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नोएडा एक्‍सटेंशन: फैसले से किसको क्‍या मिला

हट गयी नोएडा एक्सटेंशन के वजूद पर लटकती तलवार. बच गए हजारों निवेशकों के फ्लैट. पर इस राहत की कीमत चुकानी पड़ेगी निवेशकों को यानी महंगे हो जाएंगे अब नोएडा एक्सटेंशन के सस्ते फ्लैट. जानिए कि इस फैसले से किसको क्‍या मिला:

हट गयी नोएडा एक्सटेंशन के वजूद पर लटकती तलवार. बच गए हजारों निवेशकों के फ्लैट. पर इस राहत की कीमत चुकानी पड़ेगी निवेशकों को यानी महंगे हो जाएंगे अब नोएडा एक्सटेंशन के सस्ते फ्लैट. जानिए कि इस फैसले से किसको क्‍या मिला:

किसान
1. नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन के 59 गांवों के किसानों को 64.7 फीसदी ज्यादा मुआवजा.
2. फैसले के मुताबिक डेवलपमेंट अथॉर्टी 10 फीसदी विकसित जमीन किसानों को देनी होगी.

अथॉरिटी व सरकार
1. अदालत के फैसले से अगर किसान और निवेशकों को राहत मिली है तो यूपी सरकार के लिए मुश्किलें भी हैं. अदालत ने आदेश दिया है कि सरकार का बड़ी अधिकारी जांच करके बताए कि नियम कानून को ताक पर रख कर आपाधापी में जरूरत से ज्यादा अधिग्रहण क्यों किया गया.
2. इस फैसले की वजह से केवल ग्रेनो यानी ग्रेटर नोएडा डेवलपमेंट अथॉर्टी पर ही तीन से चार हजार करोड़ रुपए का भार पड़ेगा और ये भार अथॉर्टी बिल्डर से वसूलेगी और बिल्डर इसे 3. अपने खरीददारों से. इस तरह से महंगा हो गया है नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन में घर का सपना.

बिल्‍डर व निवेशक
1. महंगे नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन की ये गाज पुराने खऱीददारों पर गिरेगी या फिर नए निवेशकों पर ये साफ नहीं पर महंगा जरूर होगा नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन.

2. डूबने से बचा निवेशकों का पैसा, निवेशकों को मिलेंगें उनके घर और आबाद होगा नोएडा एक्सटेंशन.
3. इस आबाद होने की खुशी की बड़ी कीमत चुकानी होगी नोएडा और नोएडा एक्सटेंशन में घर बनाने वालों को. इस महंगाई के पीछे अदालत का वो फैसला है जिसमें अदालत ने कहा है कि-
जिन गांवों में घर का सपना महंगा होगा उसमें- नोएडा के 21 और ग्रेटर नोएडा के 38 गांव हैं. इन 59 गांवों में 9 हजार एकड़ जमीन है. जिसमें 50 से ज्यादा हाउसिंग प्रोजेक्ट हैं, जिनमें 1 लाख निवेशकों का पैसा लगा है.
4. इन प्रोजेक्ट्स में बैंकों के 10 हजार करोड़ दांव पर लगे हैं जबकि बिल्डरों के 4 हजार करोड़. ऐसे में नोएडा औऱ ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का अतरिक्त मुआवजा लागत बढ़ाएगा ही.
5. अदालत ने अपने फैसले में असदुल्लाह, चक शाहबेरी और देवला गांव का अधिग्रहण रद्द कर दिया है. लिहाजा इनमें से शाहबेरी गांव की जमीन पर पांच प्रोजेक्ट के 6000 मकान न पूरे हो पाने की आशंका है.

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