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इस साल नहीं बचे बुर्का, पायजामा और दाढ़ी...

शरीर को ढकने के लिए पोशाक का चयन करना हर इनसान का निहायत निजी निर्णय है, लेकिन इस वर्ष विभिन्न कारणों से कहीं बुर्के पर प्रतिबंध लगाया गया, कहीं मिनी स्कर्ट पर तो कहीं पायजामे पर. यही नहीं जापान में तो दाढ़ी पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया.

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शरीर को ढकने के लिए पोशाक का चयन करना हर इनसान का निहायत निजी निर्णय है, लेकिन इस वर्ष विभिन्न कारणों से कहीं बुर्के पर प्रतिबंध लगाया गया, कहीं मिनी स्कर्ट पर तो कहीं पायजामे पर. यही नहीं जापान में तो दाढ़ी पर ही प्रतिबंध लगा दिया गया.

वर्ष 2010 में दुनिया भर में आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए फ्रांस, सीरिया, स्वीडन आदि देशों ने अपने यहां बुर्के पर प्रतिबंध लगा दिया. जुलाई में ब्रिटेन के साउथेम्पटन शहर में मिनी स्कर्ट पहनने पर रोक लगा दी गई. लेकिन यह रोक सिर्फ उन महिलाओं पर लागू होगी जो ऑफिस में मिनी स्कर्ट पहन कर आएंगी.

ऑफिस में मिनी स्कर्ट पहन कर नहीं आने का यह फरमान साउथेम्पटन सिटी काउंसिल की ओर से जारी किया गया है. साउथेम्पटन सिटी काउंसिल ने अपनी महिला कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मिनी स्कर्ट पहन कर काम पर नहीं आएं.

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ब्रिटिश मीडिया में आयी खबरों के मुताबिक, काउंसिल ने अपने 400 कर्मचारियों को भेजे गए मेमो में कहा है कि वे ‘उचित’ कपड़े पहन कर काम पर आएं. मेमो में कर्मचारियों से कहा गया है कि वे ट्राउजर, इनफॉर्मल कपड़े और उचित लंबाई के स्कर्ट तो पहन कर आ सकती हैं लेकिन ‘मिनी स्कर्ट’ में कतई नहीं.{mospagebreak}

जनवरी माह में ब्रिटेन की एक अग्रणी सुपरमार्केट श्रृंखला टेस्को ने पायजामे पहनकर अपने यहां खरीदारी के लिए चले आने वाले ग्राहकों पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि दूसरों को इससे असुविधा हो सकती है. दक्षिण वेल्स के कार्डिफ स्थित सेंट मेलंस स्टोर, ब्रिटेन का ऐसा पहला सुपरमार्केट बन गया जहां ‘ड्रेस-कोड’ लागू किया गया है, क्योंकि खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग बिना जूते-चप्पल के रात में पहनने वाले

कपड़े पहनकर चले आते थे. टेलीग्राफ के मुताबिक, सुपरमार्केट का कहना है कि कई ग्राहकों की शिकायतें थीं कि इससे उन्हें असुविधा और शर्मिंदगी महसूस होती है. इसके बाद नये नियम लागू किए गए.

जापान में इस साल एक विषय पर जम कर चर्चा हुई. यह विषय था ‘दफ्तरों में काम करने वाले पुरूष दाढ़ी रखें या नहीं.’ मई में जापान के गनमा प्रीफैक्चर की इसेसाकी नगरपालिका ने अपने पुरूष कर्मचारियों के दाढ़ी रखने पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि लोक सेवकों को शालीन नजर आना चाहिए. दाढ़ी पर प्रतिबंध का सर्वाधिक असर ‘सेवन एलेवन जापान कंपनी’ पर हुआ जिसने ऐलान कर दिया कि वह अपने यहां ऐसे किसी भी पुरूष को नौकरी नहीं देगी जो दाढ़ी रखता हो.

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‘टोक्यो डिज्नी रिसॉर्ट’ का संचालन करने वाली ‘ओरियंटल लैंड कंपनी’ ने भी अपने यहां दाढ़ी रखने पर प्रतिबंध लगा दिया. बहरहाल, इस कंपनी ने अपने पार्क में कैप्टन हुक की भूमिका निभाने वाले व्यक्ति को इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखा. जापान पोस्ट सर्विस कंपनी ने अपने यहां दाढ़ी रखने वाले एक कर्मचारी का वेतन काट लिया. कर्मचारी ने कंपनी को अदालत में घसीटा और अदालत ने कंपनी को आदेश दिया कि वह कर्मचारी को मुआवजा दे.{mospagebreak}

पाकिस्तान में 24 जून को लाहौर उच्च न्यायालय ने नौ प्रमुख वेबसाइटों: गूगल, याहू, हॉटमेल, एमएसएन, यू ट्यूब, बिंग और अमेजॅन पर ईशनिंदा युक्त सामग्री के प्रकाशन के आरोप में इन पर प्रतिबंध लगा दिया. अदालत ने पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण को इन नौ वेबसाइटों को यथाशीघ्र प्रतिबंधित करने के आदेश दिए.

पाकिस्तान में मई के दौरान भी फेसबुक पर ईशनिंदा युक्त सामग्री के प्रकाशन के आरोप में प्रतिबंध लगाया गया था. बाद में यह प्रतिबंध हटा लिया गया था. करीब एक सप्ताह बाद बांग्लादेश ने भी फेसबुक के उस पन्ने को लेकर वेबसाइट पर प्रतिबंध लगा दिया जिसमें उपयोगकर्ताओं से पैगम्बर मोहम्मद के चित्र बनाने के लिए कहा गया था.

अक्तूबर माह में एक अजीबोगरीब कदम उठाते हुए ब्रिटेन के हिलक्रेस्ट ग्रामर एंड प्रिपरेटरी स्कूल ने फाउंटेन पेन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी. हिलक्रेस्ट ग्रामर एंड प्रिपरेटरी स्कूल के प्रिंसिपल जैक विलियम्स ने कहा कि भविष्य में यह सुनिश्चित करने के लिए फाउंटेन पेन पर पाबंदी रहेगी कि किसी भी छात्र के साथ उनके कंप्यूटर से स्कैन किए गए पेपर पर अंक देने में गलतियां न हों.

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बहरहाल, विलियम्स ने कहा कि फाउंटेन पेन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाना उनके सभी सिद्धांतों के खिलाफ है. ‘डेली एक्सप्रेस’ के मुताबिक, 350 छात्रों की संख्या वाले इस स्कूल के प्रिंसिपल ने कहा कि पिछले साल गणित की परीक्षा में स्कैनर कुछ दशमलव बिंदुओं को नहीं पकड़ पाए थे जिससे छात्रों को गलत अंक दे दिए गए.{mospagebreak}

अजीबोगरीब प्रतिबंध से भारत भी नहीं बच पाया. भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित शासकीय सरोजनी नायडू (नूतन) कालेज ने इस साल दिसंबर में अपनी शिक्षिकाओं के जींस पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया और उनसे कहा गया है कि वे केवल साड़ी पहन कर ही कालेज आयें. कालेज प्रबंधन के एक प्रवक्ता ने बताया कि यह फैसला कालेज में भारतीय संस्कृति पर अमल लाने के तहत किया गया है.

उन्होंने कहा कि अब तक शिक्षिकाऐं सलवार सूट, कुर्ता या जींस पहन कर भी आया करती थी लेकिन अब उनके लिए साड़ी पहन कर आना अनिवार्य कर दिया गया है. प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा करने से शिक्षिकाओं और छात्राओं में आसानी से फर्क किया जा सकेगा, जबकि पहले ऐसा करने में कई बार मुश्किल आती थी.

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