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साईं मंदिर के फैसले पर तृप्ति देसाई का सवाल, सिर्फ श्रद्धालु सभ्य कपड़े क्यों पहनें, पुजारी तो अर्द्धनग्न रहते हैं

शिरडी के साईबाबा मंदिर न्यास की ओर से श्रद्धालुओं को “सभ्य तरीके से” कपड़े पहनकर मंदिर आने की अपील की गई है. इस अपील पर सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने आपत्ति जताई है और पूछा है कि श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए दोहरे मापदंड क्यों हैं.

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सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई (फाइल फोटो-पीटीआई)
सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई (फाइल फोटो-पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साईं मंदिर प्रबंधन के फैसले का विरोध
  • 'सभ्य कपड़े पहन मंदिर आएं श्रद्धालु'
  • 'पुजारी तो अर्द्धनग्न अवस्था में रहते हैं'

सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने कहा है कि साईंबाबा मंदिर में सिर्फ श्रद्धालुओं को ही सभ्य कपड़े पहनकर आने क्यों कहा जा रहा है. मंदिर में पुजारी अर्द्धनग्न रहते हैं लेकिन उसपर किसी श्रद्धालु ने तो आपत्ति नहीं जताई है. 

बता दें कि शिरडी के साईबाबा मंदिर न्यास की ओर से श्रद्धालुओं को “सभ्य तरीके से” कपड़े पहनकर मंदिर आने की अपील की गई है. इस अपील पर सामाजिक कार्यकर्ता तृप्ति देसाई ने आपत्ति जताई है और पूछा है कि श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए दोहरे मापदंड क्यों हैं. 

एक वीडियो संदेश में तृप्ति देसाई ने कहा कि मंदिर न्यास द्वारा श्रद्धालुओं के लिए इस प्रकार के बोर्ड लगाया जाना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के खिलाफ है. 

भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने यह भी कहा कि यदि बोर्ड नहीं हटाए जाएंगे तो वह और उनके अन्य कार्यकर्ता महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिरडी जाकर बोर्ड को हटा देंगे. 

श्री शिरडी साईबाबा संस्थान न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कान्हुराज बगाते ने मंगलवार को कहा कि न्यास ने केवल श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सभ्य तरीके की पोशाक पहनकर वहां आए. कान्हुराज ने कहा कि उन्होंने वेशभूषा को लेकर कोई नियम नहीं थोपा है. 

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शिरडी साईबाबा संस्थान न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा शिकायत की गई थी कि कुछ लोग आपत्तिजनक कपड़े पहनकर मंदिर में आते हैं जिसके बाद यह अपील की गई है.

कई मंदिरों-दरगाह में महिलाओं के प्रवेश को लेकर मुहिम चला चुकी तृप्ति देसाई ने कहा कि मंदिर के पुजारी अर्ध नग्न होते हैं, लेकिन किसी श्रद्धालु ने इस पर आपत्ति नहीं की है. बोर्ड को तत्काल हटाया जाना चाहिए वरना हम आकर हटा देंगे.

उन्होंने कहा कि विभिन्न जातियों, पंथ और धर्म के लोग देश और दुनिया से शिरडी आते हैं. तृप्ति देसाई ने कहा कि भारत में संविधान ने अपने नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है और इस अधिकार के अनुसार क्या बोलना है और क्या पहनना है यह व्यक्तिगत मामला है. 

 

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