सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रभावी लोकपाल की मांग के समर्थन में रविवार सुबह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर दिनभर का अपना सांकेतिक अनशन शुरू कर दिया. जंतर-मंतर से पहले अन्ना राजघाट गए और वहां उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि पर मत्था टेका. अन्ना कुछ समय तक वहां मौन बैठे रहे.
अन्ना के इस सांकेतिक अनशन में सभी दलों के नेताओं को भी लोकपाल पर सार्वजनिक बहस में हिस्सा लेने और अपनी राय रखने के लिए आमंत्रित किया गया है. संसद की स्थायी समिति ने लोकपाल विधेयक का मसौदा संसद पटल पर रख दिया है लेकिन अन्ना स्थायी समिति द्वारा विधेयक में की गई सिफारिशों से संतुष्ट नहीं हैं.
इस दौरान कई राजनीतिक पार्टियों के नेता भी मौजूद रहेंगे. भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की बृंदा करात सहित अन्य दलों के नेता शामिल होंगे. टीम अन्ना ने कहा कि उसने चर्चा में भाग लेने के लिए कांग्रेस को भी आमंत्रित किया था लेकिन उसने आने से इंकार कर दिया.
इससे पहले लोकपाल पर संसदीय समिति की रिपोर्ट की आलोचना करने पर टीम अन्ना को आड़े हाथों लेते हुए समिति के अध्यक्ष अभिषेक सिंघवी ने कहा कि जिन लोगों की राय उनसे नहीं मिलती उन पर निशाना साधना लोकतंत्र को नहीं मानने के समान है. सिंघवी ने कहा कि इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि टीम अन्ना असहिष्णुता के चरम स्वरूप को अपना रही है. वे जिस बात पर शत प्रतिशत सहमत नहीं होते उस पर निजी हमला करते हैं.
वहीं दूसरी ओर अन्ना हजारे की ओर से आंदोलन शुरू करने के आसन्न खतरे के मद्देनजर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकपाल विधेयक के मुद्दे पर व्यापक सहमति तथा 22 दिसम्बर को समाप्त होने वाले संसद के वर्तमान शीतकालीन सत्र के दौरान उसे पारित करना सुनिश्चित करने के लिए अगले सप्ताह सर्वदलीय बैठक बुलायी है. सर्वदलीय बैठक से पहले संप्रग के सहयोगी दल आम रणनीति तैयार करने और संसद में एक आवाज में बोलने के बारे में 13 दिसम्बर को अनौपचारिक बातचीत करेंगे.