हेमंत सोरेन झारखंड के नए मुख्यमंत्री होंगे. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) गठबंधन को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है. गुमला सीट पर जेएमएम उम्मीदवार भूषण तिर्की ने बीजेपी उम्मीदवार मिशिर कुजूर को 7,667 वोटों के अंतर से हरा दिया है.
जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन ने 81 सीटों की प्रदेश विधानसभा में कुल 47 सीटों पर कब्जा जमा लिया है. जेएमएम को 30, कांग्रेस को 16 जबकि आरजेडी को एक सीट पर जीत मिली है.
हेमंत गठबंधन के मुखिया के तौर पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू के पास नई सरकार के गठन का दावा पेश करेंगे. उधर, रघुबर दास ने हार स्वीकारते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है.
गुमला जिले की विधानसभा सीटें-
1. गुमला: यहां 30 नवंबर को मतदान हुआ था. इस सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा के भूषण तिर्की ने 67416 वोटों के साथ जीत हासिल की है. इस कांटे की टक्कर देने वाले बीजेपी उम्मीदवार मिशिर कुजूर को 59749 वोट मिले हैं.
2. बिशुनपुर: यहां पहले चरण में मतदान हुआ था. इस विधानसभा सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जीत हासिल की है. जेजेएम प्रत्याशी चमरा लिंडा को 80864 वोट मिले हैं, जबकि बीजेपी उम्मीदवार अशोक उरांव ने 63482 वोट हासिल किए हैं.
गुमला के बारे में-
प्रकृति की सुंदरता से धन्य, गुमला जिला घने जंगलों, पहाड़ियों और नदियों से आच्छादित है. यह झारखंड के दक्षिण-पश्चिम भाग में स्थित है. 18 मई 1983 को रांची से अलग होकर गुमला नया जिला बना था. गुमला शब्द मुंडारी भाषा से लिया गया है. इसका हिंदी में मतलब है गौ-मेला. यानी जहां गायों का मेला लगता हो. ग्रामीण क्षेत्रों में नागपुरी और सादरी लोग इसे गोमीला भी कहते हैं. गुमला जिले में आदिवासी लोगों का वर्चस्व है. यहां की कुल आबादी का 68 फीसदी अनुसूचित जनजाति है. यह अनुसूचित क्षेत्र में आता है.
मध्यकालीन युग में छोटानागपुर क्षेत्र के नागा राजवंशों के राजाओं ने यहां शासन किया. ऐसा कहते हैं कि 1931-32 में कोल आंदोलन के समय बख्तर साय ने प्रमुख भूमिका निभाई थी. 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ क्विट इंडिया मूवमेंट भी यहां पर चला था. ब्रिटिश शासन के दौरान गुमला लोहरदगा जिले में था. यहां करीब 1.35 लाख हेक्टेयर में जंगल है. यानी पूरे जिले का 27 फीसदी इलाका जंगलों में हैं. गुमला जिले में 23 बॉक्साइट और 68 स्टोन खानें हैं.
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2009 से बीजेपी के पास थी विधायक की कुर्सी
2005 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के भूषण तिर्की विधायक बने थे. लेकिन 2009 से अब तक इस विधानसभा क्षेत्र से भाजपा का ही विधायक कुर्सी पर है. 2009 में भाजपा के कमलेश उरांव जीते थे. इसके बाद 2014 में भाजपा की तरफ से शिवशंकर उरांव विधायक बने. यहां पर धर्म, जातिवाद और आदिवासी मुद्दों पर ही चुनाव लड़ा जाता है.
10.25 लाख आबादी, साक्षरता दर 65.73 फीसदी
2011 की जनगणना के अनुसार गुमला की कुल आबादी 1,025,213 है. इनमें से 514,390 पुरुष हैं और 510,823 महिलाएं हैं. जिले का औसत लिंगानुपात 993 है. जिले की 6.3 फीसदी आबादी शहरी और 93.7 फीसदी ग्रामीण इलाकों में रहती है. जिले की साक्षरता दर 65.73 फीसदी है. पुरुषों में शिक्षा दर 62.56 फीसदी और महिलाओं में 46.58 फीसदी है.
लोहरदगा की जातिगत गणित
अनुसूचित जातिः 32,459
अनुसूचित जनजातिः 706,754
जानिए... गुमला में किस धर्म के कितने लोग रहते हैं?
हिंदूः 309,563
मुस्लिमः 51,429
ईसाईः 202,449
सिखः 221
बौद्धः 531
जैनः 23
अन्य धर्मः 457,468
जिन्होंने धर्म नहीं बतायाः 3,529
गुमला में कामगारों की स्थिति
गुमला की कुल आबादी में से 487,508 लोग कामगार है. इनमें से 57.2 फीसदी आबादी स्थाई रोजगार में हैं या साल में 6 महीने से ज्यादा कमाई करते हैं.
मुख्य कामगारः 278,931
किसानः 196,517
कृषि मजदूरः 33,161
घरेलू उद्योगः 7,482
अन्य कामगारः 41,771
सीमांत कामगारः 208,577
जो काम नहीं करतेः 537,705
पर्यटन, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत
गुमला के जंगलों को देखना ही अपनेआप में सुकून देने वाला होता है. इसके बावजूद यहां पर कई ऐसे स्थान हैं जहां जाकर आपको अच्छ लगेगा. कामडारा पर्यटन यानी आमटोली में स्थित भगवान शिव का पुराना मंदिर. इसके अलावा यहां पर बासुदेवकोना है. जो अजंता जैसी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है. टांगीनाथ एक मध्यकालीन युग का सबूत है. यहां मंदिर के परिसर में सैकड़ों शिव की मूर्तियां हैं. यहीं पर नागफेनी है. यह जगन्नाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. यहां सांप के आकार में बड़ी चट्टान है. इसके अलावा आंजन गांव है जो भगवान हनुमान की मां देवी अंजनी के नाम पर है. कहते हैं कि देवी अंजनी यहीं एक पहाड़ी गुफा में रहती थीं.