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झारंखड: CM हेमंत सोरेन ने कंबल घोटाले की जांच की समीक्षा की, एक्शन के निर्देश

झारक्राफ्ट रांची और कतिपय समितियों के द्वारा हरियाणा के पानीपत से कंबल खरीदे गए थे. 2018 में तत्कालीन मुख्य सचिव को कंबल खरीद में अनियमितता और आपूर्ति की गड़बड़ी को लेकर आवेदन दिया गया था. इसके बाद तत्कालीन विकास आयुक्त के द्वारा विभागीय सचिव को तथ्यों की जांच का आदेश दिया गया था.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • झारक्राफ्ट ने हरियाणा के पानीपत से खरीदे थे कंबल
  • एसीबी कर रही मामले की जांच

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कंबल घोटाले में चल रही एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच की समीक्षा की. साथ ही उन्होंने इस मामले में झारक्राफ्ट के प्रबंध निदेशक को दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू करने के लिए अनुमति भी दी. बता दें कि झारक्राफ्ट द्वारा हरियाणा के पानीपत से कंबल की खरीदारी की गई थी. 

क्या है मामला

झारक्राफ्ट रांची और कतिपय समितियों के द्वारा हरियाणा के पानीपत से कंबल खरीदे गए थे. 2018 में तत्कालीन मुख्य सचिव को कंबल खरीद में अनियमितता और आपूर्ति की गड़बड़ी को लेकर आवेदन दिया गया था. इसके बाद तत्कालीन विकास आयुक्त के द्वारा  विभागीय सचिव को तथ्यों की जांच का आदेश दिया गया था. 

कंबल खरीद में सामने आईं गड़बड़ियां

महालेखाकार झारखंड ने अनियमितता के संबंध में ऑडिट किया. महालेखाकार कार्यालय द्वारा कंबल उत्पादन से लेकर कंबल आपूर्ति में हुई गड़बड़ियों को उजागर किया गया. इसके बाद मामले की जांच संयुक्त रूप से कराई गई. इसके बाद तत्कालीन प्रबंध निदेशक झारक्राफ्ट द्वारा जांच रिपोर्ट विकास आयुक्त को सौंपी गई और कंबल आपूर्ति में अनियमितता की बात स्वीकार की गई. 

अनियमितता में कौन-कौन शामिल ?
 

झारक्राफ्ट के द्वारा 23 फरवरी 2018 को विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश की गई. इस रिपोर्ट में एनएचडीसी के पदाधिकारी, धागा आपूर्ति पदाधिकारी, ट्रांसपोर्टर नसीम अख्तर, तत्कालीन उप महाप्रबंधक झारक्राफ्ट अशोक ठाकुर, मुख्य वित्त पदाधिकारी झारक्राफ्ट और रेनू गोपीनाथ पणिक्कर, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी झारखंड की अनियमितता में शामिल होने की संभावना बताई गई. झारक्राफ्ट के प्रबंध निदेशक द्वारा रेनू गोपीनाथ पणिक्कर, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, अशोक ठाकुर, मुख्य वित्त पदाधिकारी झारक्राफ्ट से स्पष्टीकरण मांगा गया.  इसके बाद झारक्राफ्ट के द्वारा बताया गया कि कंबल निर्माण हेतु खरीद की विहित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. इसके बाद विभिन्न प्रक्रियाओं के तहत इस मामले की विस्तृत जांच का जिम्मा एसीबी को सौंप दिया गया. 

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