फ्रांस ने एक बार फिर यूएनएससी में भारत की सदस्यता का समर्थन किया है. भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनैन इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस के रिश्ते लगातार मजबूत हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब भी चुनौतियां आई तो दोनों दोनों ने एक-दूसरे का सहयोग किया. उन्होंने कहा कि कोविड एक बड़ी चुनौती रहा और इस दूतावास में हम सबने दुःख महसूस किया, लोगों की पीड़ा देखी.
उन्होंने बताया, 'हमने दूसरी लहर के दौरान मदद करने की कोशिश की जैसा कि भारत ने पहली लहर के दौरान किया था. हमने दवाओं, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स के साथ सहायता करने की कोशिश की. ये दूतावास एक NGO की तरह काम कर रहा था. हमारी साझेदारी में यही खास है.'
यूएनएससी में मिले भारत को सदस्यता
भारत की UNSC सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, 'यह कठिन समय है. हम वास्तव में सोचते हैं कि भारत को जल्द से जल्द यूएनएससी का हिस्सा बनना चाहिए. भारत एक प्रमुख देश है और भारत जैसे महान देश के सदस्य होने से यूएनएससी अधिक कारगर होगी.
भारत के साथ द्विपक्षीय सहयोग को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि हम अंतरिक्ष उद्योग, प्रौद्योगिकी उद्योग और एआई पर काम करना चाहते हैं. लेनैन ने बताया कि फ्रांस चाहता है कि हमारे दोनों देशों को अधिक स्वायत्तता मिले और यह हम तभी कर सकते हैं जब हम कुछ ऐसे कार्यक्रम साझा तौर पर करें जिन्हें हम अकेले नहीं कर सकते. हमारे पास कुछ मजबूत अनुसंधान एवं विकास हैं और उस मोर्चे पर हमें और अधिक सहयोग करना चाहिए.
हम कर रहे हैं टेक्नोलॉजी ट्रांसफर
भारत के 'मेक इन इंडिया' अभियान और रक्षा सहयोग तथा राफेल विमान के अलावा हम और क्या उम्मीद कर सकते हैं? उन्होंने कहा कि मेक इन इंडिया पहले से ही काम कर रहा है, हमारी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, हम वर्षों से 'मेक इन इंडिया' में लगे हुए हैं.
लेनैन ने बताया कि हमारे सभी कारखाने और साझेदार भारत में हैं, हम 'मेक इन इंडिया' से आगे निकल गए हैं. उन्होंने बताया, 'अब हम जो करना चाहते हैं वह है "सह-विकास" जिसमें न केवल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर कर रहे हैं बल्कि हमारे इंजीनियर और टीमें भविष्य के उपकरणों के लिए मिलकर काम कर रही है. उदाहरण के लिए हम पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर मिलकर काम कर रहे हैं और अगली पीढ़ी के इंजन का सह-विकास कर रहे हैं.'
भारत को दी जी 20 के लिए बधाई
भारत के सफल G20 और एक संयुक्त बयान पर लैनेन ने कहा क्या किसी दूसरे देश में ऐसा हो सकता था? भारत ने सभी पक्षों की सहमति हासिल की जो शानदार है. उन्होंने कहा, जब दुनिया अधिक बंटी हुई है तब सबको एकजुट करना और सहमति बनाना एक बड़ी उपलब्धि है. भारत इसके लिए बधाई का पात्र है. भारत की अध्यक्षता में हम सौभाग्यशाली थे कि हमें सर्वसम्मति प्राप्त हुई. ऐसे बहुत कम देश हैं जो दक्षिण और उत्तर के बीच, अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के बीच की खाई को पाट सकें और हम जानते हैं कि इन दिनों बहुत सारे विरोधी विचार हैं. यह बहुत अच्छा है कि यह भारत था. उनके नेतृत्व के लिए धन्यवाद.'
यूक्रेन पर, G20 दस्तावेज़ में रूस की कोई निंदा नहीं है, इसका जवाब देते हुए लैनेन ने कहा, 'बाली घोषणा पत्र में इसका उल्लेख है और फिर आपके पास अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर स्पष्ट पैरा अंकित है. क्या यह महत्वपूर्ण है. जहां तक निंदा का सवाल है मुझे लगता है कि यह बहुत स्पष्ट है कि रूस इन दिनों अलग-थलग है. जी20 ने खुद को कैसे पेश किया यह बिल्कुल स्पष्ट है, रूस पूरी तरह से अलग-थलग है.
यूक्रेन के निराश होने पर, G7 और EU की स्थिति अब युद्ध प्रयासों में कैसे मदद करेगी? इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'देखिये हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं. हमने कुछ सैन्य सहायता दी है, हमने आबादी को सहायता दी है, कुछ यूक्रेनी शरणार्थियों का स्वागत किया है. हमने रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता में कटौती के लिए अहिंसक प्रकार के प्रतिबंध और दीर्घकालिक उपाय अपनाए हैं.यूरोप ने अपनी नियति अपने हाथों ले ली है.'
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारा पर कही ये बात
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप गलियारा क्या यह चीन के BRI का जवाब है? उन्होंने कहा, 'यह एक बहुत ही रोमांचक और आशाजनक विकास है, जो हमारे सभी देशों में समृद्धि लाएगा. मुझे नहीं लगता कि यह किसी के खिलाफ है. हम चीजों को ऐसे नहीं देखते हैं. हमारी इंडो-पैसिफिक रणनीति भी किसी के खिलाफ नहीं है. हम कुछ वैकल्पिक समाधानों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं. हम ऐसे समाधान ढूंढना चाहते हैं जो हमारे मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान, लोकतंत्र के सम्मान के अनुरूप हों. हम इसे भारत के साथ साझा करते हैं.'
आतंकवाद पर भारत के साथ खड़े हैं
कश्मीर के अनंतनाग में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए अफसरों और सीमा पार आतंकवाद पर लैनिन ने कहा, 'हम बहुत दुखी हैं. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई ही हमारे दोनों देशों को एकजुट करती है और हम एक साथ खड़े हैं. हमारे बीच बहुत सहयोग है, हमारे विशेष बल एक साथ प्रशिक्षण लेते हैं. हम आतंकवाद की जड़ों तक पहुंचने की दिशा में काम करते हैं और हमें करना भी चाहिए.हमने आतंकवाद के वित्तपोषण ('नो मनी फॉर टेरर' सम्मेलन) से लड़ने की प्रक्रिया शुरू की.हम अफसरों औऱ जवानों की शहादत पर दुख है.