एनसीपी के कद्दावर नेता धनंजय मुंडे ने महाराष्ट्र में कैबिनेट मंत्रीपद की शपथ ली है. धनंजय मुंडे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता हैं. धनंजय मुंडे का पहला परिचय यही है कि वे बीजेपी के कद्दावर नेता रहे गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं. विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी ही चचेरी बहन और गोपीनाथ मुंडे की बेटी पंकजा मुंडे को परली विधानसभा सीट पर 30 हजार से ज्यादा वोटों से शिकस्त दी थी.
फडणवीस को CM बनवाने में अहम रोल
महाराष्ट्र में नवंबर में जब देवेंद्र फडणवीस ने सीएम और अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी तो इस दौरान धनंजय मुंडे की बड़ी भूमिका थी. धनंजय मुंडे ही वो शख्स थे जिन्होंने शपथ ग्रहण के पहले विधायकों को एकजुट किया और अपने घर पर बुलवाया. यहीं से सभी विधायक राज्यपाल के घर पहुंचे.
यहां पर एक आश्चर्यजनक घटनाक्रम में फडणवीस ने सीएम और अजित पवार ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी. देवेंद्र सुबह जब सुबह-सुबह सीएम पद की शपथ ले रहे थे तो उस दौरान धनंजय मुंडे वहीं मौजूद थे. उनके सांगठनिक क्षमता को देखकर उन्हें मराठा पॉलिटिक्स का नया किंगमेकर कहा जा रहा था. लेकिन शरद पावर ने जब बागी विधायकों के खिलाफ एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत कार्रवाई की बात की तो धनंजय मुंडे ने पाला बदल लिया और वे एक बार फिर से शरद पवार के खेमे में वापस आ गए. अब वे एक बार फिर से एनसीपी कोटे से महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बन गए हैं.
चाचा गोपीनाथ से पकड़ी अलग राह
धनंजय मुंडे ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत महाराष्ट्र में भाजपा युवा मोर्चा की राजनीति से शुरू की थी. गोपीनाथ मुंडे के जमाने में बेहद सक्रिय रहे और राज्य की राजनीति में जुझारू नेता के तौर पर जाने लगे. लेकिन चाचा गोपीनाथ मुंडे के साथ हित का टकराव हुए और धनंजय मुंडे 2012 में एनसीपी में शामिल हो गए. हालांकि इससे पहले वे 2002 से 2007 तक भाजपा जिला परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं. एनसीपी ने इस बार पंकजा के खिलाफ परली जैसे कठिन सीट से उन्हें टिकट दिया था, लेकिन इस सीट से उन्होंने जीत हासिल की. धनंजय 2014 से 2019 तक महाराष्ट्र विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता भी रहे.
15 जुलाई 1975 को जन्मे धनंजय पंडित राव मुंडे ने अपनी प्राथमिक शिक्षा परली और बीड में ली है. औरंगाबाद की डॉ बाबा साहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी औरंगाबाद से उन्होंने आगे की शिक्षा ली है.