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महंगाई का दबाव बढ़ा, कर्ज भी हो सकता है महंगा

फल, दूध, पेट्रोल और विनिर्मित उत्पादों की बढ़ती कीमतों के चलते मई, 2011 में सकल वस्तुओं के थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 9.06 प्रतिशत पर पहुंच गई.

फल, दूध, पेट्रोल और विनिर्मित उत्पादों की बढ़ती कीमतों के चलते मई, 2011 में सकल वस्तुओं के थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 9.06 प्रतिशत पर पहुंच गई. इससे रिजर्व बैंक को इस सप्ताह अपनी मध्य तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख दरों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है. अप्रैल, 2011 में सकल मुद्रास्फीति 8.66 प्रतिशत थी, जबकि मई, 2010 में यह 10.48 प्रतिशत थी.

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने मुद्रास्फीति में तेजी के रुख पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि सरकार कीमतों पर लगाम लगाने के लिए उचित कदम उठाएगी. मई में मुद्रास्फीति बढ़कर 9.06 प्रतिशत पहुंचने को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन सी. रंगराजन ने ‘परेशानी में डालने वाला’ बताया और रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति सख्त करने पर जोर दिया.

मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए रिजर्व बैंक मार्च, 2010 से अब तक नौ बार ब्याज दरें बढ़ा चुका है और बृहस्पतिवार को होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में और बढ़ोतरी किए जाने का अनुमान है.

सी. रंगराजन ने संवाददाताओं को बताया, ‘मुझे लगता है कि मुद्रास्फीति के आंकड़े एक तरह से परेशानी में डालने वाले हैं. हमें और कड़ाई से मुद्रास्फीति से निपटने की जरूरत है. हमें इस पर लगाम लगाने के लिए और अधिक मौद्रिक एवं राजकोषीय उपाय करने की जरूरत है.’

इस बीच, सरकार द्वारा जारी संशोधित आंकड़ों में इस साल मार्च, 11 की सकल मुद्रास्फीति 9.68 जबकि प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर यह 9.04 प्रतिशत बताई गयी थी. नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, विनिर्मित उत्पादों की कीमतें पिछले साल की तुलना में 7.27 प्रतिशत बढ़ीं. सकल वस्तुओं के थोक मूल्य सूचकांक में विनिर्मित उत्पादों का भारांश करीब 65 प्रतिशत है.

इस साल फरवरी से ही विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति लगातार बढ़ रही है. वित्त मंत्रालय के आर्थिक विभाग के सचिव आर गोपालन ने महंगाई के ताजा आंकड़ों पर अपनी टिप्पणी करते हुए कहा, ‘हमें इस स्थिति को ले कर चिंता है. ऊंची मुद्रास्फीति के कारण बड़ी समस्याएं खड़ी हो रही हैं.’

थोक मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के मुकाबले मई में चावल, फल, पेट्रोल, खाद्य तेल, कपास के वस्त्र और लौह एवं इस्पात उत्पादों समेत कई आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मई में कपास करीब 30 प्रतिशत, लोहा 14.54 प्रतिशत और पालिएस्टर कपड़े 11 प्रतिशत महंगे चल रहे हैं.

ईंधन और बिजली वर्ग का सूचकांक पिछले साल की तुलना में 12.32 प्रतिशत ऊंचा है. मई में सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा पेट्रोल के दाम में पांच रुपए लीटर की वृद्धि से पेट्रोल के दाम एक साल पहले की तुलना में 27.31 प्रतिशत ऊंचे हो गए हैं.

मई के मध्य में पेट्रोल की कीमतों में की गई 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का असर मई के मुद्रास्फीति के आंकड़ों में देखने को मिल रहा है. समीक्षाधीन माह में प्राथमिक वस्तुओं की कीमत वाषिर्क आधार पर 11.30 प्रतिशत बढ़ी. प्राथमिक वस्तुओं के भीतर खाद्य वस्तुओं की कीमतें 8.37 प्रतिशत बढ़ीं, जबकि गैर खाद्य वस्तुएं 22.35 प्रतिशत महंगी हुईं.

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