आलू तथा दालों के सस्ता होने के कारण खाद्य मुद्रास्फीति जनवरी के अंत में घटकर सात सप्ताह के निचले स्रत 13.07 प्रतिशत पर आ गई हालांकि आम आदमी को सब्जियों के ऊंचे भाव से राहत नहीं मिली है.
खाद्य मुद्रास्फीति 22 जनवरी को समाप्त सप्ताह में लगभग चार प्रतिशत घटी जो 22 जनवरी को समाप्त सप्ताह में 17.05 प्रतिशत एवं एक साल पहले 22.08 प्रतिशत थी. इसमें तीन सप्ताह से तेजी जारी थी.
मुद्रास्फीति में इससे पहले इस स्तर की गिरावट 11 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में देखने को मिली थी जब यह 12.13 प्रतिशत रही. विशेषज्ञ मानते हैं कि गेहूं तथा दालों के रिकार्ड उत्पादन के अनुमानों को देखते हुए मुद्रास्फीति दर में आने वाले दिनों में और गिरावट आएगी. सरकारी अनुमानों का कहना है कि 2010-11 में कुल खाद्यान्न उत्पादन 23.207 करोड़ टन रहेगा जो पिछले फसल 21.82 करोड़ टन था. इस दौरान गेहूं उत्पादन रिकार्ड 8.147 करोड़ टन रहेगा.
अर्थशास्त्री डी के जोशी ने कहा, 'आने वाले हफ्तों में खाद्य, विशेषकर अनाज की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है. गेहूं तथा दाल के रिकार्ड उत्पादन के अनुमानों का सकारात्मक असर पड़ेगा.' इर्का की अर्थशास्त्री आदिती नायर ने कहा, 'ऊंची प्राथमिक मुद्रास्फीति के हिसाब से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2011 में लगभग 8.5 प्रतिशत रहेगी.' {mospagebreak}
खाद्य मुद्रास्फीति में नरमी से भारतीय रिजर्व बैंक पर दबाव भी काम होगा जो फिलहाल ब्याज महंगा करने की नीति पर चल रहा है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार सालाना आधार पर जनवरी में 29 तारीख को समाप्त सप्ताह में दालों की कीमत 8.63 प्रतिशत, आलू की कीमत 8.87 प्रतिशत तथा गेहूं की कीमत 3.58 प्रतिशत घटी.
प्याज की कीमतों में भी नरमी आ रही है हालांकि तुलनात्मक रूप से इसके दाम अब भी ऊंचे हैं. अगर आलोच्य सप्ताह के सब्जियों की कुल मिलाकर बात की जाए तो आलोच्य सप्ताह में सालाना आधार पर इसके दाम 44.34 प्रतिशत अधिक रहे. इस दौरान फल तथा सब्जी के दाम क्रमश: 10.46 प्रतिशत व 11.66 प्रतिशत बढ़े. इसी तरह अंडा, मीट तथा मछली 17.06 प्रतिशत महंगी हो गई.