कोरोना वायरस को रोकने के लिए फिलहाल एक ही उपाय है, इसके संक्रमण को फैलने से रोका जाए. ये वायरस शहर में कई लोगों में आ चुका है. सरकार जयपुर में संक्रमण फैलने से रोकने का पूरा उपाय तो कर रही है, मगर बहुत सारे ऐसे गांव हैं जहां पर रोजगार की तलाश में लोग सुबह ट्रेन से बड़ी संख्या में शहर जाते हैं. लिहाजा गांव में भी खतरा है कि ऐसे लोग संक्रमण लेकर पहुंच सकते हैं. इस तरह के गांव में कोरोना से लड़ने का क्या है उपाय और कैसे गांव वाले बचाव कर रहे हैं. इसका जायजा आजतक की टीम ने लिया.
राजस्थान के दूदू तहसील का उगरियावास गांव है, जहां की आबादी करीब 4000 है. गांव में कोई रोजगार का बड़ा साधन नहीं है. लिहाजा लोग ट्रेन पकड़कर सुबह जयपुर शहर आते हैं और दिनभर काम करने के बाद शाम को गांव लौट आते हैं. ऐसे में गांव वालों के दिल में भी खौफ है कि कोरोना वायरस इन लोगों के जरिए गांव तक पहुंच सकता है.
रोजगार के लिए शहर जाना ही पड़ेगा
हमने गांव वालों से बातचीत की कि आखिर यह कैसे कोरोना वायरस से मुकाबले की तैयारी कर रहे हैं. गांव के लोगों ने बताया कि गांव में कोई भी मुकम्मल तैयारी नहीं है. उन्हें कोरोना वायरस के बारे में जानकारी मिली है. कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने कहा कि हमारे गांव में कोरोना वायरस का डर नहीं है.
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कुछ लोगों ने यह भी कहा कि वह शाम को रोजाना शराब पीते हैं और शराब पीने वालों और कोरोना का कोई असर नहीं होता है. वहीं, युवाओं का मानना है कि भले ही जयपुर में कोरोना वायरस का संक्रमण है, मगर रोजगार के लिए हम जयपुर जाना छोड़ नहीं सकते हैं. हमारे लिए इसके अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं है.
झाड़ा लगा लो ठीक हो जाएगा
दुर्गा लाल कहते हैं कि हमारे गांव में कोई इंतजाम नहीं है. हम तो अखबारों में सुनते हैं कि सर्दी-खांसी है तो डॉक्टर के पास जाओ और 2 मीटर दूर रहो. बाकी हमारे गांव में ऐसी समस्या नहीं है. गांव के रूपा लाल ने कहा कि डॉक्टर के पास कोई दवा है ही नहीं. ऐसे में लोग कहते हैं कि झाड़ा लगा लो ठीक हो जाएगा. राकेश बताते हैं कि रोजगार के लिए शहर जाना ही पड़ेगा.
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गांव में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र है, जहां पर बैठी डॉक्टर गांव वालों को बताती हैं कोरोना वायरस से बचने के लिए क्या-क्या एहतियात बरतनी चाहिए. मगर सर्दी खांसी और बुखार की दवा के नाम पर वहां भी गिलोय की डंठल और गिलोय की गोटी और क्वाथ के अलावा कुछ भी नहीं है. इस गांव के चिकित्सालय में हर दवा का इलाज आयुर्वेदिक काढ़ा ही है.
सरकारी डॉक्टर सर्दी-जुकाम के मरीजों को गिलोय का डंडा हाथ में पकड़ा देते हैं. बस इसी का फायदा उठाकर गांव में बंगाली डॉक्टर ने भी अपना बिजनेस जमा लिया है. गांव में झोलाछाप डॉक्टरों को बंगाली डॉक्टर के नाम से जाना जाता है. कोलकाता से आए एक बंगाली डॉक्टर ने कहा कि वो जयपुर में एमआर की नौकरी करता था. दवा की जानकारी होने के नाते उसने इस गांव में आकर डिस्पेंसरी खोल ली. दरअसल, इस कोरोना वायरस का लक्षण ही सर्दी जुकाम और बुखार है और उसी की दवा ये डॉक्टर साहब बांटते हैं.