आइ एम एंडिंग माइसेल्फ टुडे (मैं आज अपने आप को खत्म कर रही हूं)'' गीतिका शर्मा के हाथ से लिखा अंतिम खत साफ-सुथरा है. 120 शब्दों का यह खत गुस्से से भरा हुआ है और इसमें बार-बार आने वाले शब्द 'भरोसा', 'छल-कपट', 'धोखा', 'निर्दोष' हताशा को प्रकट कर रहे हैं. गीतिका के दिल्ली स्थित घर से 5 अगस्त को मिली डायरी में लिखे इस खत में 23 वर्षीया पूर्व एयर हॉस्टेस ने गोपाल गोयल कांडा नामक व्यक्ति और उसकी सहायक अरुणा चड्ढा को 'सजा' देने का अनुरोध करते हुए लिखा है, ''उन्होंने मेरा जीवन अजीब बना दिया है.''
यह 'अजीबहु जीवन देश की नई स्मार्ट जीवनशैली में सामान्य हो चला है. स्कैंडल और मौतें सुर्खियों में छाई रहती हैं. यह अब चलन बन गया है कि कोई युवा महत्वाकांक्षी महिला किसी साधन संपन्न मर्द के साथ अफेयर चलाकर अपने सपनों को पूरा करे. ऐसी महिलाएं तेजी से आगे बढ़ना चाहती हैं और झ्टपट पैसा कमाने के तरीके अपनाती हैं. इस तरह वे अपराध, ब्लैकमेल, शोषण और इससे भी बुरी स्थितियों में फंस जाती हैं. इस खतरनाक खेल में कुछ की जीत होती है और कुछ की हार.
गीतिका हार गई. 5 अगस्त को जब यह खबर फैली कि दिल्ली पुलिस ने उसको आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोप में हरियाणा के प्रभावशाली गृह राज्यमंत्री 46 वर्षीय गोपाल गोयल कांडा के खिलाफ मामला दर्ज किया तो गीतिका के एक पूर्व सहकर्मी संदीप कुमार (अनुरोध पर नाम बदल दिया गया है) चीख पड़े, ''यह वही है, वही है.''
कांडा के गोवा में चलने वाले 30 करोड़ रु. के कैसिनो रियो के पूर्व कर्मचारी संदीप ने करीब तीन साल से गीतिका को नहीं देखा था. लेकिन वे गीतिका के बारे में बताते हैं कि वह ''गर्मजोशी वाली, शांत और मासूम थी'' और हमेशा काला सूट और लंबा स्कर्ट पहने दिखती थी. ''वह अक्सर कांडा की मांगों से असहज दिखती थी, खास तौर से जिस तरह से वह उसे खुलेआम अपने प्रति लगाव प्रकट करने को कहता था.''
31 वर्ष की नूपुर मेहता का नाम मार्च महीने में तब सुर्खियों में आया था, जब ब्रिटिश अखबार संडे टाइम्स ने आरोप लगाया कि उसका इस्तेमाल वर्ल्ड कप 2011 के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकव्ट मैचों को फिक्स करने के लिए 'हनी ट्रैप' (सौंदर्य जाल) के रूप में किया गया था. ऐंथ्रोपोलॉजिस्ट सुसान डेवी अपनी किताब मेकिंग मिस इंडिया मिस वर्ल्ड, 2008 में लिखती हैं कि जब नूपुर महत्वाकांक्षी मॉडल थी तब भी अपने ''राजकुमारी जैसे नाज-नखरे'' के लिए जानी जाती थी.
इसमें वर्ष 2003 के मिस इंडिया प्रतियोगिता का वर्णन किया गया है, जिसमें नूपुर ने हिस्सा लिया था. उसके बाद वह फिल्मों में चली गई जहां निर्देशकों के साथ मुलाकात के दौरान कुख्यात 'कास्टिंग काउच' (काम देने के बदले सेक्स संबंध बनाने वाले) से सामना हुआ.
उसकी दो फिल्में जो बोले सो निहाल और अबरा का डबरा आईं और दोनों फ्लॉप हो गईं. 2004 से 2006 के बीच उसने क्रिकेटरों, खासकर युवराज सिंह से मेल-जोल बढ़ाना शुरू किया. जून में दिए एक इंटरव्यू में नूपुर ने कहा, ''जहां भी मैं जाती हूं, क्रिकेटर मेरे आसपास होते हैं.'' इंग्लैंड में 2009 में टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान क्रिकेटरों से उसकी दोस्ती गाढ़ी हो गई. वह केनसिंगटन स्थित रॉयल गार्डन होटल में रह रही थी, जहां क्रिकेटर ठहरे हुए थे. हालांकि उसका दावा है कि वह खिलाड़ियों से सिर्फ लॉबी और कैसिनो में मिली. उसका नाम श्रीलंकाई खिलाड़ी तिलकरत्ने दिलशान के साथ जोड़ा गया. उसने संडे टाइम्स के खिलाफ मानहानि के 10 करोड़ रु. के दो मामले दर्ज कर दिए और उसने टीवी पर कहा, ''मैं दिवा (मोहिनी) हूं.''
सुंदरता कई रास्ते खोल देती है. संदीप बताते हैं, ''गीतिका बहुत खूबसूरत थी.'' दूसरी तरफ पुते हुए चेहरे और बिल्ली जैसी आंखों की वजह से नूपुर को इंटरनेट पर मर्दों के प्रशंसा भरे संदेश मिलते हैं: उसकी वेबसाइट पर भेजे गए एक संदेश में लिखा है, ''तुम खूबसूरत, प्यारी और जबरदस्त हॉट गर्ल हो.'' इस तरह का आकर्षण मादक साबित हो सकता है. अभिनेत्री बनने की चाहत रखने वाली 36 वर्ष की सिमरन सूद से ही पूछिए, जिन्हें कथित तौर पर कई हत्याओं में शामिल होने के आरोप में उनके पार्टनर के साथ अप्रैल में गिरफ्तार किया गया.
तेजी से पैसा बनाने के नए केंद्रों में ऐसी खूबसूरत बालाओं की भरमार है. भारतीय टीम के प्रायोजक सहारा समूह के प्रवक्ता अभिजीत सरकार कहते हैं, ''जब हम मैच से लौटकर आते हैं तो होटल की लॉबी युवतियों से भरी हुई पाते हैं. मुझे अचरज होता था कि वे कहां से आई हैं. वे खिलाड़ियों की नजर में आने की आस में उनके इर्दगिर्द मंडराती रहती हैं और दौलत, शोहरत तथा सुर्खियों में आने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती हैं.''
मुंबई की एक अनजान-सी मॉडल और मामूली अभिनेत्री 21 वर्षीय लीना कपूर इसका सटीक उदाहरण है. उसने आरोप लगाया कि आइसीसी के प्रतिष्ठित पैनल अंपायर असद रऊफ ने उसका यौन शोषण किया है. उसने कहा कि रऊफ ने वादे के मुताबिक उससे शादी करने और उसके लिए एक फ्लैट तथा कार खरीदने से इनकार कर दिया.
रऊफ ने इन आरोपों से इनकार किया. लेकिन लीना ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की और एक राष्ट्रीय टीवी चैनल पर रऊफ के साथ अपने अंतरंग रिश्तों का खुलासा करते हुए कहा, ''हमने 15 बार सेक्स किया.'' यदि वह यही गिन रही थी तो शायद इसे प्यार नहीं कहा जा सकता.
रऊफ ने आरोप लगाया कि वह रियलिटी टीवी शो बिग बॉस में जगह बनाने के लिए उनका इस्तेमाल कर रही है. फैशन डिजाइनर सुनीत वर्मा ने कहा, ''ग्लैमर, मनोरंजन और खेलजगत दुनियाभर में आकर्षक प्लेग्राउंड रहा है, हालांकि यह भारत के लिए नया है. यहां किसी के लिए 15 मिनट की प्रसिद्धि हासिल कर लेना आसान है, लेकिन उसे 15 साल में बदलने के लिए सिर्फ शारीरिक आकर्षण ही काफी नहीं होता. इसके लिए कुछ ईमानदारी, समझ और धैर्य की जरूरत पड़ती है.''
हालांकि कई बार धैर्य से भी यह सब नहीं मिलता. दिल्ली की सिमरन का ही उदाहरण लें जो प्रसिद्धि पाने की आकांक्षा के साथ 15 साल की उम्र में ही मुंबई चली गई थी. उसने फिल्मों में काम पाने की कोशिश की, लेकिन जब उसे सफलता नहीं मिली तो खुद को अपराध की दुनिया में ढाल दिया. नियति ने उसे वर्ष 1998 में खतरनाक अपराधी विजय पलांडे से मिलवा दिया.
करीब 14 साल तक वह शानदार फ्लैट, बीएमडब्ल्यू कार या क्रेडिट कार्ड के लिए मर्दों को अपने जाल में फंसाती रही और पलांडे लगातार उनको प्रताड़ित या उनकी हत्या करता रहा. दोनों कॉस्मेटिक सर्जरी और फर्जी पहचान की वजह से कानून से बचते रहे और बड़े-बड़े अभिनेताओं, नेताओं और क्रिकव्टरों के साथ मेल-जोल बढ़ाते रहे. अप्रैल में आखिरकार दोनों को मुंबई में सलाखों के पीछे डाल दिया गया.
लगभग इसी तरह के मामले में कुछ फिल्मों में काम कर चुकी तारा चौधरी की मार्च में हैदराबाद में गिरफ्तारी ने गंदगी का पिटारा खोल दिया-एक हाइ-प्रोफाइल वेश्यावृत्ति का नेटवर्क, यौन उत्पीड़न और राजनैतिक ब्लैकमेल. 35 वर्ष की तारा ने आरोप लगाया कि उसकी स्टार बनने की आकांक्षा को देखते हुए गुंटूर से सांसद रायपति संबाशिव राव ने उसका शोषण किया.
ये औरतें ऐसे शॉर्ट कट का सहारा क्यों लेती हैं? बंगलुरू के निमहांस में मनोविज्ञान विभाग की पूर्व प्रमुख डॉ. शोबिनी एल. राव बताती हैं, ''मध्यम वर्गीय जीवन की नीरसता से बाहर निकलना, इसका स्पष्ट जवाब होगा.'' ऐसी हर औरत प्रोफेशनल तरीके से काम करती है, नैतिक पाबंदियों को नजरअंदाज करती है और खुद को रोकने वाले सामाजिक दबाव को भी ठोकर मार देती है और इसकी उसे कीमत चुकानी पड़ती है.
फरवरी, 2011 में गायब हो जाने वाली अभिनेत्री लैला खान के कत्ल की जुलाई माह में पुष्टि हो गई. फिजा उर्फ अनुराधा बाली की अस्वाभाविक मौत पर बना रहस्य अब भी जारी है. हरियाणा के पूर्व उप-मुख्यमंत्री चंद्रमोहन की परित्यक्ता दूसरी बीवी फिजा का शव 6 अगस्त को उसके मकान से सड़ी हुई हालत में मिला.
यह एक औसत लड़की की खुद को नए सिरे से तलाशने में विफल रहने की कहानी है. सीपीएम नेता बृंदा करात कहती हैं, ''भारत में महिलाओं की सेक्सुअलिटी सामाजिक रूप से स्वीकार्य संबंधों से चलती है. हमारे तथाकथित आधुनिकीकरण ने कभी भी महिलाओं की आजादी के लिए बने सामाजिक मानकों को चुनौती नहीं दी है. यह भारत की विकास गाथा की समस्या है.'' लेकिन इसका सुखद अंत हो सकता है. दिल्ली के सीताराम भरतिया इंस्टीट्यूट में साइकियाट्रिस्ट डॉ. आलोक सरीन कहते हैं, ''जब कोई समाज परंपराओं और आधुनिकता के बीच अपने रास्ते तलाशने की कोशिश करता है तो लोग हमेशा निर्धारित भूमिकाओं से ही नहीं चिपके रहते. इसमें कुछ को जबरदस्त सफलता मिलती है, जबकि कुछ असफल हो जाते हैं.''
वे सभी सफल होना चाहती हैं. दुर्भाग्य से गीतिका के साथ ऐसा नहीं हो पाया.
-साथ में किरण तारे, प्राची रेगे और मोना रामावत