कुंभ के रंग भी अजब हैं. जो एक बार कुंभ के रंग में रंग गया, उसे फिर किसी बात की फिक्र नहीं. चाहे देशी हों या विदेशी, कोई भी इस रंग से अछूता नहीं. कुंभ महापर्व में आस्था का जनसैलाब उमड़ रहा है.
(PHOTO: संजय समीर)
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साध्वी भगवती सरस्वती कुंभ मेले में अध्यात्म का अनुभव ले रही हैं. वह 25 साल पहले एक छात्रा के तौर पर अमेरिका से ऋषिकेश आयीं थी.
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गंगा मैया के दर्शन करके उनको आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव हुआ और तब से वे साध्वी के रंग में रम गयी .
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साध्वी भगवती सरस्वती कहती हैं, "भारत देवभूमि है, पुण्यभूमि है. यह भाव का आवेग नहीं है, कल्पना की बातें नहीं हैं. प्रत्यक्ष करने पर समझ जाओगे कि ऐसा देश तुम्हें खोजने पर भी नहीं मिलेगा."
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वह गेरुए रंग की साड़ी पहने हुए हैं और गले में रुद्राक्ष की माला भी है.
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कुंभ में अर्जेंटीना से आई दो श्रद्धालु ग्रेस और नदिनी पेशे से अर्जेंटीना में एक्ट्रेस हैं.
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इन दोनों एक्ट्रे्सों को कुंभ ने ऐसा मोहित किया कि वो अब अपने देश
अर्जेंटीना नहीं जाना चाहतीं. प्रयागराज का आकर्षण ही ऐसा है कि लोगों को अपनी ओर खींच लेता है.
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अपना टिकट कैंसल कर अब ये कुंभ में लगे
परमार्थ निकेतन शिविर में श्रद्धालुओं की सेवा कर रही हैं.
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वह गेरुए रंग के वस्त्र में और लाल रंग का दुपट्टा डाले हुए हैं. वह यहां आकर कितना खुश हैं, इसका अंदाजा उनके हाव-भाव देखकर ही लग जाता है.
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कुंभ 15 फरवरी से शुरू होकर 4 मार्च तक चलेगा. इस दौरान तमाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं को कुंभ और प्रयागराज के अनूठे अध्यात्म का अनुभव मिलेगा.