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वकील की कम फीस के चलते फास्ट ट्रैक कोर्ट में PAK आतंकी का ट्रायल अटका

सरकार ने नावेद के लिए सतिंदर गुप्ता नाम के वकील को फाइनल किया. हालांकि, अभी तक मामले की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है. एनआईए ने चार्चशीट फाइल करके सतिंदर गुप्ता को नावेद का वकील बनाया था. वहीं, सतिंदर गुप्ता का कहना है कि उन्हें फीस के रूप में काफी कम पैसे मिले हैं. ऐसे में वो केस नहीं लड़ पा रहे हैं.

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आतंकी मोहम्मद नावेद
आतंकी मोहम्मद नावेद

जम्मू-कश्मीर से पकड़े गए एक आतंकी की फास्ट ट्रैक में सुनवाई सिर्फ इसलिए नहीं हो पाई, क्योंकि सरकारी वकील को फीस के तौर पर सिर्फ 1500 रुपये मिलते हैं. ऐसे में कम फीस मिलने पर फास्ट ट्रैक कोर्ट में पाकिस्तानी आतंकी के मामले की सुनवाई एक साल से लटकी है.

क्या है मामला?
मामला 5 अगस्त, 2015 का है. कश्मीर के उधमपुर में बीएसएफ ने मोहम्मद नावेद नाम के आतंकी को पकड़ा था. उसने अपने एक साथी नोमान के साथ बीएसएफ के काफिले पर हमला किया था, जिसमें सेना के दो जवान शहीद हो गए थे. नोमान मारा गया था, जबकि उसके साथी मोहम्मद नावेद को पकड़ लिया गया था. सरकार ने नावेद का ट्रायल फास्ट ट्रैक तरीके से कराने का फैसला लिया. सरकार ने नावेद के लिए सतिंदर गुप्ता नाम के वकील को फाइनल किया. हालांकि, अभी तक मामले की सुनवाई शुरू नहीं हो सकी है. एनआईए ने चार्चशीट फाइल करके सतिंदर गुप्ता को नावेद का वकील बनाया था. वहीं, सतिंदर गुप्ता का कहना है कि उन्हें फीस के रूप में काफी कम पैसे मिले हैं. ऐसे में वो केस नहीं लड़ पा रहे हैं.

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कोर्ट चाहता है हर हफ्ते मिले दो तारीख
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, सतिंदर गुप्ता का कहना है कि उन्हें पहले से ही काफी कम फीस मिली है. कोर्ट चाहता है कि वह दो हफ्ते में तीन तारीख रखें. व्यस्तता के चलते ऐसा संभव नहीं हो पा रहा. इसलिए उन्होंने मना कर दिया. उन्होंने बताया, मैंने कोर्ट से कहा कि अगर मैं हर महीने मैं हर महीने चार-पांच दिन केस को दूंगा, तो इसका मतलब है कि मुझे तैयारी के लिए और चार-पांच दिन चाहिए होंगे. यानी महीने के मेरे दस दिन ऐसे ही चले जाएंगे. ऐसे में मैंने केस से अलग होने का भी मन बना लिया था.’

फीस बढ़ाने के लिए जम्मू-कश्मीर के चीफ सेक्रेटरी से हो रही बात
फीस की बात सामने आने के बाद एनआईए ने सतिंदर गुप्ता को लेटर लिखा है, जिसमें उनकी फीस बढ़ाने के लिए जम्मू-कश्मीर के चीफ सेक्रेटरी से बातचीत करने की कोशिश का जिक्र किया गया है. एनआईए अपनी तरफ से भी गुप्ता को पैसा देने के लिए तैयार था, लेकिन कानून के हिसाब से राज्य सरकार को ही प्रतिवादी वकील को पैसा देना होता है.

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