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भारत

तस्वीरों में जाने ब्रह्मेश्वर मुखिया के बारे में | पढ़ें

तस्वीरों में जाने ब्रह्मेश्वर मुखिया के बारे में | पढ़ें
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बिहार की जातिगत लड़ाइयों में एक चर्चित चेहरा था ब्रह्मेश्वर मुखिया. भोजपुर ज़िले के खोपिरा गांव के रहने वाले का असल नाम ब्रह्मेश्वर सिंह है.
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बिहार राज्य में एक वक्त ऐसा आया जब नक्सली संगठनों और बड़े किसानों के बीच खूनी लड़ाई का दौर चल पड़ा. इस दौरान ही ब्रह्मेश्वर मुखिया ने अपने नेतृत्व में अपनी एक सेना बनाई थी.
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सितंबर 1994 में ब्रह्मेश्वर मुखिया के नेतृत्व में जो सगंठन बना उसे रणवीर सेना का नाम दिया गया. ब्रह्मेश्वर मुखिया ने ऊंची जाति के जमींदारो की प्राइवेट आर्मी रणवीर सेना की शुरुआत की थी.
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1994 से लेकर 2002 तक करीब 250 लोगों की हत्या के 22 मुकदमें का मुख्य आरोपी ब्रह्मेश्वर मुखिया को सबूतों के अभाव में कुछ दिन पहले ही बेल दिया गया था. 
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ब्रह्मेश्‍वर मुखिया पर सबसे पहले अपने ही गांव खोपिरा में रक्तपात करने का आरोप लगा था. उसके बाद 2002 तक तकरीबन 22 बार दलितों और पिछड़ों को मौत के घाट उतारने का आरोप लगाया गया.
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बिहार में ब्रह्मेश्‍वर मुखिया ने वर्ष 1994 के अंत में रणवीर सेना का गठन किया था. इस सेना पर 29 अप्रैल 1995 को भोजपुर जिले के संदेश प्रखंड के खोपिरा में पहली बार कहर बरपाने का आरोप लगा. आरोप था कि इस दिन ब्रह्मेश्‍वर मुखिया की मौजूदगी में रणवीर सेना ने 5 दलितों की हत्या कर दी थी. इसके करीब 3 महीने बाद रणवीर सेना ने भोजपुर जिले के ही उदवंतनगर प्रखंड सरथुआं गांव में 25 जुलाई 1995 को 6 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई.
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7 फरवरी 1996 को रणवीर सेना ने एक बार फिर भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखंड के चांदी गांव में हमला कर 4 लोगों की हत्या कर दी. इसके बाद 9 मार्च 1996 को भोजपुर के सहार प्रखंड के पतलपुरा में 3, 22 अप्रैल 1996 को सहार प्रखंड के ही नोनउर नामक गांव में रणवीर सेना ने 5 लोगों की हत्या कर दी. 29 अप्रैल 1995 से लेकर 25 मई 1996 तक के बीच रणवीर सेना ने कुल 38 लोगों की हत्या कर दी.
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रणवीर सेना ने 31 दिसंबर 1997 को रणवीर सेना ने जहानाबाद के लक्ष्मणपुर-बाथे नामक गांव में एक साथ 59 लोगों की निर्मम हत्या कर दी. यह बिहार में हुआ अब तक का सबसे बड़ा सामूहिक नरसंहार है.
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