कश्मीर के बच्चों से जुड़ा एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिससे पाकपरस्त नेताओं को शर्म न आए तो यकीन मानिए कि उनकी आंखों का पानी सूख चुका है. वीडियो में दिख रहे दस से बारह साल के बच्चों की उम्र खेलने की है और उनके हाथों में लकड़ी की बंदूक भी नकली खिलौने वाली है, लेकिन जुबां पर नारे असली हैं.
कैमरे के पीछे से एक शख्स लगातार उनसे नारे लगवा रहा है और बच्चे उन लफ्जों को दुहरा रहे हैं, जिसका मतलब तक वो नहीं जानते. छोटे-छोटे बच्चों को आतंक की दलदल में धकेलेने के इस कुत्सित प्रयास पर सुरक्ष बल चौकन्न्ो हो गए हैं. जिन बच्चों को राष्ट्र निर्माण में लगना चाहिए, जिनके हाथों में कलम, किताबें, टैबलेट होने चाहिए, उनके दिमाग में देशद्रोह और आतंकवाद का जहर भरा जा रहा है.
वीडियो की लोकेशन से फर्क नहीं पड़ता. फर्क तो इस बात से पड़ता है कि कैसे कश्मीरी बच्चों के दिलोदिमाग में आतंक का जहर घोला जा रहा है. कश्मीर की हिफाजत में तैनात आईजी मुनीर खान की बंदूकों के शोलों से आतंकी इतने घबराए कि मासूम बच्चों से धमकाने पर उतर आए.
बच्चों को आतंकियों ने साजिश का बम बना लिया है. ब्रेनवाश करके पहले नकली हथियार थमाए फिर असली. एक अन्य वीडियो दिखता है जिसमें यह दिखता है कि जिन हाथों ने नकली बंदूकें थमाई उन्हीं हाथों ने बच्चों को सेना और आतंकियों के दो ग्रुपों में बांटकर मुठभेड़ की प्रैक्टिस तक करवा दी.
ये वो बच्चे हैं, जो नारों का मतलब तो नहीं जानते, लेकिन जो जानते थे कि वो सरेंडर करके आतंकी ग्रुपों पर अपने हिस्से का जवाबी फायर कर चुके हैं.
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