यूनियन कारबाइड के कीटनाशक दवा निर्माण कारखाने से दो-तीन दिसंबर 1984 की रात रिसी जहरीली गैस मिथाइल आइसो सायनेट गैस हादसे को बुधवार को 24 साल बीतने के बावजूद शहर के लोग जहां उसका दुष्प्रभाव भोगने को मजबूर हैं, वहीं सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वास तथा चिकित्सकीय मदद एवं पर्यावर्णीय सुधार की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार को अब भी बहुत कुछ करना बाकी है.
सरकारी सूत्रों के अनुसार दो तीन दिसंबर 1984 की रात जहरीली मिक गैस से तीन हजार से अधिक लोग मारे गए और लाखों लोग प्रभावित हुए. गैस पीडि़तों के बीच काम करने वाले स्वयंसेवी संगठनों का दावा है कि इन चौबीस सालों में 35 हजार से अधिक पीडि़त समुचित इलाज के अभाव में मर चुके हैं और तीन लाख से अधिक विभिन्न प्रकार की जटिल बीमारियों से पीडि़त हैं.
भोपाल गैस पीडि़त महिला उद्योग संगठन संयोजक अब्दुल जब्बार दुखी मन से कहते हैं कि दिल्ली के उपहार सिनेमा और अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकी हमले के बाद प्रभावितों को जो मुआवजा दिया गया, वह गैस पीडि़तों की तुलना में सौ गुना अधिक था.