26 फरवरी को बालाकोट में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने पर वायुसेना ने मिराज से स्पाइस-2000 बम बरसाए, मारे गए आतंकियों के आंकड़े को लेकर भारत में राजनीति तेज है. लेकिन इस बीच वायुसेना के चीफ ने साफ कर दिया कि बम टागरेट पर ही गिराया था, आइए हम आपको बताते हैं कि स्पाइस-2000 किस तरह से हवा में काम करता है और कैसे हमेशा सही टारगेट को भेदता है. (Photo: AP)
दरअसल स्पाइस-2000 की खासियत यह है कि यह केवल एक बम नहीं है, वास्तव में यह एक 'गाइडेंस किट' है जो एक स्टैंडर्स वारहेड या बम से जुड़ी होती है. स्पाइस गाइडेंस किट में दो पार्ट्स होते हैं. एक भाग बम के आगे के हिस्से से जुड़ा होता है और दूसरा इसके अंत में होता है. किट के पहले भाग की नोक पर एक कैमरा लगा होता है. जबकि दूसरे भाग में एक फिन यानी डेटा चिप होती है, जो स्पाइस-2000 को बम छोड़ने का सही वक्त बताती है.
मिशन से पहले टागरेट को लेकर रोडमैप तैयार किया जाता है. लक्ष्य तय कर
लेने के बाद वायु सेना के कर्मचारियों द्वारा मेमोरी चिप में सभी प्रकार के
डेटा को फीड कर दिया जाता है. डेटा में लक्ष्य के निर्धारित के लिए GPS,
टारगेट की सही तस्वीर और टागरेट से जुड़ी तमाम जानकारियां होती हैं, ताकि
बम को सही दिशा में छोड़ा जाए और टारगेट तक पहुंचाया जाए. (Photo courtesy: YouTube/Rafael)
जब मिशन के दौरान एक बार फाइटर जेट पूर्व निर्धारित स्थान और ऊंचाई पर पहुंच जाता है तो वहां से वो इन स्मार्ट बमों (स्पाइस-2000) को गिरा देता है. इस क्रम में SPICE-2000 ऑनबोर्ड कंप्यूटर द्वारा मेमोरी चिप में स्टोरेज डेटा की मदद से टारगेट पर दागा जाता है. किट में लगे कैमरे की मदद से टारगेट की लाइव तस्वीरें खींची जाती हैं, तस्वीरों से ये पता चलता है कि बम किधर जा रहा है, अगर बम टागरेट से अलग दिशा में जाता है तो तुरंत ऑनबोर्ड कंप्यूटर की मदद से ऑपरेट कर उसे सही दिशा में भेज दिया जाता है. इसलिए इस स्पाइस 2000 बम को टागरेट तक पहुंचाना आसान होता है. (Photo courtesy: YouTube/Rafael)
तस्वीर में समझें....
उदाहरण के लिए अगर छोड़ने के बाद बम रेड बिल्डिंग की ओर जाता है, लेकिन मेमोरी चिप पर मौजूद डेटा निर्देश देता है कि टारगेट ब्लू बिल्डिंग है, जिसके बाद कंप्यूटर की मदद से बम की दिशा को मोड़कर टारगेट की तरफ कर दिया जाता है. इसलिए बालाकोट में मिराज से छोड़े गए बम का सही टारगेट पर गिरने की पूरी संभावना है. क्योंकि बम को ऑनबोर्ड कंप्यूटर की मदद से आखिरी वक्त तक ऑपरेट किया जाता है. (Photo courtesy: YouTube/Rafael)
स्पाइस 2000 को 'डीकैपिटेटिंग वेपन' कहा जाता है जो सटीक हमले के जरिए दुश्मन के अड्डे को खत्म करने के लिए डिजाइन किया गया है. स्पाइस 2000 बम वही है जिनका इस्तेमाल जैश को खत्म करने के लिए किया गया था. वायुसेना ने मिराज के जरिये स्पाइस 2000 बम को टारगेट पर गिराया था. भारतीय वायु सेना को इजरायली स्पाइस बम किट संचालित करने के लिए जाना जाता है.
इजरायल निर्मित स्पाइस (स्मार्ट सटीक प्रभाव और लागत प्रभावी) बम सबसे बड़ा बम है, जिसका इस्तेमाल भारतीय वायु सेना करती है. इजरायल की फर्म राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स लिमिटेड द्वारा निर्मित, 2000-पौंड सटीक निर्देशित बमों का उपयोग फ्रांसीसी मूल के मिराज 2000 किया जाता है.