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इमरजेंसी के नायक जेपी को केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने ऐसे किया याद

देश में आपातकाल की 45वीं बरसी पर केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने लोक नायक जय प्रकाश को दिनकर की कविता के जरिए याद किया है. उन्होंने आपातकाल के दौर को याद करते हुए कहा कि उस दौरान लोकतंत्र को पूरी तरह से कुचल दिया गया था.

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केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (फाइल फोटो-PTI)
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (फाइल फोटो-PTI)

  • आपातकाल के ऐलान की 45वीं बरसी आज
  • राम विलास पासवान ने किया उस दौर को याद
  • कहा- लोकतंत्र को कुचला, नेताओं को हुई जेल
आपातकाल के ऐलान की 45वीं बरसी पर केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने उस दौर को याद किया है. इमरजेंसी के दौरान नायक बनकर उभरे जयप्रकाश नारायण के बहाने से उस कविता का भी जिक्र किया है, जिसमें राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने जेपी की तारीफ की थी.

राम विलास पासवान ने कहा, 'आज ही के दिन 45 साल पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल को याद कर दिल दहल उठता है. लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी बाजपेयी, चौधरी चरण सिंह, कर्पूरी ठाकुर सहित विपक्ष के सभी वरिष्ठ नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया. लोकतंत्र को पूरी तरह कुचल दिया गया.'

जेपी को याद करते उन्होंने कहा कि जेपी के संबंध में राष्ट्रकवि दिनकर ने कहा था, 'वह सुनो, भविष्य पुकार रहा, वह दलित देश का त्राता है, स्वप्नों का दृष्टा जयप्रकाश भारत का भाग्यविधाता है. कहते हैं उसको जयप्रकाश जो नहीं मरण से डरता है, ज्वाला को बुझते देख, कुण्ड में स्वयं कूद जो पड़ता है.'

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एक अन्य ट्वीट में उन्होने कहा कि उस समय मेरे जैसे लाखों युवा देशभर की जेलों में बंद थे. कुछ पता नहीं था कि कबतक जेल की यातना भोगनी होगी. लेकिन प्रकृति का नियम है कि पूरब में उगने वाला सूर्य, शाम होते होते पश्चिम में ढल जाता है. आपातकाल का मुखर विरोध करने वाले उन करोड़ों राष्ट्रभक्तों का कोटि कोटि अभिनंदन.

पीएम मोदी ने भी आपातकाल के दौर को याद किया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज से ठीक 45 वर्ष पहले देश पर आपातकाल थोपा गया था. उस समय भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए जिन लोगों ने संघर्ष किया, यातनाएं झेलीं, उन सबको मेरा शत-शत नमन! उनका त्याग और बलिदान देश कभी नहीं भूल पाएगा.

इससे पहले गृह मंत्री आमित शाह ने कांग्रेस पर आपातकाल को लेकर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि 45 साल पहले इस दिन सत्ता की लालच में एक परिवार ने देश में आपातकाल लागू कर दिया. रातों रात राष्ट्र को जेल में बदल दिया गया. प्रेस, अदालतें, मुक्त भाषण... सब खत्म हो गए. गरीबों और दलितों पर अत्याचार किए गए.

अमित शाह ने कहा, 'लाखों लोगों के प्रयासों के कारण आपातकाल हटा लिया गया था. भारत में लोकतंत्र बहाल हो गया था, लेकिन कांग्रेस में लोकतंत्र बहाल नहीं हो पाया. एक परिवार के हित पार्टी के हितों और राष्ट्रीय हितों पर हावी थे. यह खेदजनक स्थिति आज की कांग्रेस में भी पनपती है.'

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25 जून को हुई थी इमरजेंसी की घोषणा

देश में आपातकाल की घोषणा 25 जून 1975 को ही की गई थी. देश में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीनों के लिए इमरजेंसी लगी थी. तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद पर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दबाव बनाकर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपतकाल की घोषणा कराई थी.

प्रेस की स्वतंत्रता हुई थी खत्म

इस दौरान देशभर के कई दिग्गज विपक्षी नेताओं को जेल के भीतर भेज दिया गया था. जनता के नागरिक अधिकार खत्म हो गए थे और प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई थी. कांग्रेस की विपक्षी पार्टियां आज भी उस दौरन को काले दौर के तौर पर याद करती हैं.

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