सेना अध्यक्ष बिपिन रावत के बांग्लादेशी नागरिकों की असम में घुसपैठ और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) पर दिए गए बयान को लेकर सियासी हलचल का दौर जारी है. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष बद्दरूद्दीन अजमल ने गुरुवार को कहा कि सेना को सेना रहना चाहिए, राजनीति पर बयान नहीं देना चाहिए. राजनीतिक मामलों में सेना को दखल नहीं देना चाहिए.
गुवाहाटी में प्रेस कांफ्रेंस कर अजमल ने कहा कि इस मामले में सेना को दखल देने का हक नहीं है. इससे हमारी पार्टी की बदनामी हो रही है. उन्होंने कहा कि इस बार भी 37 लोगों को टिकट दिया था. पूरे हिंदुस्तान में बुलेट की लाइन छोड़कर बैलेट लेने की बात की जाती है. मेरी पार्टी 12 साल से चल रही है, उस पर सवाल उठाना गलत है.
सेना प्रमुख के बयान को लेकर अदालत जाने के सवाल पर अजमल ने कहा, हम कोर्ट में नहीं जाएंगे. हम उनसे सीधे जाकर मिलेंगे. सेना प्रमुख रावत साहब से जाकर मिलेंगे. उन्होंने कहा कि आर्मी का पूरे हिंदुस्तान की सुरक्षा पर बोलने का हक है. पर ये उनके अधिकार में नहीं पड़ता है. जो बयान आरएसएस के लोग देते हैं, सेना प्रमुख का बयान वैसा ही है. हम लोग इसे हजम नहीं कर पा रहे हैं.
अजमल ने कहा कि 'अगर मुस्लिम जमात होती तो आज मुस्लिम 34 प्रतिशत है, सारा वोट हमें मिलता. उन्होंने नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये हुकूमत जब से आई है, हर सरकार ऐसा करती है. हमारा सेक्युलर मुल्क है, पर पुराने लोगों को लाने से लगता है कि डेमोक्रेसी खतरे में है. सेना प्रमुख आरएसएस के प्रवक्ता की तरह बयान दे रहे हैं.
इस बीच AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी सेना प्रमुख के बयान पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा ने बुनियादी बात है कि भारतीय सेना और इसके प्रमुख अराजनैतिक होते हैं. मेरा मोदी सरकार से सवाल है कि क्या वह सेना के बयान से सहमत है? यदि सरकार इस मसले पर चुप्पी साधे रखती है तो माना जाएगा कि सेना प्रमुख के वक्तव्य से सरकार सहमति रखती है. ओवैसी ने कहा कि यदि बांग्लादेश के अवैध घुसपैठी भारत में दाखिल हो रहे हैं तो सवाल उठता है कि मोदी सरकार क्या कर रही है, सीमा पर निगरानी रखने वाले BSF से सवाल कौन करेगा, अंतरराष्ट्रीय मामलों से निपटने की जिम्मेदारी आईबी की होती है, पुलिस सेना नहीं है. सेना के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप करने के दुष्परिणाम हम परोड़ी देशों में देख चुके हैं.
बता दें कि सेना प्रमुख ने कहा था कि जितनी तेजी से देश में बीजेपी का विस्तार नहीं हुआ, उतनी तेजी से असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ बढ़ी है. जो चिंता की बात है. बता दें कि अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट असम की सियासत में मुख्य विरोधी दल के तौर पर उभर आई है. 2014 के लोकसभा चुनाव में उसने तीन सीटें जीतीं और 24 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त कायम की, जबकि 2009 में उसके पास केवल एक सीट थी.