पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में सार्वजनिक, सर्वदलीय प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. प्रार्थना सभा में पीएम मोदी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद तक मौजूद रहे. अटल जी के साथ 65 वर्षाें तक मित्रता निभाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी इस मौके पर बेहद भावुक हो गए.
प्रार्थना सभा में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि जीवन में अनेक सभाएं संबोधित की है, लेकिन आज जैसी सभा कभी संबोधित करूंगा, ये कल्पना कभी मेरे मन में नहीं थी. मैंने एक किताब लिखी थी, उसमें अटल जी के न आने पर मुझे बेहद दुख हुआ था. मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मेरी अटल जी से मित्रता 65 साल से थी. अटल जी भोजन बहुत अच्छा पकाते थे, वे चाहे खिचड़ी ही सही. मैंने अटल जी से बहुत कुछ पाया है. अटल जी की गैरमौजूदगी में बोलने पर मुझे बहुत दुख हो रहा.
अटल जी के साथ के अपने अनुभवों के बारे में बताते हुए आडवाणी ने कहा कि हम साथ में सिनेमा देखते थे. हमने बहुत कुछ अटल जी से सीखा और पाया. इसीलिए दुख होता है कि वो हमें छोड़कर, हमसे अलग हो गए. अटल जी ने जो कुछ हमें सिखाया, जो कुछ दिया, उसे हम ग्रहण करें.
इससे पहले प्रार्थन सभा में पीएम मोदी ने कहा कि 11 मई को परमाणु परीक्षण अटल जी की दृढ़ता की वजह से हुआ. उसके बाद दुनिया ने भारत पर प्रतिबंध लगा दिया. लेकिन ये अटल थे जो 11 मई को परीक्षण के बाद 13 मई को एक बार फिर दुनिया को चुनौती देते हुए भारत की ताकत का अहसास कराया. जीवन कितना लंबा हो यह हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन जीवन कैसा हो, ये हमारे हाथ में है और अटल जी ने जी करके दिखाया कि जीवन कैसा हो, क्यों हो, किसके लिए हो और कैसे हो. अटल जी नाम से ही अटल नहीं थे उनके व्यवहार में भी अटल भाव नजर आता है.
प्रार्थना सभा में आडवाणी के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा अटल जी को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा आज फलदायी है, उसे सींचकर बड़ा करने वाले महान हैं. भागवत ने कहा कि मुझे अटल जी का सानिध्य ज्यादा नहीं मिला. तरुण अवस्था में मैं भी उनका भाषण सुनने के लिए जाया करता था. अटल जी की सबके साथ मित्रता थी. सार्वजनिक जीवन पर इतनी ऊंचाई पर पहुंचने के बाद भी वे सामान्य जन के प्रति बेहद संवेदनशील थे. अटल जी ने विपरीत हालातों में काम किया. अटल जी के शब्द और उनका जीवन, दोनों में एकरूपता थी. कठिन से कठिन परिस्थिति से गुजरते हुए भी उनके अंदर का कवि जिंदा रहता था. जीवन का तन कर सामना करने वाले वो वीर पुरुष थे. राजनीति में आने के बाद भी कैसे एक स्वयंसेवक की संवेदनाओं को बनाए रखने का अटल जी ने आदर्श पेश किया.
प्रार्थना सभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम बनने के बाद अटल जी सबको साथ लेकर चले. अटल जी को जानने वाल हर व्यक्ति उनसे प्रभावित है. प्रार्थना सभा में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पीएम बनने के बाद अटल जी सबको साथ लेकर चले. अटल जी को जानने वाल हर व्यक्ति उनसे प्रभावित है. अटल जी के निधन से सभी को पीड़ा हुई है. उनका व्यक्तित्व बहुत महान था.
अटल जी को याद करते हुए राजनाथ ने कहा कि पंडित नेहरू ने 35 साल के अटल में भावी प्रधानमंत्री देख लिया था. राजनाथ ने कहा कि मैं यह मानता हूं कि अटल जी को लोकप्रियता देश का प्रधानमंत्री बनने के कारण हासिल नहीं हुई. वह किसी भी राजनीतिक या सामाजिक क्षेत्र में यदि काम करते तो वह वैसे ही लोकप्रिय होते जैसे प्रधानमंत्री बनने के बाद लोकप्रिय हैं.
प्रार्थना सभा में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रतिनिधि के रूप में राज्य सभा में नेता विपक्ष कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद पहुंचे थे. प्रार्थना सभा में उन्होंने कहा कि बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो अपनी मौत के बाद भी दूरियों को कम करते हैं. अटल जी जाते-जाते सबको एक कर गए. अटल जी की जुबान बेहद मीठी थी. वे सदन में चाहें जितनी कड़वी बात कहते, वो मीठी ही लगती थी. लेकिन आज मीठी बात कहने पर भी कड़वी ही लगती है.
इस कार्यक्रम में मोदी सरकार के तमाम कैबिनेट मंत्रियों अलावा विपक्षी दलों के नेता और विभिन्न क्षेत्रों की गणमान्य हस्तियां मौजूद हैं. प्रार्थना सभा में योगगुरु बाबा रामदेव और आध्यात्म की दुनिया से जुड़े लोग भी शामिल हुए.
लंबी बीमारी के बाद अटल बिहारी वाजपेयी का बीते 16 अगस्त को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने 7 दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है. पर कई राज्यों में भी राजकीय शोक का ऐलान किया गया था. सोमवार को उनकी याद में आयोजित प्रार्थना सभा में विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता और आम जनता भी शामिल हुई.
वाजपेयी की अस्थियों को बीते दिन ही हरिद्वार में उनके परिजनों ने गंगा नदी में प्रवाहित किया है. दिवंगत नेता की अस्थियों का कलश लेकर उनकी पुत्री नमिता, दामाद रंजन भट्टाचार्य और नातिन निहारिका हर की पैड़ी पर स्थित ब्रहमकुंड पहुंचे जहां उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उनकी अस्थियों को किया गया. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करने से पहले अस्थि कलश यात्रा भी निकाली थी.