2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के आरोपी और स्वान टेलीकॉम के प्रमोटर शाहिद उस्मान बलवा ने एक अदालत में सीबीआई को ‘सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इमेजिनेशन’ करार देते हुए कहा कि एजेंसी को लाइसेंस दिये जाने के लिहाज से कंपनियों की योग्यता के दिशानिर्देशों की जानकारी ही नहीं है.
वकीलों की हड़ताल के चलते बलवा को विशेष सीबीआई न्यायाधीश ओ पी सैनी के समक्ष बोलने का अवसर मिला और उसने कहा कि सीबीआई निर्थक मेहनत कर रही है.
उसने कहा, ‘केवल यही सवाल है कि क्या हम (स्वान टेलीकॉम) योग्य थे या नहीं और यह सवाल यूनीफाइड एक्सेस सर्विस लाइसेंस (यूएएसएल) के दिशानिर्देशों के खंड आठ पर आधारित है. हम दिल्ली सर्किल के पक्ष में थे, इसके अलावा सारी बातें बकवास हैं. सीबीआई को इस तरह की काल्पनिक जांच के लिए ‘सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इमेजिनेशन’ कहा जाना चाहिए.’
सीबीआई के आरोपपत्र में खामी बताते हुए बलवा ने कहा कि एजेंसी ने यूनिटेक के प्रबंध निदेशक और सह आरोपी संजय चंद्रा के भाई अजय चंद्रा को आरोपी नहीं बनाया जबकि उसने कहा था कि टेलीकॉम का व्यापार संजय देख रहा था. उसने कहा, ‘मैंने भी ऐसा ही बयान दिया था कि मैं ही टेलीकॉम व्यापार के लिए जिम्मेदार हूं. तब भी उन्होंने विनोद गोयनका (स्वान टेलीकॉम के एक और निदेशक) को जेल में डाल दिया.’