नए साल 2026 की शुरुआत उम्मीदों के साथ-साथ कई बड़ी चुनौतियां भी लेकर हुई है. यह साल देश और दुनिया के लिए निर्णायक साबित हो सकता है. सियासत में चुनावी इम्तिहान हैं तो खेल के मैदान पर खिताब बचाने की परीक्षा. आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती महंगाई और निर्यात से जुड़ी चुनौतियां हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिश्तों को संभालने, आतंकवाद और संभावित वैश्विक संघर्ष जैसे खतरे भी सामने खड़े हैं.
साल के पहले दिन, ऐसी ही 10 बड़ी चुनौतियों पर एक नजर.
2026 का साल विपक्ष के लिए सबसे बड़ी चुनावी परीक्षा लेकर आया है. इस साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे 2029 के आम चुनाव से पहले विपक्ष की दिशा और दशा तय करेंगे. पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में होने वाले ये चुनाव न सिर्फ सत्ता की लड़ाई हैं, बल्कि इंडिया गठबंधन की मजबूती और रणनीति की अग्निपरीक्षा भी हैं. साल के आगाज के साथ ही इन राज्यों में चुनावी सरगर्मी तेज हो चुकी है और सियासी तापमान लगातार चढ़ता जा रहा है.
ममता बनर्जी 2011 से अब तक बंगाल में अजेय रही हैं, एमके स्टालिन को तमिलनाडू में अपनी सत्ता बचानी है, केरल में पिनराई विजयन के पास हैट्रिक का मौका है, 10 साल बाद असम में वापसी की लड़ाई कांग्रेस को लड़नी है और पुडुचेरी में एनडीए को अपनी सत्ता बचानी है.
अब बात, साल 2026 में एक और नई चुनौती की. जी हां साल 2025 भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ. 2025 में भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया. अब भारत का अगला बड़ा लक्ष्य जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है. इसके साथ साथ भारत के लिए 2026 में अमेरिका के साथ टैरिफ वॉर भी एक चैलेंज है.
भारत और अमेरिका के अधिकारी साल 2025 में साल भर एक ट्रेड डील फाइनल करने के लिए संघर्ष करते रहे. दोनों देशों के अधिकारी एक शुरूआती फ्रेमवर्क ट्रेड डील बनाने के लिए मुश्किल बातचीत में लगे रहे, जिससे आखिरकार एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रास्ता खुलता. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया और बाद में रूसी तेल खरीदने की वजह से उसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया.
अब भारत ने अमेरिका के सामने ट्रेड वार्ता में अपना आखिरी प्रस्ताव रख दिया है. भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25% पेनाल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए.
दोनों देशों के बीच चल रही इस वार्ता से नए साल में कोई ठोस फैसला निकलने की उम्मीद है. और दोनों देशों के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है. भारत और अमेरिका के बीच, टैरिफ पर डील होने की एक वजह ये भी कि जनवरी में आने वाले आंकड़ों में भारत के रूसी तेल आयात में बड़ी गिरावट दिख सकती है. नवंबर 21 से रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू हुए हैं. इसके बाद भारत का रूस से तेल आयात घटने लगा है.
2. महंगाई की मार
2026 महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती लेकर आया है.आम बजट से पहले ही महंगाई की मार आम लोगों पर बढ़ने लगी हैं.आज कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े हैं, सोने और चांदी खरीदना पहले ही आम लोगों की पहुंच से बाहर है. रेल टिकट से लेकर गाड़ियों की कीमत में बढ़ोत्तरी हुई है.
साल 2026 में आम आदमी के सामने अब चुनौती यही है कि गहने खरीदें तो कैसे. साल के पहले दिन ही सरकार ने महंगाई का बड़ा झटका दिया, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम 111 रुपये बढ़ गए. भले ही घरेलु सिलेंडर के दाम में कोई बढोत्तरी नहीं हुई लेकिन कमर्शियल सिलेंडर के दाम में हुए इजाफे का असल आम जनता की जेब पर पड़ेगा. अब होटल, रेस्टोरेट और बाजारों में बिकने वाला खाने का सामान महंगा होगा.
2026 के आगाज से पहले ही रेल यात्रियों की जेब पर किराये का बोझ बढ़ चुका है. 215 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा के लिए साधारण क्लास में प्रति किलोमीटर एक पैसे और मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों के नॉन एसी और सभी ट्रेनों के एसी क्लास में किराया प्रति किलोमटीर दो पैसे बढ़ा दिया गया है.
नए साल पर कई कार कंपनियों ने अपनी गाड़ियों के दाम बढ़ाने का एलान करते आम लोगों को बडा झटका दिया. हुंडई, MG, निसान जैसी कंपनियां ने इनपुट कॉस्ट लॉजिस्टिक्स खर्च समेत दूसरे खर्चों का हवाला देकर कीमतें बढ़ा दी हैं, यानी बीते साल जीएसटी से आम लोगों को मिली राहत पर एक बार फिर बढ़ी हुई कीमतें चोट देने के लिए तैयार है.
3. खेल की बात
अब बात, भारतीय क्रिकेट में चुनौती की. क्योंकि साल 2026, टीम इंडिया के लिए बेहद अहम है. टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है घरेलू मैदान पर टी20 विश्व कप जीतना. क्योंकि टीम इंडिया पिछली बार की चैंपियन है, ऐसे में टी-20 विश्वकप का खिताब बचाने की चुनौती है.
टीम इंडिया का टारगेट, अपनी पिछली कमियों को सुधारते हुए, वैश्विक स्तर पर अपना दबदबा बनाए रखना होगा. साल 2025 भारतीय क्रिकेट टीम के लिए मिला जुला रहा है. जहां साउथ अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में हार का सामना करना पड़ा वहीं चैंपियंस ट्रॉफी जीतकर और टी20 में बेहतरीन प्रदर्शन कर टीम ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया. अब 2026 की सबसे बड़ी चुनौती घरेलू मैदान पर होने वाले टी20 विश्व कप में अपने खिताब का बचाव करना है.
4. आतंकवाद
आतंक से निपटने की चुनौती नया साल लेकिन चुनौती वही पुरानी है. एक बार फिर पाकिस्तान ने अपनी नापाक साजिश के तरह ड्रोन से विस्फोटक भेजने की कोशिश की है, लेकिन सेना ने पाकिस्तानी साजिश पर वक्त रहते पानी फेर दिया. दरअसल सेना ने पुंछ में नियंत्रण रेखा के करीब ड्रोन से गिराई गई विस्फोटक सामग्री को बरामद किया है. वही दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में संदिग्ध आतंकियों का सर्च ऑपरेशन जारी है. पुंछ में ही पाकिस्तान में बैठे आतंकी रफीक उर्फ सुल्तान की संपत्ति को अटैच किया गया है. मतलब नए साल में भी आतंकी हमलों का खतरा बना हुआ है.
साल 2025 में हुए दो बड़े आतंकी हमलों (पहलगाम और दिल्ली धमाके) ने 2026 में सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बढ़ा दी है, क्योंकि सुरक्षा में हुई छोटी से चूक भी 2026 में बड़े आतंकी हमले की वजह बन सकती है.
2026 में देश से नक्सलवाद को खत्म करना भी एक चुनौती हैं, सरकार का दावा है कि 2026 में देश से नक्सलवाद खत्म हो जाएगा.
5. इंटरनेशनल रिलेशन
साल 2026 भारत के लिए पड़ोसी मुल्कों और अंतर्राष्ट्रीय रिश्तों के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाला है. नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही पूरी दुनिया की नजरें उन चुनावी मैदानों पर टिक गई हैं, जो वैश्विक राजनीति की दिशा बदलने वाले हैं. साल 2025 में दर्जनों देशों में हुए मतदान के बाद, अब 2026 का कैलेंडर उन बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रहा है जिनका सीधा असर भारत की सुरक्षा, व्यापार और कूटनीति पर पड़ेगा.
वैश्विक राजनीति में भारत के लगातार बढ़ते कद और दखल की वजह से पश्चिम से लेकर पूर्व तक के देशों में होने वाले चुनाव अहम हैं. हालांकि, कुछ चुनावों पर भारत की खास नजर रहेगी. इनमें तीन पड़ोसी मुल्कों- बांग्लादेश और नेपाल के चुनाव भारत पर सीधा प्रभाव डालेंगे. इसके अलावा इज़रायल और रूस के चुनाव अहम होने वाले हैं.
बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नज़र
इस वक्त बांग्लादेश में जो हालात हैं, ऐसे में बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर है क्योंकि अगस्त 2024 के तख्तापलट और शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद ये पहला आम चुनाव होगा. खालिदा जिया के निधन के बाद अब उनके बेटे तारिक रहमान के सामने अपनी जमीन बचाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ कट्टरपंथी ताकतों का उभार भारत की चिंता बढ़ा रहा है.
सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से ये चुनाव दिल्ली के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है. बांग्लादेश का चुनाव भारत के लिए सीधे तौर पर बड़े मायने रखता है. ये चुनाव भारत और बांग्लादेश के बीच भविष्य के संबंधों को तय करने में निर्णायक होगा. खासकर ऐसे समय में जब मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के रवैये से दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ा है. इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश में फांसी की सज़ा सुनाई गई है. और वो भारत शरण लिये हुए हैं. ऐसे में उनका भारत में होना एक अहम कूटनीतिक और सुरक्षा हित को दर्शाता है. ढाका में सत्ता परिवर्तन और अस्थिरता का खतरा भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा और भू-राजनीतिक हितों को प्रभावित करता है.
नेपाल चुनाव भी भारत के लिए अहम
बांग्लादेश की तरह ही नेपाल में साल 2025 में एक गृहयुद्ध छिड़ा. यहां जेन-जी के प्रदर्शन के चलते सितंबर में पीएम केपी शर्मा ओली की सरकार को इस्तीफा देना पड़ा. बाद में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ, जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की कर रही हैं. अब नेपाल में चुनाव की तैयारियां जारी हैं. इस बीच काठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेंद्र शाह, जिन्हें लोकप्रिय रूप से बालेन के नाम से जाना जाता है, उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नामित किया गया. उन्होंने 5 मार्च को होने वाले नेपाल चुनावों में संयुक्त रूप से चुनाव लड़ने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए है.
भारत और नेपाल के रिश्ते भी ऐतिहासिक तौर पर बेहद नजदीकी रहे हैं. हालांकि, केपी शर्मा ओली के नेतृत्व में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिनसे रिश्तों में कुछ खटास आई. उनके मुकाबले शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल प्रचंड के नेतृत्व में भारत-नेपाल के रिश्ते बेहतर रहे हैं. अब ओली के पद से हटने और युवाओं के नेतृत्व से जुड़ने की इच्छा के चलते भारत लगातार नेपाल की मदद करने की बात कह रहा है.
इजरायल और रूस के चुनाव भी अहम
अक्टूबर 2026 में इजरायल में होने वाले चुनाव भारत के लिहाज से काफी अहम हैं. 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद होने वाले पहले चुनाव होंगे. मजेदार बात ये है कि इज़रायल में मार्च 2026 तक नया बजट पारित होना है. अगर ये बजट पारित कराने के लिए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जरूरी समर्थन नहीं जुटा पाते तो उनकी सरकार अल्पमत में मानी जाएगी और चुनाव की प्रक्रिया खुद-ब-खुद शुरू हो जाएगी.
वहीं साल 2026 में रूस अपने दूसरे सबसे अहम- आम चुनावों का आयोजन करने वाला है. इन आम चुनावों के जरिए रूस की संसद- डूमा के लिए सांसदों का चुनाव होगा. इसी के साथ देश में क्षेत्रीय गवर्नरों का चुनाव भी होगा. इसके अलावा रूस के 39 प्रांतों में स्थानीय चुनाव और शहरों में निकाय चुनाव का आयोजन होना है. यूक्रेन से जंग के बावजूद रूस में इन चुनावों की तैयारियां जारी हैं. स्वतंत्र वेबसाइट रशियन इलेक्शन मॉनिटर के मुताबिक, रूस की सरकार पुतिन के लिए समर्थन के लिहाज से इन चुनावों को अहमियत दे रही है. हालांकि रूस के आंतरिक डूमा चुनावों का भारत पर सीधा कोई असर पड़ने की संभावना कम है.
दुनिया में युद्ध के कई फ्रंट खुलने का खतरा
यूक्रेन और रूस युद्ध, चीन और ताइवान में तनाव, इजरायल और ईरान में तनाव, अमेरिका और वेनेजुएला तनाव... 2026 की शुरुआत दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जबरदस्त तनाव के बीच हुई, रूस और यूक्रेन युद्ध में यूरोप की एंट्री किसी भी वक्त हो सकती है. चीन और ताइवान के बीच जारी तनाव में अमेरिका की एंट्री हो सकती है.
ईरान और इजरायल में बढ़ता तनाव एक बार फिर दुनिया की महाशक्तियों को आमने-सामने खड़ा कर सकता है. यानी 2026 की शुरुआत महायुद्ध के मंडराते बादलों के बीच हुई हैं. नए साल की कोई भी नई तारीख, महायुद्ध की गवाह बन सकती है. लेकिन सबसे बड़ा तनाव इस वक्त यूक्रेन,रूस और यूरोप के बीच बना हुआ है. भले ही ट्रंप के शांति प्रस्ताव को लेकर लगातार वार्ता चल रही हैं, जेलेंस्की ने ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर करीब-करीब हामी भर दी हैं, लेकिन वार्ता के बीच रूस के आरोपों से पूरा मामला सुलझाने की बजाय और उलझ गया है.
रूस का आरोप यही है कि यूक्रेन ने राष्ट्रपति पुतिन को निशाना बनाते हुए उनके घर पर ड्रोन से हमले की कोशिश की. रूस के आरोप को यूक्रेन ने खारिज कर दिया. ऐसे में युद्धविराम की उम्मीद बहुत कम हैं, क्योंकि पुतिन के घर पर ड्रोन हमले का बदला रूस की सेना यूक्रेन से जरूर लेगी. संभव है बहुत जल्द यूक्रेन की राजधानी पर बड़ा हमला हो, इससे ट्रंप की कोशिश को बड़ा झटका लगेगा. संभव है 2026 में रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति की भविष्यवाणी सच हो जाए.
तीसरे विश्ययुद्ध की आशंका ट्रंप ने चंद दिन पहले जताई थी, इसकी वजह है रूस को लेकर यूरोप के कई मुल्कों के राष्ट्राध्यक्षों की जिद. यूरोप यही चाहता है कि यूक्रेन युद्ध में जब तक पुतिन की हार नहीं होगी तब तक युद्धविराम नहीं होगा.
6. 2026 में भारत में BRICS देशों का सम्मेलन
भारत के लिए, ये ब्रिक्स का साल है. 2026 में भारत में BRICS देशों का सम्मेलन है. भारत में अब तक हुए तमाम कूटनीतिक इवेंट में ये एक सबसे बड़े आयोजन में एक होगा. भारत सरकार इसे G20 की तर्ज पर ही भव्य और व्यापक बनाने की कोशिश में है जिसके ग्लोबल समुदाय को एक संदेश दे सके.
ग्लोबल ऑर्डर में नैरेटिव वॉर की अहमियत को भारत ने समझा. कूटनीतिक मोर्चे पर ये नई चुनौती सामने आई है. 2026 में भारत की चुनौती होगी कि इस नई चुनौती का सामना करे और नैरेटिव वॉर में भी वह बढ़त ले. जानकारों के अनुसार अब ये आधुनिक कूटनीति का अहम हिस्सा बन गया है.
पश्चिम एशिया हो या फिर यूक्रेन युद्ध, भारत ने मौजूदा साल में भी लगातार डिप्लोमेसी और डायलॉग के साथ संघर्ष के समाधान की बात की है. भारत ने मौजूदा साल में पूतिन की भारत यात्रा के दौरान रूस के साथ ऐतिहासिक रिश्तों को दोहराया है तो ईयू और यूरोप के देशों के साथ आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों में नया आयाम तलाशने की कोशिशें की है. इसलिए ग्लोबल संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है.
7. प्राकृतिक आपदाओं का चैलेंज
देश के सामने एक चैलेंज प्राकृतिक आपदाओं को कम करने का है. चैलेंज है दिल्ली में वायु प्रदूषण कम करने का, और चैलेंज है फिट यानी सेहतमंद रहने का है. 2025 में प्राकृतिक आपदाओं ने भयंकर उत्पात मचाया था. कहीं बादल बेहिसाब फटे. कहीं भूस्खलन ने तबाही मचा दी तो कहीं बाढ़ से त्राहिमाम मच गया. इनमें हज़ारों जानें गईं, करोड़ों अरबों का नुकसान हुआ.
बीते साल दिल्ली-एनसीआर के लोगों को वायु प्रदूषण से राहत नहीं मिल पाई है. साल के पहले दिन भी दिल्ली में AQI गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया. दिल्ली के लगभग सभी इलाकों में एक्यूआई 300 से 420 के बीच रिकॉर्ड किया गया, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक माना जाता है. लेकिन 2026 में दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार के लिए, जनता को प्रदूषण से राहत दिलाने की बड़ी चुनौती है. सवाल ये भी है कि क्या 2026 में दिल्ली से कचरे के 3 पहाड़, गाजीपुर, ओखला और भलस्वा दिसंबर तक गायब हो पाएंगे. क्योंकि, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और कूड़े के पहाड़ों से निजात दिलाने के लिए पर्यावरण मंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं.
8. मोटापे को मिटाने और फिट रहने का चैलेंज
साल 2026 का जश्न लोगों ने जमकर मनाया. तो नए साल के स्वागत के साथ, लोगों को खुद को फिट रखने का चैलेंज भी लिया. ऐसे में साल 2026 के अंदर मोटापे जैसी बीमारियों से निपटने के लिए दवाओं का इस्तेमाल तेज़ी से बढ़ सकता है. क्योंकि ओज़ेम्पिक और वेगोवी जैसी वजन घटाने वाली दवाओं की मांग बढ़ रही है. और भारत समेत कई देशों में इनका बाज़ार फैलने की उम्मीद है लेकिन इन दवाओं के लंबे समय के असर, ज़्यादा कीमत और लगातार इस्तेमाल की ज़रूरत को लेकर चिंता बनी हुई है.
9. साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट
साइबर ठगी को खत्म करने की चुनौती. आज देशभर में, ना जाने कितने लोग साइबर फ्रॉड का शिकार होकर, अपने करोड़ों रुपए गंवाकर, पुलिस के सामने और थानों के अंदर धक्के खा रहे हैं. 2026 में साइबर ठगी से कैसे निजात मिलेगी, ये एक बड़ी चुनौती है.
साइबर क्राइम पुलिस की जांच में सामने आया कि साल 2025 में शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है. लोगों को फर्जी ऐप, वॉट्सऐप ग्रुप और रोज तय मुनाफे का झांसा देकर लोगों को फंसाया जा रहा है. 2025 के जाते -जाते, एक पंजाब के पूर्व आईजी अमर सिंह चहल, साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं. पूर्व आईजी 8 करोड़ 10 लाख की साइबर ठगी के बाद, अपनी रिवॉल्वर से खुद को गोली मारकर सुसाइड करने की कोशिश करते हैं.
साल 2025 में साइबर ठगी से संबंधित 24442 शिकायतें दर्ज हुईं इनमें से ठगों ने 117 करोड़ रुपये की साइबर ठगी की गई. जागरूकता के चलते पीड़ितों ने तत्काल टोल फ्री नंबर 1930 पर संपर्क किया, जिसके चलते 27.2 करोड़ रुपये बचाए गए.
10. किसान और नौजवान परेशान
2026 में देश के किसान और देश के नौजवानों के सामने भी कई चुनौतियां है. किसान खाद की किल्लत से जूझ रहा है तो नौजवान बेरोजगारी की मार से. सवाल यही है 2026 में हालात बदलेंगे या नहीं.
आज किसानों को अपनी फसल के लिए खाद की किल्लत से जूझना पड़ रहा है, तो बेरोजगारी की मार से नौजवान को रोजगार के लिए दर-दर की ठोकरे खानी पड़ रही है. ये देश के अलग-अलग हिस्सों से आई किसानों की तस्वीरें हैं, साल 2025 खाद की किल्लत से किसानों. की कमर टूट गई. सरकार के तमाम दावों के बावजूद खाद की किल्लत दूर नहीं हुई.
कई-कई दिनों तक लाइनों में खड़े होने के बाद भी किसानों को जरूरत भर की खाद नहीं मिली. खाद की किल्लत से निपटने के लिए सरकार का पूरा जोर विदेशों से आयात पर टिका हुआ हैं, लेकिन किसानों की मांग के हिसाब से सरकारी रेट पर खाद बाजार में मौजूद नहीं है. साल 2026 में भी खाद के मोर्चे पर किसानों को जूझना पड़ सकता है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन और भारत के रिश्तों में तनाव की वजह से दुनियाभर में खाद की सप्लाई चैन बिगड़ी हुई हैं.
ठीक ऐसे ही रोजगार की तलाश कर रहे नौजवानों की राह भी आसान नहीं है. सरकारी महकमों में नई नौकरियों का दायरा लगातार सीमित होता जा रहा है, दूसरी तरफ पेपर लीक जैसी सरकारी अव्यवस्था नौजवानों की मेहनत पर सीधी चोट है. सरकारी दावों जो भी हो, लेकिन बेरोजगारी की बढ़ती तादाद लगतार देश के नौजवानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.