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पंजाब पुलिस की हिदायत- 'टिकटॉक प्रो' से सावधान, झटके में लग सकता है चूना

टिकटॉक एप से मिलता-जुलता टिकटॉक प्रो नाम का एक मालवेयर आजकल इंटरनेट पर दिखाई दे रहा है जो फर्जी है. ये गूगल प्ले स्टोर समेत एप स्टोर (आईओएस) पर भी उपलब्ध नहीं, जो सीधे तौर पर दर्शाता है कि ये गुमराह करने वाला फर्जी एप है.

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साइबर अपराध के दिनोंदिन बढ़ रहे मामले
साइबर अपराध के दिनोंदिन बढ़ रहे मामले

  • प्रतिबंधित एप डाउनलोड न करने की सलाह
  • संदेहास्पद लिंक पर क्लिक न करने के निर्देश

पंजाब पुलिस के साइबर सेल ने शुक्रवार को प्रदेश के लोगों को टिकटॉक एप से मिलती-जुलती एप की फाइल या भारत सरकार की ओर से बैन किए एप को डाउनलोड न करने की हिदायत दी है. पुलिस की तरफ से कहा गया है कि ये मालवेयर फैलाने वाला कोई नुकसानदायक लिंक हो सकता है.

पंजाब की स्टेट साइबर क्राइम सेल ने पाया है कि लोग एमएमएस और व्हाट्सएप मैसेज पा रहे हैं कि चीन की प्रसिद्ध एप टिकटॉक अब भारत में टिकटॉक प्रो के रूप में उपलब्ध है. लोगों को डाउनलोड करने के लिए यूआरएल भी दिया जा रहा है. टिकटॉक एप से मिलता-जुलता टिकटॉक प्रो नाम का एक मालवेयर आजकल इंटरनेट पर दिखाई दे रहा है जो फर्जी है. ये गूगल प्ले स्टोर समेत एप स्टोर (आईओएस) पर भी उपलब्ध नहीं, जो सीधे तौर पर दर्शाता है कि ये गुमराह करने वाला फर्जी एप है. इसमें दिया यूआरएल http://tiny.cci"iktokPro जोकि डाउनलोड लिंक के रूप में दिया गया है, निजी/संवेदनशील जानकारी फैलाने में बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल व सुरक्षा का उल्लंघन है.

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साइबर सेल ने कहा है, इसके अलावा फाइल पर क्लिक करने पर तुरंत सिस्टम पर एपीके फाइल टिकटॉक प्रो एपीके दर्ज हो जाती है जो https://githubusercontent.com/ legitprime/v®gb/master/"iktok_pro.apk. के रूप में है. जब लिंक को क्लिक किया जाता है तो एक मैसेज आता है, इस साइट पर नहीं पहुंचा जा सकता. विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस बारे में सचेत रहें और संदेहास्पद लिंक पर क्लिक न करें. अगर वे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए नकली एप संबंधी कोई भी मैसेज पाते हैं तो वे इसे दूसरों को न भेजें और तुरंत ऐसे मैसेज को डिलीट कर दें.

राज्य के साइबर क्राइम इंवेस्टिगेशन सेंटर, ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन पंजाब की ओर से कहा गया है कि ऐसे लिंक पर क्लिक करना बड़ा जोखिम पैदा करता है क्योंकि ये मालवेयर हो सकता है जो धोखाधड़ी का शिकार बना सकता है. इस तरह उपयोगकर्ता को वित्तीय नुकसान भी होने का डर बना रहता है. इस संबंध में कोई भी जानकारी सेंटर की ई-मेल आईडी ssp.cyber-pb.nic.in पर साझा की जा सकती है, ताकि विभाग को ऐसी धोखाधड़ी संबंधी गतिविधियों में शामिल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सफलता मिल सके.

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