जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने इंडिया टुडे को इंटरव्यू दिया. उन्होंने कहा कि कश्मीर में हालात बहुत अच्छे हैं और वहां एक भी गोली नहीं चली. इंडिया टुडे और आजतक के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल के साथ बातचीत में उन्होंने कई मुद्दों पर राय रखी. जब उनसे पूछा गया कि अगर कश्मीर में सब कुछ ठीक है तो पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को लॉक अप में क्यों रखा गया? इस पर गृह मंत्री ने कहा, जब कोई घटना ताजी होती है तो उकसावे का काम सही नहीं. 370 हटाए जाने के बाद 4 हजार लोगों को एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया गया. उसमें से आज 1 हजार से कम जेल में हैं. इनमें से 800 पत्थरबाज हैं.
फारूक अब्दुल्ला पर उन्होंने कहा कि उन पर किसी तरह की रोक नहीं है. न तो चीफ सेक्रेटरी, थानेदार और न ही किसी और की ओर से. उन्हें नजरबंद नहीं किया गया था. जब पूछा गया कि उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती पर भी रोक है तो अमित शाह ने माना कि वह फिलहाल पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत हाउस अरेस्ट में हैं.
हर देश का अपना एक व्यू होता है। दुनिया के सिर्फ तीन देशों ने 370 हटाने पर चुनिंदा सवाल उठाए हैं।
बाकी पूरी दुनिया 370 हटाने में भारत के पक्ष में रही है और माना है कि ये भारत का आंतरिक मामला है। ये भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता है: श्री अमित शाह #ShahOnIndiaToday pic.twitter.com/Ldo5jqX0Sg
— BJP (@BJP4India) October 14, 2019
आजतक से अमित शाह की खास बातचीत
370 के कारण कश्मीर में भ्रष्टाचार हुआ, 40 हजार लोग मारे गए: अमित शाह
अमित शाह ने कहा, कांग्रेस जो ढाई महीने में हो-हल्ला कर रही है, उसने शेख अब्दुल्ला को 11 साल कैद में रखा. कश्मीर पर विकास के आगे के रोड मैप पर अमित शाह ने कहा, 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में विकास नहीं हो पाया था, भ्रष्टाचार काफी हुआ. इसकी जिम्मेदारी किसी की भी तय नहीं थी. 370 हटने के बाद अब वहां नीचे तक विकास पहुंचेगा.
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अमित शाह से जब पूछा गया कि 370 हटाई गई तो कहा गया कि पत्थरबाजी होगी, जबरदस्त विरोध होगा और आतंकी हमला भी लेकिन मुश्किलें आईँ लेकिन ज्यादा विरोध नहीं देखा गया. इस पर उन्होंने कहा, संसद में कहा गया था कि दंगे नहीं रक्तपात होगा. 370 से जम्मू-कश्मीर की जनता का कोई लेना-देना नहीं था. कुछ नेताओं का ही स्वार्थ इससे जुड़ा था. उन्होंने कहा कि 370 हटाने को लेकर दुनिया भारत के पक्ष में रही और माना कि यह भारत का आंतरिक मसला है. उन्होंने इसे नरेंद्र मोदी सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया.