कश्मीर के सबसे पुराने मिशनरी स्कूलों में से एक सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल बारामूला बंद होने की कगार पर है. कारण, अधिकारियों ने जमीन के लीज डीड के दस्तावेजों के अभाव में इस स्कूल के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए रजिस्टर करने से इनकार कर दिया है. ये स्कूल 121 साल पुराना है.
स्कूल ने कक्षा 9, 10, 11 और 12 के छात्रों के माता-पिता से स्थिति से बाहर निकलने और स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा उनके बच्चों का रजिस्ट्रेशन करने से इनकार करने के मद्देनजर अपने बच्चों के भविष्य के बारे में निर्णय लेने के लिए कहा है. 1903 में स्थापित यह स्कूल बारामूला जिले में राज्य की भूमि पर संचालित हो रहा है.
स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, जमीन की लीज डीड 2018 में खत्म हो गई थी और स्कूल ने इसके नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था. हालांकि, फाइल 2022 से डिवीजनल कमिश्नर कश्मीर के कार्यालय में मंजूरी के लिए लंबित है. स्कूल प्रबंधन ने दावा किया कि उसने हस्तक्षेप के लिए उपराज्यपाल के कार्यालय से संपर्क किया था लेकिन कोई राहत नहीं दी गई.
जम्मू-कश्मीर में अधिकारियों ने पिछले साल राज्य की भूमि पर अवैध रूप से संचालित निजी स्कूलों के छात्रों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए पंजीकरण नहीं कराने का फैसला किया था.
इस बीच, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (पीएसएजेके) ने शुक्रवार को इस घटनाक्रम पर अपनी चिंता और निराशा व्यक्त की. पीएसएजेके ने कहा, "प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ स्कूल बारामूला, जो 100 साल की विरासत वाला संस्थान है, के छात्रों को रजिस्ट्रेशन से वंचित करने की खबर ने कश्मीर में पूरे शिक्षा समुदाय को सदमे में डाल दिया है. अगर ऐसे स्थापित संस्थान को निशाना बनाया जा सकता है, तो ऐसा लगता है कि कोई नहीं सुरक्षित है."
एसोसिएशन ने कहा कि हम अधिकारियों से इस स्थिति की गंभीरता को समझने का आग्रह करते हैं. इस निर्णय का प्रभाव व्यक्तिगत छात्रों से कहीं अधिक दूर तक फैलेगा. इस तरह के हर कदम के साथ, हमें अंततः सैकड़ों निजी स्कूलों को बंद करने का सामना करना पड़ सकता है. यह हजारों शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों की आजीविका को अनिश्चितता में डाल देगा और घाटी में कई निजी स्कूलों के अस्तित्व को खतरे में डाल देगा.