सुप्रीम कोर्ट में आज केंद्र और राज्यों को भ्रष्टाचार को खत्म करने के निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होनी थी. लेकिन मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल इस याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती.
CJI ने कहा कि भ्रष्टाचार एक मुद्दा है. हम भ्रष्टाचार को कैसे खत्म करें? हम विधि आयोग से इस पर विचार करने के लिए कहें और फिर उसके बाद क्या?
इस पर याचिकाकर्ता अश्वनी उपाध्याय ने कहा भ्रष्टाचार के लगभग दो लाख से ज्यादा मामले हैं. इस मामले पर आयोग अपनी रिपोर्ट दाखिल करे. इसके लिए उपाय सुझाए गए हैं.
'विधायिका से जुड़ा है यह मामला'
CJI ने कहा कि यह विधायिका से जुड़ा हुआ विषय है. हम अनुच्छेद 32 के तहत इस मामले पर सुनवाई नहीं की जा सकती. हालांकि कोर्ट ने याचिककर्ता को आयोग के सामने अपना पक्ष रखने की स्वतंत्रता देते हुए याचिका को वापस लेने के आधार पर खारिज कर दिया.
शपथ रोकने की याचिका भी खारिज
इसके अलावा शीर्ष अदालत ने आज भारत के मनोनीत मुख्य न्यायाधीश (CJI) धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ को पद की शपथ लेने से रोकने की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका पर सुनवाई की कोई वजह नजर नहीं आती है. साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि याचिका पूरी तरह से भ्रामक है. लिहाजा इस पर आगे सुनवाई करने का कोई मतलब नहीं है.
अदालत में सीजेआई ने काउंसिल से पूछा कि अगर आपके पास कुछ तथ्य है तो हम आपकी बात सुनने को तैयार हैं. इसके जवाब में काउंसिल ने कहा कि कृपया आप मेरी लिखित प्रस्तुतियों के आधार पर फैसला लें. तब अदालत ने कहा कि सभी की बात सुनने के बाद हमने पाया कि पूरी याचिका पर विचार करने का कोई मतलब नहीं है. इसलिए हम इस याचिका को खारिज करते हैं.