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यूपी: भूमि अधिग्रहण पर हिसंक संघर्ष, 4 की मौत

उत्तर प्रदेश के गेट्रर नोएडा में भूमि अधिग्रहण मामले में शनिवार को पुलिस और किसानों के बीच हुए हिंसक संघर्ष की रविवार को कुछ और जिलों तक पहुंच गई.

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उत्तर प्रदेश के गेट्रर नोएडा में भूमि अधिग्रहण मामले में शनिवार को पुलिस और किसानों के बीच हुए हिंसक संघर्ष की रविवार को कुछ और जिलों तक पहुंच गई. आगरा में किसानों और पुलिस में कई स्थानों पर संघर्ष हुआ जबकि अलीगढ और मथुरा में भी कुछ सुगबुगाहट देखी गयी. उधर ग्रेटर नोयडा में शनिवार को हुए संघर्ष में मरने वालों की संख्या बढ कर चार हो गयी है.

इस बीच प्रशासन ने ग्रेटर नोएडा में किसानों को भडकाने के आरोपी एक किसान नेता पर 50 हजार रूपये के पुरस्कार की घोषणा की है.

प्रदेश के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) बृजलाल ने बताया कि आगरा के एत्मादपुर क्षेत्र के चौगान गांव में कुछ लोगों ने आगजनी शुरू कर दी, जिससे टकराव की स्थिति पैदा हुई. अब वहां स्थिति नियंत्रण में है.

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आगरा के डीआईजी असीम गौरव ने कहा कि लोगों को तितर बितर करने के लिए पुलिस की ओर से बल प्रयोग करने के दौरान ग्रामीणों की ओर से कथित गोलीबारी की गई. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की ओर से गोलीबारी की गई लेकिन पुलिस ने संयम से काम लिया.

प्रदेश के पुलिस महानिदेशक करमवीर सिंह ने बताया कि कुछ युवकों ने मथुरा और अलीगढ़ में प्रदर्शन की कोशिश की लेकिन समय रहते पुलिस के हस्तक्षेप के चलते स्थिति पर काबू पा लिया गया. सिंह ने अलीगढ़ के टप्पल में हिंसा की ताजा घटना होने से इनकार करते हुए कहा कि वहां स्थिति बिल्कुल सामान्य है.

बृजलाल ने कहा कि भट्टा पारसौल गांव में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में हैं और वहां पर प्रशासनिक अमला मुस्तैद है. उन्होंने बताया कि इस मामले में कुछ और लोगों को गिरफ्तार किया गया है. उन्होंने बताया कि भट्टा पारसौल में उग्र ग्रामीणों को उकसाने वाले मनवीर सिंह तेवतिया का अभी कोई सुराग नहीं मिला है. उस पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है.

बृजलाल ने बताया कि संघर्ष में घायल हुए एक अन्य व्यक्ति की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. इस वारदात में अब तक दो पुलिसकर्मियों समेत चार लोगों की मौत हो चुकी है.

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उन्होंने बताया कि बाद में भट्टा पारसौल गांव स्थित एक खेत में एक व्यक्ति का शव बरामद किया गया था जिसकी तत्काल शिनाख्त नहीं हो सकी है. साथ ही यह भी पता नहीं लग सका है कि उसकी मौत किन हालात में हुई.

करमवीर सिंह ने कहा कि गौतमबुद्धनगर जिले के भट्टा पारसौल और अच्छेपुर गांव में पुलिस का तलाशी अभियान जारी है और शनिवार को ग्रेटर नोएडा में हुए संघर्ष के मामले में कुछ और लोगों को हिरासत में लिया गया है.

गौरतलब है कि ग्रेटर नोएडा के भट्टा पारसौल गांव में शनिवार को कथित रूप से जमीन का उचित मूल्य दिलाने की मांग कर रहे किसानों तथा बंधक बनाए गए तीन रोडवेज कर्मियों को मुक्त कराने गए पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों के दल के बीच हुए संघर्ष में दो कांस्टेबलों समेत तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत कई लोग घायल हो गए.

बृजलाल ने बताया कि शुक्रवार को सड़क निर्माण के लिये सर्वे करने पहुंचने के बाद बंधक बनाए गए राज्य सड़क परिवहन निगम के तीन कर्मचारियों दुर्गेश भारद्वाज, निरंजन सिंह तथा दीपेन्द्र को मुक्त कराने के लिये गए पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों के दल पर किसानों ने गोलीबारी और पथराव किया था. इस घटना में कांस्टेबल मनवीर सिंह और मनोहर सिंह की मृत्यु हो गई जबकि एसएसपी समेत सात पुलिसकर्मी जख्मी हो गए. साथ ही जिलाधिकारी दीपक अग्रवाल के पैर में गोली लगी जिससे वह घायल हो गए.

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आंदोलन कर रहे किसानों पर पुलिस के बल प्रयोग की निंदा करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता अरूण जेटली ने कहा कि हम उत्तर प्रदेश पुलिस और सरकार के व्यवहार की निंदा करते हैं. किसानों के सवाल का जवाब गोली चला कर नहीं दिया जा सकता.

जद यू अध्यक्ष शरद यादव ने उत्तरप्रदेश की मायावती सरकार पर भू माफिया से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक संसद में नया कानून नहीं बन जाता है तब तक भूमि अधिग्रहण पर रोक लगनी चाहिए.

उन्होंने नोएडा में जारी हिंसा की सीबीआई जांच कराने की मांग की. उन्होंने इस मामले में बिल्डरों के शामिल होने से इंकार नहीं किया.

रालोद प्रमुख अजीत सिंह को घटनास्थल पर जाने की अनुमति नहीं दी गई और पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. उन्होंने कहा कि यह दुखद और खेदजनक घटना है. इस घटना में मारे गए लोगों के प्रति हमारी सहानुभूति है.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि इस घटना की उच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीश या सीबीआई से जांच करायी जाए. हम इस घटना में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 10-10 लाख रूपये अनुग्रह राशि दिये जाने की मांग करते हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी इस विषय पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग से सम्पर्क कर रही है.

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