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HIV से AIDS तक... तीन स्टेज में फैलता है वायरस, फ्लू जैसे ही होते हैं लक्षण

देश में बीते 10 साल में 17 लाख से ज्यादा लोग HIV AIDS की चपेट में आए हैं. भारत में 2020 तक 23.19 लाख लोग HIV पॉजिटिव थे, जिनमें से 81 हजार से ज्यादा बच्चे थे.

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दुनिया में 1981 में HIV का पता चला था. भारत में 1986 में पहला केस आया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर) दुनिया में 1981 में HIV का पता चला था. भारत में 1986 में पहला केस आया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2020 में HIV के 57,549 नए मामले आए
  • देश में अब भी 23.19 लाख HIV संक्रमित
  • एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी से बचा जा सकता है

1981 में दुनिया में एक नया वायरस सामने आया. इसका नाम था ह्यूमन इम्युनोडिफेशिएंसी वायरस यानी HIV. ये वायरस शरीर के इम्युन सिस्टम पर हमला करता है और उसे इतना कमजोर कर देता है कि शरीर दूसरा कोई संक्रमण या बीमारी झेलने के काबिल नहीं बचता. HIV ऐसा वायरस है, जिसका समय पर अगर इलाज नहीं किया गया तो ये आगे चलकर AIDS की बीमारी बन जाता है. इसका अभी तक कोई पुख्ता इलाज नहीं है, लेकिन कुछ दवाओं के सहारे वायरल लोड को कम किया जा सकता है, जिससे शरीर का इम्युन सिस्टम मजबूत बना रहता है.

भारत में 1986 में पहली बार HIV का मामला सामने आया था. तब चेन्नई की रहने वालीं कुछ सेक्स वर्कर्स में इस संक्रमण की पुष्टि हुई थी. उस समय तक दुनिया के कई देशों में HIV पहुंच चुका था और भारत में भी इसकी एंट्री हो गई थी. HIV के संक्रमण के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है.

मध्य प्रदेश के रहने वाले एक्टिविस्ट चंद्र शेखर गौर ने एक RTI दायर की थी, जिसके जवाब में नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) ने बताया है कि 10 साल में भारत में 17 लाख से ज्यादा लोग असुरक्षित यौन संबंधों के कारण HIV की चपेट में आए हैं. NACO के मुताबिक, 2011 से 2021 के बीच 15,782 लोग ऐसे हैं जो संक्रमित खून के जरिए HIV पॉजिटिव हुए हैं. जबकि 4,423 बच्चे माओं के जरिए संक्रमित हुए हैं.

HIV से संक्रमित होने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध है. कई मामलों में संक्रमित खून के संपर्क में आने से भी संक्रमण हो जाता है. वहीं, बच्चों में ये संक्रमण उनकी मांओं से आ जाता है. इस वायरस को दुनिया में आए 40 साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस इलाज नहीं है. इससे संक्रमित लोगों को एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) दी जाती है, जिससे वायरल लोड कम होता है. अगर समय पर इलाज हो जाए तो काफी मदद मिलती है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो AIDS होने का खतरा बढ़ जाता है. आमतौर पर HIV की चपेट में आने के कई सालों बाद AIDS की बीमारी होती है. 

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क्या कहते हैं आंकड़े?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, अब भी ये वायरस हर साल लाखों लोगों को संक्रमित कर रहा है. 2020 के आखिर तक दुनिया में 3.77 करोड़ लोग ऐसे थे जो इस वायरस से संक्रमित थे. 2020 में दुनियाभर में 6.80 लाख लोगों की मौत का कारण HIV ही था. भारत में ही 51 हजार से ज्यादा मौतें AIDS की वजह से हुई. 

NACO के मुताबिक, 2020 में भारत में HIV के 57,549 नए मामले सामने आए थे. 2020 तक देश में 23.19 लाख लोग HIV संक्रमित थे. इनमें से 9.88 लाख महिलाएं थीं. 81 हजार 430 बच्चे भी इस वायरस से संक्रमित थे. 2020 में 51 हजार से ज्यादा मौतें HIV संक्रमितों की हो गई थी. वहीं, 32 हजार लोग ऐसे थे जिनकी मौत का कारण AIDS था.

HIV संक्रमितों की संख्या में गिरावट आने के ट्रेंड पर द्वारका स्थित आकाश हेल्थकेयर में इंटरनल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट प्रभात रंजन सिन्हा ने न्यूज एजेंसी को बताया कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन प्रतिबंधों के कारण, पिछले दो साल में HIV की पहचान कम हो गई है. उन्होंने बताया कि अब कोविड जा रहा है, इसलिए HIV मरीजों की संख्या बढ़ सकती है. अगर कोई HIV संक्रमित होता है तो उसे जल्द से जल्द एंटीरेट्रोवायरल थैरेपी (ART) शुरू कर देनी चाहिए.

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HIV से AIDS तक... ऐसे फैलता है वायरस

असुरक्षित यौन संबंध बनाने और संक्रमित खून के संपर्क में आने से HIV का खतरा बढ़ जाता है. सही समय पर इसका इलाज शुरू कर देना बहुत जरूरी है. अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (CDC) के मुताबिक, HIV से संक्रमित होने पर फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे- बुखार होना, गला खराब होना या कमजोरी आना. इसके बाद इस बीमारी में तब तक कोई लक्षण नहीं दिखाई देते, जब तक AIDS न बन जाए. AIDS होने पर वजन घटना, बुखार आना या रात में पसीना आना, थकान-कमजोरी जैसे लक्षण दिखते हैं. आमतौर पर HIV के AIDS में तब्दील होने में तीन स्टेज लगती है.

पहली स्टेजः व्यक्ति के खून में HIV का संक्रमण फैल जाता है. इस समय व्यक्ति बहुत से और लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इस स्टेज में फ्लू जैसे लक्षण दिखते हैं. हालांकि, कई बार संक्रमित व्यक्ति को कोई लक्षण भी महसूस नहीं होते.

दूसरी स्टेजः ये वो स्टेज होती है जिसमें संक्रमित व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखता, लेकिन वायरस एक्टिव रहता है. कई बार 10 साल से भी ज्यादा वक्त गुजर जाता है, लेकिन व्यक्ति को दवा की जरूरत नहीं पड़ती. इस दौरान व्यक्ति संक्रमण फैला सकता है. आखिर में वायरल लोड बढ़ जाता है और व्यक्ति में लक्षण नजर आने लगते हैं.

तीसरी स्टेजः अगर HIV का पता लगते ही अगर दवा लेनी शुरू कर दी जाए तो इस स्टेज में पहुंचने की आशंका बेहद कम होती है. HIV का ये सबसे गंभीर स्टेज है, जिसमें व्यक्ति AIDS से पीड़ित हो जाता है. AIDS होने पर व्यक्ति में वायरल लोड बहुत ज्यादा हो जाता है और वो काफी संक्रामक हो जाता है. इस स्टेज में बिना इलाज कराए व्यक्ति का 3 साल जी पाना भी मुश्किल होता है.

कैसे बचा जाए?

HIV का संक्रमण फैलने का सबसे ज्यादा खतरा असुरक्षित यौन संबंध से होता है. भारत में भी HIV का पहला मामला सेक्स वर्कर्स में ही सामने आया था. इसलिए यौन संबंध बनाते समय प्रिकॉशन जरूर इस्तेमाल करें. इसके अलावा इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वालों से भी दूर रहना चाहिए. 

अगर HIV का पता चल जाए तो घबराने की बजाय तुरंत एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी शुरू करें, क्योंकि HIV शरीर को बहुत कमजोर बना देता है और धीरे-धीरे दूसरी बीमारियां भी घेरने लगती हैं. अभी तक इसका इलाज भले ही नहीं है, लेकिन दवाओं के जरिए इससे बचा जा सकता है.

 

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