बंबई उच्च न्यायालय ने कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को तुच्छ आधार पर तथा बिना सोचे समझे गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाते कहा कि उसकी कार्रवाई से असीम की बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है.
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अमजद सैयद की पीठ ने कहा कि आप (पुलिस) कैसे तुच्छ आधार पर लोगों को गिरफ्तार कर सकते हैं. आपने एक कार्टूनिस्ट को गिरफ्तार किया और उसके बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन किया.
पीठ अधिवक्ता संस्कार मराठे की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया था कि असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी गैरकानूनी और न्यायोचित नहीं थी.
कानपुर के कार्टूनिस्ट त्रिवेदी को राजद्रोह के आरोप में पिछले शनिवार को गिरफ्तार किया गया था और जनाक्रोश के बीच उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के बाद उन्हें दो दिन पूर्व रिहा कर दिया गया.
त्रिवेदी की गिरफ्तारी को प्रथम दृष्टया मनमाने तरीके से की गई कार्रवाई बताते हुए अदालत ने कहा कि हमारे पास असीम त्रिवेदी है जो अपनी आवाज बुलंद करने का साहस रखता है और इसके खिलाफ खड़ा होता है लेकिन उन कई लोगों की क्या स्थिति है जिनकी आवाज पुलिस बंद कर देती है.
न्यायाधीशों ने कहा कि पुलिस अदालत को बताना होगा कि इस युवा कार्टूनिस्ट के खिलाफ राजद्रोह का आरोप कैसे लगाया गया. न्यायाधीशों ने कहा कि अब वे राजद्रोह कानून लागू करने के लिए कुछ मानदंड निर्धारित करने पर विचार कर हैं.
न्यायाधीशों ने कहा कि अगर इसके लिए कोई मानक नहीं होंगे तो इससे व्यक्ति को एक समाज में मिली स्वतंत्रा के अधिकार का अतिक्रमण होगा. न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि राजद्रोह कानून आजादी के पहले का प्रावधान है. उन्होंने जानना चाहा कि अब सरकार का क्या रूख है? क्या उसका इरादा आरोप हटाने का है? इसके लिए किसी को तो राजनीतिक जवाबदेही लेनी होगी. राजद्रोह के आरोप में उसे गिरफ्तार करने से पहले पुलिस ने विचार क्यों नहीं किया.
पीठ ने पुलिस को 12 अगस्त तक हलफनामा दाखिल कर यह बताने का आदेश दिया कि किस आधार पर त्रिवेदी के खिलाफ राजद्रोह का आरोप लगाया गया. पीठ ने कहा कि आज आपने एक कार्टूनिस्ट पर हमला किया, कल आप एक फिल्म निर्माता पर हमला करेंगे और फिर लेखक पर. हम एक स्वतंत्र समाज में रहते हैं और हर व्यक्ति को बोलने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है.
अतिरिक्त लोक अभियोजक जयेश याज्ञनिक ने अदालत को बताया कि मामले की जांच कर रहे पुलिस के संबंधित सहायक आयुक्त यह पता लगाने के लिए विधि विभाग के साथ बैठक कर रहे हैं कि क्या कार्टूनिस्ट के खिलाफ राजद्रोह का आरोप लगाया जा सकता है. अदालत ने त्रिवेदी को जनहित याचिका में प्रतिवादी भी बनाया.
त्रिवेदी की ओर से अधिवक्ता मिहिर देसाई ने कहा कि वह सुनवाई की अगली तारीख पर यह मामला खारिज करने के अनुरोध के साथ एक हलफनामा दाखिल करेंगे. पुलिस ने त्रिवेदी को वेबसाइट पर कथित राजद्रोह संबंधी सामग्री पोस्ट करने और राष्ट्रीय प्रतीक तथा संसद का अपमान करने के आरोप में आठ सितंबर को गिरफ्तार किया था.
असीम त्रिवेदी को सोमवार को 24 सितंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया. इसके बाद पुलिस ने कहा कि उसे त्रिवेदी को लंबे समय तक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है लेकिन त्रिवेदी ने जमानत मांगने से इंकार कर दिया. बहरहाल, उच्च न्यायालय ने उसे दो दिन बाद उसे जमानत दे दी. त्रिवेदी की गिरफ्तारी को लेकर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे सहित राजनीतिज्ञों और कार्यकर्ताओं ने शहर की पुलिस की आलोचना की थी.