scorecardresearch
 
Advertisement
भारत

बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल

बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 1/15
अटल बिहारी वाजपेयी अब हमारे बीच नहीं रहे. उन्होंने एम्स में गुरुवार शाम 5.05 बजे अंतिम सांसें लीं. निधन की खबर मिलते ही उनके चाहने वाले मायूस हो गए. हो भी क्यों नहीं, वाजपेयी की शख्सियत ही ऐसी थी. कोमल हृदय वाले वाजपेयी कठोर फैसले लेने में कभी झिझके नहीं. पक्षपात, ऊंच-नीच, मजहब, जाति की सरहदों से हमेशा ऊपर रहे, तभी तो वो सियासत की गलियों से ज्यादा करोड़ों दिलों में बसते हैं.

बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 2/15
इतिहास जब कभी भारतीय राजनीति की दोबारा समीक्षा करेगा तो यकीनन उसे दो हिस्सों में बांटा जाएगा. राजनीति अटल बिहारी वाजपेयी से पहले और राजनीति अटल बिहारी वाजपेयी के बाद. अटलजी को श्रद्धांजलि देने के लिए यहां क्लिक करें
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 3/15
सबको साथ लेकर चलने की उनकी उदारता ने राजनीति में वो प्रयोग किया जिसके बाद गठबंधन राजनीति का नया रास्ता खुला. अटल ने 28 दलों को साथ लेकर एनडीए की सरकार चलाई जो आज भी देश में मिसाल है उदारवादी राजनीति की.
Advertisement
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 4/15
सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने के बाद भी अटल बिहारी वाजपेयी कभी किसी से भुलाए नहीं जा सके, ना उनकी शख्सियत और न सम्मान कोई बिसरा सका.
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 5/15
दिसंबर 2005 में राजनीति की विरासत पीछे छोड़कर अटल ने संन्यास ले लिया. लेकिन उनके बनाए रास्ते अब भी लोगों को रास्ता दिखाते हैं. मनमोहन सिंह कभी वाजपेयी के जन्मदिन को नहीं भूले.
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 6/15
नवाज़ शरीफ जब हिंदुस्तान आए तो अटल के घर जाना नहीं भूले. नरेंद्र मोदी आज भी उन्हें याद करके भावुक हो जाते हैं. सियासत अब भी उनको सोचकर ठिठक जाती है. पलट कर देखती है और उन पर गर्व करती है.

बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 7/15
यूपीए सरकार के दौरान केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा ने जब अटल के बारे में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की तो पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बेहद दुखी हुए और उन्होंने भारी मन से सदन में खड़े होकर माफी मांगी.
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 8/15
सिद्धांतों के आड़े अगर पार्टी लाइन भी आती थी तो अटल उसे तोड़ देते थे, तर्क देते थे और सभी को अपना मुरीद बना लेते थे.
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 9/15
पार्टी पर भले ही केसरिया रंग की राजनीति का आरोप रहा हो लेकिन अटल इन आरोपों के दायरे में कभी नहीं आए. उनकी धर्मनिरपेक्षता कभी सवालों के घेरे में नहीं आई.
Advertisement
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 10/15
अटल बिहारी वाजपेयी हिंदुस्तान के अंदर या हिंदुस्तान के बाहर पाकिस्तान तक के मुसलमानों में भी उतने ही लोकप्रिय रहे.

बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 11/15
अटल के बुलंद किरदार ने हमेशा सिद्धातों की सियासत की. बिना ये सोचे कि क्या खोया, क्या पाया, वो बस अपनी धुन में चलते रहे और अपने पीछे छोड़ते गए वो निशान, जिन पर आज की राजनीति चलती है.
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 12/15
पांच दशकों की सियासी साधना में अटल ने वो मुकाम हासिल किया जो सत्ता और विपक्ष की औपचारिक हदों से परे था, वो जब बोलते थे तो सब सुनते थे. वो जब चुप हो जाते थे. संसद तब भी उन्हें सुनना चाहती थी.
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 13/15
राजनीति में चंद्रशेखर अटल की धारा के विपरीत खड़े रहते थे, तमाम दूसरे विरोधी नेताओं की तरह चंद्रशेखर भी अटल के सबसे बड़े मुरीदों में से एक थे. यही वजह है कि उन्हें अच्छा नहीं लगा जब अटल के भाषण के बीच टोका-टोकी हुई और वो उठ खड़े हुए.
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 14/15
भावुकता वाजपेयी की कमजोरी नहीं, मजबूती थी. यही वजह है कि जब 2002 में गुजरात में दंगे हुए तो वाजपेयी ने उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने की ठान ली. गुजरात जाकर उन्होंने मोदी को राजधर्म भी सिखाया.
बहुत याद आएंगे अटल, इन 15 बातों में जानें दुनिया क्यों थी कायल
  • 15/15
अटल को जिन्होंने अपने रंग में देखा है, सबके पास उनकी यादें हैं, उनसे जुड़े किस्से हैं. लालजी टंडन तो अटल बिहारी वाजपेयी के सबसे करीबी लोगों में से एक रहे हैं. अटल की चर्चा चलते ही उनके सामने एक चलचित्र सा चल पड़ता है.
Advertisement
Advertisement
Advertisement