
झारखंड के पश्चिम सिंहभूम में CO सुनील चंद्रा के नेतृत्व में छापेमारी के दौरान जब्त की गई 25 हाइवा में से 21 लापता है. मामला तूल पकड़ने पर सीओ द्वारा कोई जानकारी नहीं दी जा रही है जबकि पुलिस का कहना है कि उसे 25 गाड़ियों की लिस्ट दी गई थी जिसमें 4 ही जब्त कर सकी है बाकी के लिए छापेमारी जारी है.
छापेमारी में CO की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है. सवाल उठने लगा है कि जब जब्त 25 हाइवा की गई थी तो उनमें से 21 कैसे और कहां गायब हो गईं. क्या उन्हें सेटिंग करके जाने दिया गया. बाजार में एक हाइवा गाड़ी (Hyva) की कीमत करीब 56 लाख होती है.
पांच दिन पहले सीओ चंद्रा ने गिट्टी और चिप्स की अवैध ढुलाई के मामले में कई हाइवा जब्त की गई थी. पुलिस इसे फरार बता रही है. बड़ी बात यह है कि सारी प्रक्रिया कैमरे में कैद हुई लेकिन सरकारी कागज में हाइवा को गायब बताया जा रहा है.

दूसरी ओर, हाइवा मालिकों का आरोप है कि सीओ ने मनमानी कर की गाड़ियों को जब्त किया है. बिना कागजात मांगे वाहन का फोटो खींचकर जब्ती की गई है, और तो और CO ने अपने जब्ती लिस्ट में मोटरसाइकिल पर भी अवैध गिट्टी ढुलाई दिखा दिया है.
क्या कहती है पुलिस
पूरे प्रकरण पर पुलिस ने कहा है कि सीओ के द्वारा जब्त की गई गाड़ियों में से सिर्फ 4 ही पुलिस को मिल पाई है.
इस मामले में नोवामुंडी के थाना प्रभारी राकेश कुमार ने बताया कि 12 जून को नोवामुंडी के सीओ सुनील चंद्रा एक टाइप किया हुआ अप्लिकेशन लेकर थाना आए थे. उन्होंने 25 हाइवा गाड़ियों की लिस्ट उन्हें दी थी और बताया कि सुबह साढ़े छह बजे वे जांच के लिए निकले तो उन्होंने हाइवा गाड़ियों को अवैध गिट्टी चिप्स ढुलाई करते हुए पकड़ा.
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सीओ द्वारा दी गई लिस्ट के आधार पर पुलिस मौके पर पहुंची तो वहां दो ही गाड़ियां पुलिस को मिली जिसे जब्त कर थाना लाया गया. दूसरे दिन छानबीन करने पर और दो गाड़ियां पुलिस ने जब्त की. लिस्ट के आधार पर अब तक चार ही गाड़ियां पुलिस जब्त कर सकी है. जबकि 21 हाइवा गाड़ियों की तलाश में पुलिस की छापेमारी जारी है. नोवामुंडी थाना में 25 हाइवा गाड़ियों पर अवैध रूप से गिट्टी और चिप्स ढुलाई करने का मामला भी दर्ज किया जा चुका है.
इस मामले में नोवामुंडी सीओ सुनील चंद्रा से संपर्क कर उनका पक्ष लेने की कोशिश की गई. उन्हें लगातार कॉल किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया. वहीं उनके कार्यालय भी जाकर उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन वे कार्यालय में भी मौजूद नहीं थे. उनका कार्यालय बंद पाया गया. (इनपुट- जय कुमार तांती)