भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि कालेधन के मामले में सरकार की नीयत पर उन्हें संदेह है और उन्हें नहीं लगता कि स्विट्जरलैंड की सरकार के साथ समझौते के तहत वह कालेधन के बारे में सूचना उजागर करेगी.
आडवाणी ने कहा कि यह समझौता अगले वर्ष से प्रभावी होगा. ऐसे में जिन लोगों का धन स्विस बैंकों में जमा है उन्हें उस धन को निकालने या स्थानांतरित करने का मौका मिल जाएगा. आडवाणी ने कहा, ‘सरकार की नीयत पर संदेह है. उसने कालेधन से निपटने में हद दर्जे की निष्क्रियता दिखाई है.’
उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड के साथ जो समझौता किया गया है उसके तहत भारत विशिष्ट मामलों में उस देश से सूचना हासिल कर सकता है, लेकिन वह समझौता अप्रैल 2012 से प्रभावी होगा. उन्होंने सवाल किया, ‘स्विस बैंकों में पैसा रखने वालों को हमने ऐसा मौका क्यों दिया. उन्हें यह मौका (अपने धन के अन्य खातों में स्थानांतरित करने का) क्यों दिया जा रहा है?
आडवाणी ने कहा, ‘ऐसे में इस समझौते का औचित्य ही समाप्त हो जाता है. क्या इससे कोई मकसद हल होगा अथवा संप्रग सरकार ने वहां के बैंकों में धन रखने वालों को संकेत दिया है कि वह अपना धन दूसरे खातों में डाल दें या अपने स्विस बैंक खाते से धन निकाल लें.’ पूर्व उप प्रधानमंत्री ने कहा कि अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे अन्य देश काला धन वापस लाने के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं, लेकिन संप्रग सरकार की रहनुमाई में भारत इस मामले में एकदम निष्क्रिय है.