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सरकार ने 15 इनकम टैक्स अधिकारियों को किया जबरन रिटायर

भ्रष्ट अधिकारियों पर चाबुक चलाने का अपना वादा जारी रखते हुए, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार, सीबीआई मामलों और अन्य आरोपों के कारण अब 15 वरिष्ठ आयकर अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है.

पीएम मोदी (फाइल फोटो) पीएम मोदी (फाइल फोटो)

  • मोदी सरकार ने टैक्स डिपार्टमेंट के 15 बड़े अधिकारियों को किया रिटायर
  • इन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और कई अन्य मामले दर्ज थे

भ्रष्ट अधिकारियों पर चाबुक चलाने का अपना वादा जारी रखते हुए, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार, सीबीआई मामलों और अन्य आरोपों के कारण अब 15 वरिष्ठ आयकर अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टेक्सेस (CBDT) ने सीआईटी, जेसीआईटी, एडिश्नल सीआईटी, एसीआईटी के पद पर कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों को मौलिक नियम 56 (जे) के तहत जबरन रिटायर कर दिया है. रिटायर होने वाले अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और सीबीआई के मामले समेत कई केस थे.

भ्रष्ट अधिकारियों पर यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वादे के अनुरूप की गई है, जिसमें पीएम ने लाल किले से कहा था कि सरकार ने टैक्स डिपार्टमेंट के ऐसे अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त करने का फैसला किया है जो अपने पद का गलत तरीके से फायदा उठाते हैं और टैक्स चुकाने वाले लोगों को प्रताड़ित करते हैं.

उन्होंने अपने इंटरव्यू में भी कहा था, 'टैक्स डिपार्टमेंट में कुछ अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करते हैं और करदाताओं को परेशान करते हैं. हमने हाल ही में ऐसे कर अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण संख्या को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त करने का साहसिक कदम उठाया है और हम इस प्रकार के व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करेंगे.'

इससे पहले सीबीडीटी के 12 अधिकारियों सहित 49 उच्च पदों पर कार्यरत कर अधिकारियों को अनिवार्य रूप से मौलिक नियम 56 (जे) के तहत इस वर्ष की शुरुआत में सेवानिवृत्त किया गया था.

इनमें से अधिकांश अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले थे, जिन्होंने करोड़ों की रकम की हेराफेरी की थी. इस लिस्ट में देश भर के अधिकारी शामिल थे. एक अधिकारी को 15,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, कई के पास आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात से ज्यादा संपत्ति थी.

यह अधिकारियों की ऐसी चौथी सूची थी. जून में भी सरकार ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर सीबीआईसी के 15 आयुक्त स्तर के अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया था. इन पर रिश्वत, तस्करी और यहां तक ​​कि आपराधिक साजिश रचने का आरोप था. इससे पहले 12 आईआरएस अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त होने के लिए कहा गया था और इस साल अगस्त में 22 सीबीआईसी ऑफोवर्स के एक सेट को सेवानिवृत्त होने के लिए कहा गया था.

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