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कारगिल युद्ध के नायकों को भावभीनी श्रद्धांजलि

कारगिल युद्ध में 10 वर्ष पहले पाकिस्तानी सेना को धूल चटाने वाले भारतीय सेना के शहीदों को उनके परिजनों ने शनिवार को नम आंखों से भावभीनी श्रद्धाजंलि दी. स्‍पेशल: कारगिल युद्ध के 10 साल

कारगिल युद्ध में 10 वर्ष पहले पाकिस्तानी सेना को धूल चटाने वाले भारतीय सेना के शहीद जवानों को उनके परिजनों ने शनिवार को कारगिल स्थित स्मारक स्थल पर नम आंखों से भावभीनी श्रद्धाजंलि दी. कारगिल युद्ध के समय सेना को नेतृत्व प्रदान करने वाले पूर्व सेना प्रमुख वी पी मलिक ने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन मनोज पांडे के नाम पर द्रास में बने एक युद्ध स्मारक को देश को समर्पित करते हुए कहा, ‘‘वीर सैनिकों, शहीदों के परिजनों और पुरस्कृत लोगों के चेहरों को देखकर मैं सोचता हूं कि आखिर ये नायक किस चीज के बने होते हैं. वे राष्ट्रभक्ति का उदाहरण हैं.’’

कैप्टन नीकेझाकू केंगुरीज की शहादत को सलाम 
कैप्टन नीकेझाकू केंगुरीज की शहादत के 10 साल बाद उनका परिवार नगालैण्ड से उस स्थान को सलाम करने के लिए पहुंचा जहां इस योद्धा ने मातृभूमि की खातिर अपने जीवन का बलिदान किया था. नीकेझाकू ने करगिल युद्ध के दौरान तोलोलिंग को पाकिस्तानियों से मुक्त कराने के लिए भेजी गई टुकड़ी का नेतृत्व किया था. दिवंगत कैप्टन के पिता नीसेली केंगुरीज ने कहा ‘‘हम अपने बेटे के शहादत स्थल को देखने और उसे सलाम करने आए हैं. इस पवित्र स्थल को देखना और यहां आकर अपने बेटे के लिए प्रार्थना करना हमारे लिए एक सपना था.’’ उन्होंने जैसे ही अपने बेटे और उसकी प्लाटून द्वारा मुक्त कराई गई तोलोलिंग रिजलाइन को निहारा नीसेली, उनकी पत्नी दिनुओ तथा बेटी की आंखों से अश्रुधारा बह निकली. कैप्टन नीकेझाकू और उनकी टुकड़ी ने पांच दिन तक चली भीषण लड़ाई में पाकिस्तानी सैनिकों को परास्त कर तोलोलिंग रिजलाइन पर तिरंगा झंडा फहरा दिया था लेकिन 18 जून 1999 को हुई मोर्टार गोलाबारी में उनकी जान चली गई. नगालैण्ड की राजधानी कोहिमा के निवासी कैप्टन नीकेझाकू को महावीर चक्र से सम्मानित किया गया. कैप्टन के माता पिता ने कहा ‘‘हमारे बेटे ने त्याग और समर्पण की भावना के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्‍य को पूरा किया. हम यहां उसे तथा वीरगति को प्राप्त अन्य योद्धाओं को श्रद्धांजलि देने के लिए आए हैं जिन्होंने कठिनतम युद्ध में दुश्मन को धूल चटाई.’’

‘वह मेरा हीरो है और देश का हीरो भी'
नीकेझाकू की तरह ही कैप्टन मनोज पांडे ने भी पाकिस्तानियों को खदेड़ते समय और खालूबर रिजलाइन को मुक्त कराते समय शहादत पाई थी. करगिल सेक्टर में खालूबर रिजलाइन अत्यंत प्रभावशाली ठिकानों में से एक थी जिस पर पाकिस्तानियों ने कब्जा जमा लिया था. मनोज पांडे तीन जुलाई 1999 को शहीद हुए थे. लखनउ से स्मारक स्थल को देखने आए मनोज के भाई मनमोहन पांडे ने कहा ‘‘वह मेरा हीरो है और देश का हीरो भी. उसने दुश्मन की गोलाबारी की परवाह न करते हुए खालूबर रिजलाइन को मुक्त कराया और पाकिस्तानी सैनिकों को खदेड़ दिया. उसे मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला.’’ मनमोहन ने कहा ‘‘मैं यहां उस स्थान पर प्रार्थना करने आया हूं जहां मेरे भाई ने अपना फर्ज निभाते हुए प्राणों का उत्सर्ग किया था.’’ उन्होंने कहा ‘‘मेरे माता पिता स्मारक स्थल को कई बार देख चुके हैं और इस स्थान को देखना मेरा सपना था.’’

13 जेएके राइफल्स को मिले दो परमवीर चक्र
द्रास सेक्टर में लड़ाई के मोर्चे पर दिखाई गई बहादुरी के लिए अपने कनिष्ठ कैप्टन विक्रम बत्रा की तारीफ करते हुए 13 जम्मू एंड कश्मीर (जेएके) राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल गुरप्रीत सिंह ने कहा कि उनकी यूनिट ने बहुत से पुरस्कार जीते हैं. उन्होंने कहा ‘‘हमारी 13 जेएके राइफल्स ने सर्वाधिक बहादुरों में बहादुर होने का तमगा हासिल किया क्योंकि उसे करगिल लड़ाई में दो परमवीर चक्र मिले.’’ कर्नल सिंह करगिल युद्ध के दौरान मेजर थे ओर वह द्रास में लड़ाई के मोर्चे को सीधे देख रहे थे. कैप्टन बत्रा और लांस नायक संजय कुमार को लड़ाई में अद्भुत शौर्य प्रदर्शन के लिए परमवीर चक्र मिला. इन दोनों सेनानियों का संबंध 13 जेएके राइफल्स से है. करगिल लड़ाई में 533 जवान और सेनाधिकारी शहीद हुए जिनमें से 86 को परमवीर चक्र महावीर चक्र तथा वीर चक्र मिले. कैप्टन बत्रा, कैप्टन पांडे, ग्रेनेडियर के लांस नायक जोगिंदर सिंह यादव और 13 जेएके के संजय कुमार को परमवीर चक्र मिला जिनमें से बत्रा और पांडे को यह सम्मान मरणोपरांत मिला. शनिवार से शुरू हुए ‘ऑपरेशन विजय’ समारोह में 10 साल पहले पाकिस्तानी सेना पर भारतीय फौज की जीत का जश्‍न होगा. समारोह के दौरान पाकिस्तानियों से छुड़ाई गई सभी पर्वत चोटियां प्रकाश से जगमग रहेंगी.

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