प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कल नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे. बैठक में पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ, उडीसा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और बिहार के मुख्यमंत्री शामिल होंगे. इसमें हाल के माओवादी हमलों से उत्पन्न स्थिति का जायजा लिया जाएगा और भाकपा माओवादी से निपटने की नयी रणनीति पर विचार किया जाएगा.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि नक्सल विरोधी अभियान में लगे अर्धसैनिक बलों की पुन: तैनाती और योजना आयोग द्वारा सुझायी गयी विकास योजनाओं के बारे में बैठक में चर्चा किये जाने की संभावना है. झारखंड में राष्ट्रपति शासन है, इसलिए वहां के राज्यपाल बैठक में शामिल होंगे.
गृह मंत्री पी चिदंबरम मुख्यमंत्रियों को केन्द्र की योजना के बारे में बताएंगे और उसके बारे में उनसे सुझाव मांगेंगे. नक्सल समस्या को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बता चुके मनमोहन मुख्यमंत्रियों से बातचीत कर इस समस्या पर उनका नजरिया जानेंगे.
यह बैठक हाल ही में नक्सल हिंसा की घटनाओं में बढोतरी के बीच हो रही है. नक्सलियों ने अप्रैल से अब तक छत्तीसगढ में कम से कम 100 सुरक्षा जवानों की हत्या कर दी है. उन्होंने पश्चिम बंगाल में रेल पटरी बम से उडा दी थी, जिससे एक एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना हो गयी. इसमें लगभग डेढ सौ लोग मारे गये थे.
सरकार अपनी नक्सल रोधी नीति के तहत समन्वित पुलिस कार्रवाई और विकास कायो’ में तेजी की दोस्तरीय नीति पर काम कर रही है.
चिदंबरम ने कहा है कि दोनों ही मोचो’ पर प्रारंभिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है हालांकि केन्द्र इस काम में उनकी मदद करेगा. आंकडों के मुताबिक नक्सल प्रभावित राज्यों में लगभग 40 हजार वर्ग किलोमीटर इलाका नक्सलियों के कब्जे में है. पिछले पांच साल में नक्सल हिंसा में 10 हजार आम लोग और सुरक्षाकर्मी मारे गये.
2005 से मई 2010 के बीच नक्सल हमले में 10, 268 लोग मारे गये, जिनमें से 2372 मौतें अकेले 2009 में हुइ’ जबकि 2008 में 1769 और 2007 में 1737 लोग मारे गये.