
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जम्मू कश्मीर के दौरे पर हैं. कश्मीर को लद्दाख को जोड़ने वाली जोजिला टनल का मंगलवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने निरीक्षण किया. गडकरी ने टनल के निर्माण कार्य की प्रगति जानी और परियोजना को 2024 के चुनाव से पहले पूरा कर लेने के निर्देश भी दिए. जोजिला और जेड मोड़ टनल का निर्माण हो जाने से लेह पूरे साल जम्मू कश्मीर से जुड़ा रह सकेगा.
जोजिला दर्रे के गांदरबल क्षेत्र में पत्रकारों से बात करते हुए नितिन गडकरी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को कोट करते हुए कहा कि अमेरिकी सड़कें इसलिए अच्छी नहीं हैं क्योंकि अमेरिका समृद्ध है. अमेरिका समृद्ध इसलिए है क्योंकि अमेरिकी सड़कें अच्छी हैं. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर और यहां के लोगों में भी रोड कनेक्टिविटी से ही समृद्धि आएगी. नितिन गडकरी ने कहा कि जोजिला और जेड मोड़ टनल का निर्माण तेज गति से किया जा रहा है. ये कार्य दिसंबर 2023 तक पूरा कर लेने को कहा है. उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि मैंने इसे 2024 के चुनाव से पहले पूरा करने को कहा है. सारे काम 2024 से पहले खत्म हो जाने चाहिए.

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की केंद्र में सरकार बनी थी तब जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राजमार्ग 1695 किलोमीटर था. अब ये 2021 में 2664 किलोमीटर पहुंच चुका है. इस क्षेत्र में 969 किलोमीटर नए राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कराया गया है. उन्होंने कहा कि किसी पर उंगली नहीं उठाना चाहता लेकिन ये काम पहले ही हो जाने चाहिए थे. जोजिला सुरंग परियोजना पर 2016 में योजना बनी थी. 2018 से इसके कई टेंडर रद्द हुए. गडकरी ने कहा कि ये परियोजनाएं भारत की रक्षा प्रणाली और जम्मू कश्मीर, लेह लद्दाख की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगी. जोजिला दर्रा, लेह लद्दाख को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर और शेष भारत के साथ जोड़ने की अहम रणनीतिक कड़ी है. गडकरी ने कहा कि ये परियोजनाएं भारत की रक्षा प्रणाली और जम्मू कश्मीर, लेह लद्दाख की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगी. जोजिला दर्रा, लेह लद्दाख को जम्मू कश्मीर के श्रीनगर और शेष भारत के साथ जोड़ने की अहम रणनीतिक कड़ी है

जोजिला सुरंग के बन जाने से करगिल, द्रास और लेह पूरे साल श्रीनगर से जुड़े रह सकेंगे. इन क्षेत्रों में पूरे साल सैन्य साजो-सामान पहुंचाने में सहूलियत हो जाएगी. तीन घंटे की दूरी महज 15 मिनट में सिमट जाएगी. माइनस 45 डिग्री की सर्दी में भी ये सुरंग आवाजाही के लिए सुरक्षित रहेगी. यही वजह है कि ना सिर्फ इन इलाकों में रहने वाले लोग, बल्कि भारतीय सेना भी जोजिला टनल के तैयार होने का इंतजार कर रही है. जब ये सुरंग बनकर तैयार होगी तो ये नायाब इंजीनियरिंग का मॉडल बन जाएगी. 11578 फीट की ऊंचाई पर श्रीनगर-लेह नेशनल हाइवे-1 पर 9.5 मीटर चौड़ी और 7.57 मीटर ऊंची सुरंग का निर्माण हो रहा है.

गौरतलब है कि इसी मार्ग के जरिये दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में तैनात जवानों को भी सप्लाई जाती है जो तकरीब छह महीने बर्फबारी के कारण रास्ता बंद रहने की वजह से नहीं हो पाती. इस सुरंग का निर्माण हो जाने पर पूरे साल आवागमन सुचारू हो सकेगा. इसका निर्माण साल 2026 तक पूरा कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. भारी बर्फबारी के कारण इस इलाके में करीब 10 से 12 फीट तक बर्फ जमा होती है जिसकी वजह से नवंबर से मई तक इस इलाके में सब्जी तक नहीं मिलती. यहां लोग नसाढ़े पांच महीने काम करते हैं और साढ़े छह महीने घर पर बैठते हैं.