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मुल्लापेरियार: तमिलनाडु, केरल के अधिकारियों को बुलावा

मुल्लापेरियार बांध पर जारी संकट को समाप्त करने के लिए केंद्र ने विचार विमर्श के लिए तमिलनाडु और केरल के वरिष्ठ अधिकारियों को निमंत्रण भेजा है. उधर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषाधिकार प्राप्त समिति ने दो सदस्यीय एक दल को मौका मुआयना के लिए परियोजना स्थल पर भेजने का फैसला किया.

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मुल्लापेरियार बांध
मुल्लापेरियार बांध

मुल्लापेरियार बांध पर जारी संकट को समाप्त करने के लिए केंद्र ने विचार विमर्श के लिए तमिलनाडु और केरल के वरिष्ठ अधिकारियों को निमंत्रण भेजा है. उधर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषाधिकार प्राप्त समिति ने दो सदस्यीय एक दल को मौका मुआयना के लिए परियोजना स्थल पर भेजने का फैसला किया.

सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने दोनों राज्यों के जल संसाधन विभागों के सचिवों को पत्र भेजकर उन्हें यहां 15 या 16 दिसंबर को इस मुद्दे पर बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है. इस मुद्दे पर छह साल में दोनों पक्षों के बीच यह पहली आधिकारिक बैठक होगी.

सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय में आयुक्त (परियोजना) प्रदीप कुमार ने राज्यों के सचिवों को बैठक के लिए पत्र लिखा जिसकी अध्यक्षता जल संसाधन सचिव डी वी सिंह करेंगे.

सूत्रों ने बताया, ‘सचिवों को बैठक के लिए 15 या 16 दिसंबर से एक दिन चुनने के लिए कहा गया है. इससे दोनों राज्यों के मंत्रियों या मुख्यमंत्रियों के बीच भविष्य की मुलाकातों का आधार तय हो सकता है.’ केंद्र की ओर से यह फैसला उस वक्त किया गया है जब भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश ए. एस. आनंद की अध्यक्षता में उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेषाधिकार प्राप्त पैनल ने दो सदस्यीय एक तकनीकी दल को केरल के इडुक्की जिले में मुल्लापेरियार बांध स्थल पर भेजने का फैसला किया है ताकि दोनों राज्यों के दावों का मौके पर जाकर आकलन किया जा सके.

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समिति में शामिल किये गये एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि समिति के दो सदस्य इस महीने के आखिर में मुल्लापेरियार बांध का दौरा करेंगे. उसके बाद दो और तीन जनवरी को समिति की बैठक होगी जिसमें परिणामों पर चर्चा होगी. दोनों पक्षों की सहमति के मुताबिक दौरे की तारीख इस सप्ताह बाद में तय की जाएगी.

समिति इस विवादास्पद मुद्दे पर फरवरी में अपनी रिपोर्ट जमा कर सकती है.

केंद्र का फैसला ऐसे वक्त में भी किया गया है जब दोनों राज्यों के अनेक राजनीतिक दल इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलकर उनके हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं.

समिति की सोमवार को हुई बैठक में केरल की ओर से एक ज्ञापन सौंपा गया जिसमें कहा गया है कि इडुक्की जिले में अक्सर आने वाले भूकंप के झटकों से 116 साल पुराने बांध को नुकसान हो रहा है और रिपोर्ट को अंतिम रूप दिए जाने से पूर्व राज्य का पक्ष सुना जाए.

केरल सरकार का कहना है कि पुराने बांध की जगह नये बांध का निर्माण किया जाना चाहिए ताकि किसी भी आपदा से होने वाले नुकसान को रोका जा सके.

तमिलनाडु ने समिति के समक्ष कहा कि नए बांध की कोई जरूरत नहीं है तथा मौजूदा बांध का जलस्तर उच्चतम न्यायालय के 2006 के निर्देशों के अनुसार मौजूदा 136 फुट से बढ़ाकर 142 फुट किया जाना चाहिए.

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केरल के वित्त मंत्री और केरल कांग्रेस (एम) के अध्यक्ष के एम मणि ने अपने अभियान को तेज करते हुए आज मुल्लापेरियार के चप्पथ में दिनभर का अनशन किया वहीं उनके पार्टी सहयोगी तथा जल संसाधन मंत्री पी जे जोसफ ने दिल्ली में उपवास किया. 77 वर्षीय मणि ने अनशन स्थल पर कहा कि वह चाहते हैं कि तमिलनाडु बांध का जलस्तर कम करके 120 फुट करने की मांग मान ले. इस मामले को सुलझाने के लिए उन्होंने केंद्र के हस्तक्षेप की मांग भी की.

दिल्ली में जोसफ सुबह नौ बजे तीस जनवरी मार्ग स्थित बिड़ला हाउस पहुंचे और वहां अपना उपवास शुरू किया.

उन्होंने कहा, ‘मैं मुल्लापेरियार बांध के विवाद के शांतिपूर्ण निपटारे के लिए अनशन कर रहा हूं. मेरा कदम हजारों लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए है.’ इस बीच एमडीएमके नेता वाइको ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की और कहा कि केरल सरकार बांध को लेकर जनता के बीच डर पैदा कर रही है. उन्होंने कहा कि बांध का ढांचा सुरक्षित है.

चेन्नई में मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा कि केंद्र ने बांध स्थल पर सीआईएसएफ तैनात करने के उनके अनुरोध पर अभी कोई जवाब नहीं दिया है. उन्होंने विरोध प्रदर्शन की स्थिति में किसी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात करने की मांग की है.

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