भारतीय राजनीति के इतिहास में ओम प्रकाश चौटाला ऐसे गिने चुने नेताओं में शुमार हो गए हैं जिन्होंने किसी आरोप में दोषी करार दिया गया हो.
अमूमन यही होता है कि भारतीय नेताओं पर आरोप तो बहुत लगते हैं, वो जेल भी चले जाते हैं लेकिन उन पर आरोप सिद्ध नहीं हो पाता है.
हरियाणा की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल के कर्ताकर्ता ओम प्रकाश चौटाला को उनके पिता देवी लाल ने तब उनको घर से निकाल दिया था जब वह घडि़यों की स्मगलिंग करते हुए दिल्ली एयरपोर्ट पर पकड़े गए थे.
लेकिन उसी बेटे को बाद में उसी पिता ने हरियाणा के सीएम की कुर्सी पर तब बैठा दिया जब उन्हें केंद्र में उप प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला.
ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को दिल्ली की एक अदालत ने शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा सुनाई है.
इससे पहले चौटाला जोड़ी को हरियाणा सिविल सेवा में भी फर्जी भर्ती कराने पर मामला दर्ज है.
बीते 1 जनवरी को अपना 78वां जन्मसदिन मनाने वाले ओम प्रकाश चौटाला देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवी लाल के बेटे हैं.
चौटाला देश के ऐसे पहले मुख्येमंत्री हैं जिनको किसी आरोप में दोषी पाया गया है.
बिहार में लालू यादव से लेकर झारखंड के शिबू सोरेन और मधु कोड़ा तक जेल में रहे हैं लेकिन उनपर अबतक केवल आरोप रहा है वे अबतक किसी भी आरोप में दोषी नहीं पाए गए हैं.
ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए और कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए, दोनों का हिस्सा रह चुकी है लेकिन अब चौटाला एक को 'सांपनाथ' तो दूसरे को 'नागनाथ' कहकर पुकारते हैं.
सुनने में जरूर अजीब लगता है लेकिन यह सच है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके और अब शिक्षक घोटाला में दोषी पाए गए ओम प्रकाश चौटाला किसी जमाने में घडि़यों की स्मगलिंग किया करते थे.
इसी स्मगलिंग को करते हुए जब चौटाला को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया तो उनके पिता चौधरी देवी लाल ने उनको घर से बेदखल कर दिया था.
हालांकि 2 दिसंबर 1989 को उसी पिता का पुत्र प्रेम तब जागा जब उन्हें केंद्र में उप प्रधानमंत्री का पद मिला और तब उन्होंने अपने बेटे ओम प्रकाश चौटाला को हरियाणा के मुख्यमंत्री का पद दिया.
1996 में न्यायाधीश के एन सैकिया आयोग ने चौटाला को अमीर सिंह हत्याकांड में सह अभियुक्त के तौर पर इंगित किया था.
चौटाला की किस्मत कहें या उनका कर्म वो 2 जुलाई 1990 को एक बार फिर हरियाणा के तख्त पर बैठे लेकिन पांच दिन अंदर ही पार्टी के दबाव में उने सत्ता छोड़नी पड़ी.
नए साल की शुरुआत अपने जन्मददिन से करने वाले चौटाला को 2013 का नया साल ले डूबा.
12 साल पुराने शिक्षक भर्ती घोटाले के तार ऐसे हिले की चौटाला के सारे सुर-ताल बिगड़ गए. इससे पहले हरियाणा सिविल सेवा में भी उनके खिलाफ फर्जी करने का आरोप है.
आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में सीबीआई ने चौटाला परिवार के खिलाफ 1467 करोड़ रुपये की संपत्ति का चार्जशीट दायर किया है.
1467 करोड़ रुपये के इस मामले में चौटाला परिवार का 80 से ज्यादा केवल प्रॉपर्टी है. कांग्रेस का कहना है कि यह संपत्ति चौटाला ने 1993 से 2006 के बीच में बनाई है.
एक अहम घटनाक्रम में दिल्ली की एक अदालत ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को भ्रष्टाचार के एक मामले में 10-10 साल के कारावास की आज सजा सुनाई. इस फैसले के बाद चौटाला के समर्थकों ने अदालत परिसर में हिंसा की.
जूनियर बेसिक ट्रेंड शिक्षक भर्ती घोटाले में भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में पिछले सप्ताह चौटाला पिता पुत्र और दो आईएएस अधिकारी सहित 55 लोगों को दोषी ठहराने वाले विशेष सीबीआई न्यायाधीश विनोद कुमार ने दोषियों को अलग अलग अवधि की जेल की सजा सुनाई.
चार बार मुख्यमंत्री रह चुके 78 वर्षीय ओम प्रकाश और उनके बेटे 51 वर्षीय अजय दोनों ही विधायक हैं और अगर उपरी अदालत द्वारा उनकी दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाती है तो उन्हें अगले साल विधानसभा चुनाव में खड़ा होने से अयोग्य ठहराया जा सकता है.
जनप्रतिनिधि अधिनियम के अनुसार, किसी अपराध में दोषी और दो साल के से अधिक के कारावास की सजा पाने वाला कोई भी व्यक्ति दोषसिद्धि से सजा खत्म होने के छह साल बाद तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेगा.
अदालत परिसर में हिंसा से बेपरवाह न्यायाधीश ने सजा का आदेश पढ़कर सुनाया. उधर, चौटाला समर्थकों ने अदालत परिसर में पथराव किया, देसी बम फेंके और पुलिस से झड़प की. जवाब में पुलिस को कानून व्यवस्था बनाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े.
ओम प्रकाश चौटाला को पिछले सप्ताह हिरासत में लेने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था जिसके कारण आदेश के समय वह अदालत में मौजूद नहीं थे लेकिन उनके बेटे अजय और अन्य सभी दोषी अदालत में ही मौजूद थे.
अदालत ने चौटाला पिता पुत्र के अलावा तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार, चौटाला के पूर्व विशेष ड्यूटी अधिकारी विद्या धर (दोनों आईएएस अधिकारी) और हरियाणा के मुख्यमंत्री के तत्कालीन राजनीतिक सलाहकार शेर सिंह बादशामी (विधायक) को भी दस-दस साल के कारावास की सजा सुनाई.
सभी 55 दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 418 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जीवाडा), 471 (फर्जी दस्तावेजों का उपयोग) और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धारा 13 (एक) (डी) और 13 (दो) के तहत दोषी ठहराया और सजा सुनाई.
पांच मुख्य आरोपियों के अलावा एक महिला सहित चार अन्य को भी 10 साल की सजा सुनाई गई है. इसके अलावा, एक दोषी को पांच साल की जबकि बाकी बचे 45 दोषियों को चार-चार साल के कारावास की सजा दी गई.