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ममता के फैसले पर टिकी सबकी निगाहें

सरकार ने डीजल, गैस और एफडीआई पर रोल बैक ना करने का एलान कर ममता बनर्जी के अल्टीमेटम का टका सा जवाब दे दिया है. अब सबकी निगाहें ममता पर टिकी हैं कि मंगलवार को वो क्या करेंगी?

सरकार ने डीजल, गैस और एफडीआई पर रोल बैक ना करने का एलान कर ममता बनर्जी के अल्टीमेटम का टका सा जवाब दे दिया है. अब सबकी निगाहें ममता पर टिकी हैं कि मंगलवार को वो क्या करेंगी? सरकार से समर्थन खींचेंगी या फिर महंगाई के विरोध का कोई और रास्ता अख्तियार करेंगी?

मंगलवार शाम कोलकाता में तृणमूल संसदीय दल की बैठक में ममता इसका फैसला करने वाली हैं. मनमोहन सरकार में शामिल तृणमूल कांग्रेस के मंत्री अपनी ही सरकार के खिलाफ खुलकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर रहे हैं. लेकिन, बड़ा सवाल ये कि इस लड़ाई का अंजाम क्या होगा? क्या सरकार से समर्थन वापस लेंगी ममता बनर्जी? क्या सरकार से इस्तीफा देंगे तृणमूल कांग्रेस के मंत्री?

72 घंटे के अल्टीमेटम की मियाद खत्म होने के बाद भी ममता के अगले कदम को लेकर अटकलें जारी हैं. कोलकाता में टीएमसी संसदीय दल की बैठक में ममता अपने पत्ते खोलेंगी लेकिन इससे पहले ही तृणमूल सांसद सुल्तान अहमद ने आजतक से खास बातचीत में तीन विकल्प खोल कर रख दिए. कोलकाता में ममता के साथी सरकार को संभावित नतीजे की गिनती गिना रहे थे, उधर दिल्ली में सरकार उन धमकियों को अंगूठा दिखा रही थी.

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, 'मांग करना अलग बात है. विपक्षी दल जो इन फैसलों का विरोध करते हैं वो इन्हें वापस लेने की मांग करेंगे. लेकिन क्या सरकार की तरफ से किसी ने रोलबैक की बात कही है. जहां तक मेरी जानकारी है कि हम इन फैसलों को वापस लेने नहीं जा रहे हैं.'

ममता बनर्जी को इस तरह टका-सा जवाब देने का हौंसला सरकार को यूं ही नहीं मिला है. सूत्रों से खबर ये आ रही है कि ममता सरकार से समर्थन वापस नहीं खींच सकती क्योंकि तृणमूल के कुछ मंत्री ऐसा नहीं चाहते. इसके अलावा, पिछले अनुभवों से सरकार ममता की धमकियों की गंभीरता आंक चुकी है.

अभी राष्ट्रपति चुनाव में ही ममता ने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, लेकिन आखिर में उन्हें प्रणब के समर्थन में आना पड़ा था. ख़बर ये भी आ रही है कि ममता को मनाने के लिए ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनसे बातचीत कर सकते हैं. बस अब इंतजार कुछ घंटों का ही बचा है जब पता चलेगा ममता की धमकी सिर्फ गरजने भर की थी या फिर बरसने के लिए.

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