिया. उन्होंने कहा, 'सिर्फ इस सरकार का नहीं है. इससे पहले जो संत एंटनी थे, जिनको सेठ एंथनी (पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी) बोला जाता है, एक चीज भी उन्होंने नहीं आने दी. कोई नया साजो-सामान नहीं आया. 10 सालों में उन्होंने जितना डैमेज किया, कृष्णा मेनन के बाद वो दूसरे बाद आदमी थे, जिन्होंने भारत की सेना को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.'

अब आगे क्या?

भारत अब क्या करे, इस पर सुशांत सरीन ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि मेरे ख्याल से पुराने समझौते जो थे वो सब कल (गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद) मर चुके हैं. अगर हम उन्हीं के ऊपर बरकरार रहे तो हादसे तो होते रहेंगे.

इसके साथ ही सुशांत सरीन ने सेना को दुश्मन फौज की भाषा में ही बात करने के लिए कहा. उन्होंने कहा, 'अगर हम ये कह सकते हैं कि हमारी सेना के लोग बड़े संयम से बात करते थे, चीनी सेना के उतावले होते थे, बदतमीजी से पेश आते थे. तो हमें ये समझना पड़ेगा चाहे चीन हो या पाकिस्तान, इस खित्ते में अगर किसी से संयम से बात करेंगे जब वो फुदक रहा हो तो वो समझेगा कि आप कमजोर हैं. इसलिए अनिवार्य ही उससे उसी भाषा में बात करें जिसमें वो कर रहा है. लेकिन ये लेसन हमारे यहां आया नहीं. हमारे अधिकारी बड़े ठंडे दिमाग से, सोच-समझकर, अच्छा मैं पीछे हट जाता हूं आप अपने अधिकारी को संभालिए. उससे वो और फुकदते थे. इसलिए ये तो होना ही था और हो रहा है.'

सुशांत सरीन के साथ बहस में शामिल ले. जनरल (रि.) शंकर प्रसाद ने कहा कि वो सुशांत जी की सभी बातों सहमत हैं. आमने-सामने की बातचीत में भारतीय सैनिकों की सौम्यता पर शंकर प्रसाद ने बताया कि हमारी सभ्यता ऐसी है कि हम सॉफ्टली बात करते हैं. हालांकि, रिजल्ट स्टॉन्ग होते हैं. साथ ही शंकर प्रसाद ने ये भी कहा कि अब हालात बदल चुके हैं. सिक्किम में एर लेफ्टिनेंट ने घूंसा मारकर एक चाइनीज मेजर को गिरा दिया था. अब समय बदल गया है. जब से काउंटर इंसर्जेंसी में ट्रेनिंग हुई है, तब से सेना के हाथ खुल गए हैं.

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