उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में किसानों की जमीन पर फार्मूला वन कार रेसिंग ट्रैक के निर्माण का तीखा विरोध करने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) के राज्य की सत्ता में आने के बाद इसका असर सूबे में इस खेल के भविष्य पर भी पड़ सकता है.
उत्तर प्रदेश के खेल मंत्री कामेश्वर उपाध्याय ने इस साल के अंत में होने वाली फार्मूला वन कार रेसिंग को लेकर मौजूदा सपा सरकार के रुख के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘हमारी सरकार किसानों के पक्ष में है. अगर रेसिंग ट्रैक के निर्माण के नाम पर अपनी जमीन गंवाने वाले किसान भूमि वापस लेना चाहेंगे, तो सरकार निश्चित रूप से उनका साथ देगी.’
उपाध्याय ने कहा कि इस वक्त राज्य विधानमंडल का सत्र चल रहा है, मगर अभी इस मामले पर कोई बात नहीं हो सकी है, लेकिन जब भी यह मामला उठेगा तो सरकार उचित निर्णय लेगी.
उन्होंने कहा कि मायावती के शासनकाल में तमाम गड़बड़ियां की गयी हैं और जरूरत पड़ने पर इस मामले में भी गौर किया जाएगा.
गौरतलब है कि सपा ने प्रदेश की पूर्ववर्ती मायावती सरकार के ग्रेटर नोएडा में किसानों की जमीन कथित रूप से छीनकर अपने चहेते जेपी ग्रुप से फार्मूला वन कार रेसिंग का ट्रैक बनवाने को प्रदेश के गरीब किसानों और आम जनता के साथ क्रूर मजाक करार दिया था.
सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने पिछले साल 19 अक्तूबर को मायावती सरकार द्वारा जे. पी. समूह को फार्मूला वन के लिये मनोरंजन कर, वाणिज्य कर तथा वैट समेत विभिन्न करों से ‘नाजायज’ छूट देने का आरोप लगाते हुए इसकी सीबीआई जांच की मांग भी की थी.
बौद्ध परिपथ का निर्माण प्रदेश की पूर्ववर्ती मायावती सरकार के कार्यकाल में ग्रेटर नोएडा के करीब 874 एकड़ क्षेत्र में लगभग 10 अरब रुपए की लागत से कराया गया था. इस ट्रैक का उद्घाटन खुद मायावती ने पिछले साल 18 अक्तूबर को किया था. यह परिपथ जे. पी. ग्रुप की ‘जेपी ग्रीन्स स्पोर्ट्स सिटी’ के 2500 एकड़ क्षेत्र का हिस्सा है.
इसके पहले सत्र की मुख्य रेसिंग पिछले साल 30 अक्तूबर को बुद्ध अंतरराष्ट्रीय परिपथ पर हुई थी जिसमें जर्मनी के सेबेस्टियन वेटेल ने खिताब जीता था. सहारा इंडिया के प्रमुख सुब्रत राय और शराब व्यवसायी विजय माल्या इस रेस में भाग लेने वाली भारतीय टीम ‘सहारा फोर्स इंडिया’ के सह-स्वामी हैं.