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चतराः विपक्षी महागठबंधन की हालत खराब, भाजपा के हाथ आ सकती है सीट

चतरा पहले हजारीबाग जिले का उपखंड था. 29 मई 1991 को इसे जिला घोषित किया गया. यह सीट राजद का गढ़ रही है. लेकिन 2014 का चुनाव बीजेपी के सुनील कुमार सिंह और जय प्रकाश भोक्ता जीते. सिंह सांसद बने और भोक्ता विधायक. 

चतरा का इटखोरी स्थित विख्यात भद्रकाली मंदिर. हर रोज आते हैं सैंकड़ों भक्त. (फोटो- झारखंड सरकार) चतरा का इटखोरी स्थित विख्यात भद्रकाली मंदिर. हर रोज आते हैं सैंकड़ों भक्त. (फोटो- झारखंड सरकार)

  • इटखोरी का भद्रकाली मंदिर विख्यात है
  • राजा राममोहन राय ने यहां किया था काम

चतरा पहले हजारीबाग जिले का उपखंड था. 29 मई 1991 को इसे जिला घोषित किया गया. एमसीसी नामक प्रतिबंधित नक्सली संगठन की वजह से यहां आए दिन उग्रवादी हिंसा होती रहती है. लेकिन सुरक्षाबलों की लगातार और कड़ी कार्रवाई के चलते पहले की तुलना में अब चतरा में नक्सली वारदात कम हो गए हैं. बड़ी नक्सली घटनाएं नहीं होती. चतरा पुलिस ने कई कुख्यात नक्सलियों को गिरफ्तार किया है. इस जिले में 12 विकास ब्लॉक, 154 पंचायत और 1474 राजस्व गांव हैं. यह जिला अपने झरनों के लिए भी जाना जाता है. यहां गोवा फॉल्स, केरिडाह फॉल्स, बिचकिलिया फॉल्स और गर्म पानी के स्रोत बलबल दुआरी पूरे राज्य में विख्यात हैं.

चतरा सीट: एक समय थी राजद का गढ़, 2014 में खिला बीजेपी का कमल

यह सीट लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का गढ़ रही है. यहां उसका मुकाबला बीजेपी से होता है. लेकिन 2014 का चुनाव बीजेपी के सुनील कुमार सिंह और जय प्रकाश भोक्ता जीते. सिंह सांसद बने भोक्ता विधायक बने. भाजपा को अपनी सीट और कुर्सी बचाए रखने के लिए काफी मेहनत करनी होगी. बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने महागठबंधन की अगुआई की थी, तब अंतिम समय में दिल्ली में सीटों का बंटवारा हुआ था और हेमंत सोरेन को विधानसभा चुनाव में महागठबंधन का नेता बनाना भी तय हुआ था. तब से झामुमो यह मानकर चल रहा था कि भावी महागठबंधन के नेता हेमंत सोरेन ही होंगे लेकिन कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने सोरेन के नेतृत्व के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है.

गिरिडीह में रामेश्वर उरांव ने साफ कहा, ''महागठबंधन का नेता अब तक घोषित नहीं किया गया है. महागठबंधन के स्वरूप पर अभी बातचीत बाकी है. सीटों के बंटवारे को लेकर विवाद है.'' पर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष इरफान अंसारी हेमंत सोरेन के नेतृत्व की बात मानते हैं. वे कहते हैं, ''तब यह कहा गया था कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा. अगर हम अलग-अलग लड़े तो वोटों का बंटवारा नहीं रुकेगा और फायदा भाजपा को होगा.''

इतिहासः मगध साम्राज्य से लेकर राजा राम मोहन राय तक

चतरा जिले का शानदार इतिहास रहा है. चतरा छोटानागपुर का प्रवेश द्वार है. यहां 232 बीसी में सम्राट अशोक का शासनकाल था. ऐसा भी कहा जाता है कि समुद्रगुप्त ने यही से दक्षिण कौशल राज्य के खिलाफ पहला हमला करने का निर्देश दिया था. तुगलक शासन के दौरान साम्राज्य दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गया. 1805-06 में यहां समाज सुधारक राजा राम मोहन राय भी रहे. 1857 के विद्रोह के दौरान राज्य के क्रांतिकारियों और ब्रिटिश सैनिकों के बीच महत्वपूर्ण चतरा की लड़ाई हुई. एक घंटे चली भयावह लड़ाई में 150 क्रांतिकारी शहीद हो गए. 56 ब्रिटिश सैनिक और अफसर मारे गए.

चतराः शिक्षा दर 60.18%, ग्रामीण आबादी ज्यादा

वर्तमान में जिले की कुल आबादी जनगणना 2011 के अनुसार 1,042,886 है. इसमें से 533,935 पुरुष और 508,951 महिलाएं हैं. जिले का औसत लिंगानुपात 953 है. जिले की 6 फीसदी आबादी शहरी और 94 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है. शहरों में औसत शिक्षा दर 80.9 फीसदी है, जबकि ग्रामीण इलाकों में 58.8 फीसदी है. जिले में कुल साक्षरता दर 60.18 फीसदी है. 56.92% पुरुष और 40.51 प्रतिशत महिलाएं साक्षर हैं.

चतरा की जातिगत गणित

  • अनुसूचित जातिः 340,553 (कुल आबादी का 32.7%)
  • अनुसूचित जनजातिः 45,563 (कुल आबादी का 4.4%)

जानिए...चतरा में किस धर्म के कितने लोग रहते हैं

  • हिंदूः 903,179
  • मुस्लिमः 116,710
  • ईसाईः 6,565
  • सिखः 888
  • बौद्धः 35
  • जैनः 129
  • अन्य धर्मः 12,936
  • धर्म नहीं बतायाः 2,444
चतरा जिले के कामगारों की स्थिति

चतरा में मुख्य कामगार कुल मिलाकर 397,690 लोग किसी न किसी तरह के रोजगार में शामिल हैं. इनमें 42 फीसदी या तो स्थाई रोजगार में हैं या साल के 6 महीने कमाते हैं.

  • मुख्य कामगारः 195,502
  • किसानः 75,717
  • कृषि मजदूरः 63,773
  • घरेलू उद्योगः 6,073
  • अन्य कामगारः 49,939
  • सीमांत कामगारः 202,188
  • जो काम नहीं करतेः 645,196
चतरा की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत

चतरा में हिंदी के साथ-साथ मगही, नागपुरी और खोरठा भाषा बोली जाती है. चतरा अपने प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है. यहां कोल्हुआ पहाड़ की चोटी पर बना प्राचीन मंदिर मां कौलेश्वरी देवी काफी विख्यात है. इटखोरी भद्रकाली मंदिर देखने के लिए हर रोज सैकड़ों लोग आते हैं. इसके अलावा बरूरा शरीफ और रबदा शरीफ नाम के मजार पर सभी धर्मों के लोग माथा टेकने आते हैं.

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